तो गहलोत लडेंगे आगामी विधानसभा चुनाव?

दोस्तो, आदाब! हाल ही में जब अजमेर नगर निगम के पूर्व महापौर धर्मेन्द्र गहलोत पर स्वायत्त शासन विभाग ने छह साल के लिए नगर निकाय चुनाव लड़ने की पाबंदी लगा दी, तो इस पर उनका फौरी रद्दे-अमल कुछ ऐसा सामने आया कि सियासी हलकों में एक नया सवाल खड़ा हो गया। क्या गहलोत आने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने का इरादा रखते हैं, या फिर उन्होंने महज एक ऐसा शगूफा छोड़ा है, ताकि सियासत के गलियारों में उनका जिक्र लगातार बना रहे?
गौरतलब है कि गहलोत साहब ने फरमाया कि उन पर नगर निकाय चुनाव लड़ने की रोक तो लगी है, मगर विधानसभा चुनाव लड़ने पर कोई पाबंदी नहीं है। अब जनाब, सवाल यह उठता है कि आखिर इस बात को इतनी अहमियत के साथ कहने की जरूरत क्यों आन पड़ी? क्या इसके पीछे कोई सियासी मंसूबा है, या फिर यह महज कानूनी स्थिति की तरफ इशारा भर है?
बहरहाल, उनके इस बयान ने कयासों का बाजार गर्म कर दिया है। क्या वे आने वाले विधानसभा चुनाव में कोई नया सियासी दांव खेलने की तैयारी में हैं? वैसे भी, अपने बाकी सियासी सफर में उनके लिए नगर निकाय चुनाव लड़ने का कोई खास मतलब नजर नहीं आता, खास तौर पर तब, जबकि उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरना पड़े।
अब रही विधानसभा चुनाव की बात, तो वहां भी रास्ता इतना आसान नहीं है, हुजूर! फिलहाल वे भाजपा में नहीं हैं। ऐसे में उनके सामने दो ही रास्ते दिखाई देते हैं? या तो निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरें, या फिर किसी दूसरी पार्टी का चुनाव चिह्न हासिल करने की गुंजाइश तलाशें।
और अगर विधानसभा चुनाव लड़ने का इरादा वाकई परवान चढ़ता है, तो जाहिर है कि उनका निशाना अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र ही होगा। यानी सीधा मुकाबला मौजूदा विधायक और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से हो सकता है। देवनानी साहब के लगातार छठी बार चुनावी मैदान में उतरने की पूरी संभावना है। अलबत्ता, अगर उम्र संबंधी कोई सीमा उनके आड़े आती है, तो उनके पुत्र मनीष देवनानी के मैदान में उतरने की अटकलें भी सियासी हलकों में सुनाई देती रहती हैं। ऐसे में गहलोत की संभावित सियासी पारी की तुलना ज्ञान सारस्वत के चुनावी तजुर्बे से की जाने लगी है। सारस्वत का सियासी हश्र किसी से छिपा नहीं है। हालांकि, अभी इस मामले को दूर की कौड़ी ही समझिए, क्योंकि चुनाव में अभी वक्त है और फिलहाल गहलोत साहब की तरफ से ऐसा कोई स्पष्ट ऐलान सामने नहीं आया है कि वे विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। मगर जनाब, विधानसभा चुनाव लड़ने पर पाबंदी न होने की दलील देकर उन्होंने कौतुहल तो पैदा कर ही दिया है। अब यह महज एक कानूनी सफाई है या फिर किसी आने वाली सियासी पारी की भूमिका, इसका जवाब तो वक्त ही देगा।
और आखिर में एक दिलचस्प पहलू और भी है। गहलोत के विधानसभा चुनाव लड़ने पर रोक नहीं होने की बात कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक पराशर ने कही है। अब इस बयान को किस नजरिए से देखा जाए? क्या यह महज एक कानूनी राय है, या फिर सियासत की बुझती चिंगारी में घी डालने जैसा मामला? फिलहाल तो इतना ही कहा जा सकता है, कि गहलोत ने सवाल उछाल दिया है, सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है और निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में वे अपने पत्ते खोलते हैं या नहीं। बाकी, जनाब, सियासत में हर बयान के पीछे कोई मंसूबा हो, यह जरूरी नहीं, मगर हर बयान कोई न कोई सवाल जरूर छोड़ जाता है!

Leave a Comment

This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

error: Content is protected !!