खंभों पर बरसात लिखने वाले का पता लग गया

हर जगह बरसात लिखने वाला कहां चला गया? इस शीर्षक से मेरा ब्लॉग प्रकाशित होते ही कई प्रतिक्रियाएं आई हैं। मेरे मित्र श्री रमेश टिलवानी, जो कि पिछले कई सालों से समाज सेवा में जुटे हुए हैं, ने वाट्स ऐप पर उस शख्स के बारे में काफी जानकारी भेजी है। साथ ही पुराने मित्र श्री गोविंद मनवानी, जो कि स्वतंत्र पत्रकार हैं, ने फोन पर विस्तार से जानकारी साझा की है। दोनों की जानकारी काफी मिलती-जुलती है, लिहाजा दोनों के नाम से ही उसे आपके साथ शेयर कर रहा हूं।
उन्होंने बताया कि यह प्रसंग पंद्रह साल नहीं, बल्कि उससे भी करीब दस साल पुराना है। उस शख्स का नाम श्री झामनदास है। वे अंग्रेजी में एमए हैं और पहले मीरा स्कूल में व बाद में उसका सारा स्टाफ आदर्श विद्यालय में शिफ्ट हो जाने पर वहां पर दसवीं-ग्यारहवीं के छात्रों को अंग्रेजी पढ़ाया करते थे। उनकी ज्योतिष में बहुत अधिक रुचि हुआ करती थी। आमतौर पर ज्योतिष या तंत्र की पुस्तक पढ़ा करते थे। वे बहुत इंटेलीजेंट थे, मगर बाद में किसी कारणवश मेंटली डिस्टर्ब हो गए। वे ही शहरभर के खंभों पर चॉक से बरसात शब्द लिखा करते थे। बच्चे उन्हें पागल समझ कर उन पर पत्थर फैंका करते थे। जहां तक बरसात शब्द की टाइपोग्राफी का सवाल है, वह गुजराती भाषा की तरह होने के पीछे कारण ये रहा होगा कि वे मूलत: अहमदाबाद से अजमेर आए थे। हालांकि यह पता नहीं कि वे बरसात शब्द ही क्यों लिखा करते थे, मगर कई बार ऐसा भी पाया गया कि जिस क्षेत्र में वे खंभों पर बरसात शब्द लिखा करते थे, वहां हल्की बूंदाबांदी हो जाया करती थी। शुरू में वे लाखन कोटड़ी में रहा करते थे। अब वैशाली नगर में रहते हैं। अब भी यदा-कदा किताब हाथ में लिए हुए दिखाई दे जाते हैं।
मैं श्री टिलवानी व श्री मनवानी का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने मुझ सहित अनेक लोगों की जिज्ञासा को शांत कर दिया। श्री टिलवानी विद्युत विभाग से सेवानिवृत्त हैं और अजमेर में सिंधी समाज की सेंट्रल पंचायत बनाने वालों में वे अग्रणी रहे हैं। शहर के बारे में पुरानी जानकारियों का उनके पास भंडार है। यदि उनको शहर की दाई की उपमा दी जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
श्री मनवानी स्वतंत्र पत्रकार हैं। अनेक दैनिक समाचार पत्रों में लिखते रहे हैं। किसी जमाने में ज्ञानदीप मंडल के नाम से पत्र मित्रता क्लब संचालित किया करते थे। जिन दिनों टेलिविजन के नाम पर केवल दूरदर्शन हुआ करता था, तब उसकी समीक्षा किया करते थे। बाद में अन्य चैनल्स की भी समीक्षा की। फिल्मों पर भी उनकी गहरी पकड़ रही है। वे सिंधी भाषा के शिक्षक भी रहे हैं और सिंधी भाषा सिखाने की अनेक कार्यशालाओं में भागीदारी निभा चुके हैं। अनेक संस्थाओं के लिए मीडिया का भी काम कर चुके हैं।
ब्लॉग प्रकाशित होने पर मेरे पत्रकार साथी श्री गिरीश दाधीच ने वाट्स ऐप पर जानकारी दी कि उन्हें भी किसी व्यक्ति की ओर से बरसात शब्द लिखने के प्रसंग की जानकारी है। सावन पब्लिक स्कूल के संचालक श्री हरीश शर्मा ने भी प्रतिक्रिया दी कि वे भी सोचा करते थे कि इस प्रकार की हरकत कौन करता था?
बहरहाल, सोशल मीडिया को सलाम कि उसकी वजह से एक जिज्ञासा का चुटकी में समाधान हो गया।
-तेजवानी गिरधर
7742067000
tejwanig@gmail.com

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