कर खुद ही को बुलंद इतना कि….खुदा भी पूंछे, बंदे तेरी रजा क्या है

किशनगढ।* किसी के किये काम को किया बता दो या लोगों के सामने गिना दो *तो ना जाने क्यूं रुठ जाते हैं,मेरे शहर के लोग।*
*खैर !* माना कि *रुठना* और *मनाना* एक शगल है।लेकिन रुठने से पहले वक्त की नजाकत को समझ लेना भी जरुरी है। *नाज-नजाकत का वक्त हो तो रुठना बेहतर है और यदि वक्त,..बेवक्त बुरा आ पडा हो तो अपनों के साथ बेमानी ना करें और अपनी बुनियादी फितरत से खुद भी बचें एवं लोगों को भी बचे रहने की सलाह दें।* अभी अपने देश में ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में *कोरोना वाइरस* का जान लेवा कहर बरस रहा है। *पूरा मानव जीवन दांव पर लगा हुआ है।लोगों के सामने जीवित रहने के लाले पडे हैं।* जीवन रहा तो रुठना-मनाना
जारी रहेगा। *शासन रहेगा,राजनीति रहेगी,धन-दौलत रहेगी,रुतबा और ओहदा बद् दस्तूर जारी रहेगें।* आप सोच रहे होंगे आज मैं इस तरह की बांतो का उल्लेख आपके सामने क्यों कर रहा हूं…इत्मीनान रखिये वही कहने जा रहा हूं… गत कुछ दिनों से मेरी कलम *कोरोना वाइरस* की जंग में प्रशासन के साथ अग्रणी रुप से कूदे *किशनगढ विधायक सुरेश टाक* की पीठ थपथपाने में लगी *तो* साथ ही कलम ने *समूचे प्रशासन* की भी हौंसला अफजाई की है। *जो दिखाई दे रहा है उसे स्वीकार करते हुए लोगों के सामने रखना कलम का धर्म है।* मैं अकेला ही नहीं,सभी देख रहे हैं कि *प्रशासन किस कदर अपनी जान जोखिम में डाल कर लोगों की जान बचाने में लगा है।शहर में कौन-कौन लोग प्रशासन के साथ इस मुहिम में खडे हैं,कौन-कौन से सामाजिक संस्थान व भामाशाह तन-मन-धन से हमारा सहयोग करने के लिए आगे आये हैं।* बाऊजूद इसके उपरोक्त सभी क्रिया कलापों के दौरान कुछ राजनीति में फोकट दखल रखने वाले लोग अपने कोई चार चहेतों के साथ मिलकर इस भयावह मौत के मंजर में ढाल बनकर सीना ताने खडे स्थानीय प्रशासन और उनके कंधे से कंधा मिलाकर खडे विधायक सुरेश टाक और अन्य सेवकों के बारे में इस तरह की फुटकर टिप्पणियां कि ‘शहर में कोई सामान नहीं मिल रहा..जो मिल रहा है वह मंहगा मिल रहा है, दुकानों पर पूरा सामान नहीं मिल रहा,सब्जियां नहीं मिल पाती’….तो इन सबके लिए अकेला प्रशासन या विधायक जिम्मेदार नहीं है। *सभी की नैतिक जिम्मेदारी बनती है।बाऊजूद इसके फिर भी विधायक सुरेश टाक दिन रात स्थानीय प्रशासन के साथ जिला व राज्य स्तरीय अधिकारियों और सरकार के नुमाईन्दो के साथ निरन्तर संपर्क में रहते हुए इस जंग को बेहतर ढंग से जीत लेने की कवायद में लगे हुए हैं।*
*ऐसे में सभी उपखंडवासियों को विश्वास और धैर्य के साथ संकट की इस घडी में विधायक के साथ जन सेवक बने सुरेश टाक की नैतिकता और सेवा का आंकलन कर लेना चाहिये।*
*____सर्वेश्वर शर्मा*
*संपादक..* ‘कुछ अलग’
*अध्यक्ष..* मार्बल सिटी प्रेस क्लब,किशनगढ
*मो.9352489097*

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