अजमेर कांग्रेस के युगपुरुष एडवोकेट जसराज जयपाल

राजनीति, समाजसेवा और सहकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाने वाले जसराज जयपाल के परिवार का आजादी के बाद से अजमेर की सियासत में रहा है खासा दखल
अजमेर की सियासत में कुछ शख्सियतें ऐसी हैं, जिनकी पहचान किसी पद या ओहदे की मोहताज नहीं होती। उनका तजुर्बा, उनकी सियासी सूझबूझ और समाज के प्रति उनकी खिदमत ही उनकी असल पहचान होती है। एडवोकेट जसराज जयपाल ऐसी ही शख्सियतों में शुमार हैं। राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्री और अजमेर शहर जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रहे जसराज जयपाल ने अपनी लंबी राजनीतिक पारी में न केवल कांग्रेस की सियासत में अहम किरदार अदा किया, बल्कि सामाजिक और सहकारी क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान कायम की।
28 अक्टूबर 2026 को उनका 97वां जन्मदिन सादगी के साथ मनाया गया। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका व्यक्तित्व और अनुभव उन्हें अजमेर की सियासत की एक अहम शख्सियत बनाते हैं। वे अपने आप में एक संस्था हैं। आजादी के बाद से अजमेर की राजनीति में उनके परिवार का खासा वर्चस्व रहा है और इस परिवार की राजनीतिक विरासत कई पीढ़ियों तक पहुंची है।
एडवोकेट जसराज जयपाल का जन्म वर्ष 1930 में ब्यावर इलाके के छोटे से गांव झाक में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय केशवराम ब्यावर की कपड़ा मिल में मुकद्दम के पद पर कार्यरत थे। कामकाजी जीवन के साथ-साथ वे सामाजिक और सार्वजनिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। ब्यावर नगर पालिका के छह बार पार्षद चुना जाना उनकी जनसेवा और स्थानीय राजनीति में प्रभाव का प्रमाण था।
पिता से मिले संस्कारों और सार्वजनिक जीवन के अनुभवों ने जसराज जयपाल के व्यक्तित्व को गढ़ने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने राजकीय महाविद्यालय, अजमेर में अध्ययन करते हुए बी.कॉम., एम.ए. और एल.एल.बी. की डिग्रियां हासिल कीं। वकालत को उन्होंने अपना पेशा बनाया, लेकिन उनकी दिलचस्पी का दायरा अदालतों तक सीमित नहीं रहा। राजनीति, समाजसेवा और सहकारिता के क्षेत्र में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
जसराज जयपाल ने वर्ष 1967 से 1972 तक अजमेर जिले की भिनाय विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान वे राजस्थान सरकार में मंत्री भी बने। विधायक और मंत्री के रूप में उनका राजनीतिक अनुभव उन्हें प्रदेश की सियासत में एक पहचान दिलाने में कामयाब रहा।
उनकी खासियत यह रही कि उन्होंने राजनीति को महज सत्ता और पद हासिल करने का जरिया नहीं माना, बल्कि सामाजिक सरोकारों से जोड़कर देखा। अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज से जुड़ी अनेक संस्थाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। समाज के वंचित और पिछड़े तबकों के उत्थान से जुड़े प्रयासों में भी उन्होंने अपनी भूमिका निभाई।
जसराज जयपाल की शख्सियत का एक अहम पहलू सहकारिता के क्षेत्र में उनका योगदान भी है। अजमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के संचालक मंडल के सदस्य और राजस्थान उपभोक्ता समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने काम किया।
उपभोक्ता समिति के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने राज्य सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे सरकार ने यथावत स्वीकार कर लिया। यह उनके अध्ययन, अनुभव और विषय की समझ को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण प्रसंग है।
राजनीति और सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच उन्होंने लेखन के लिए भी समय निकाला और अनेक पुस्तकें लिखीं। इस तरह उनका योगदान केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विचार और अध्ययन के क्षेत्र में भी उनकी सक्रियता दिखाई देती है।
जसराज जयपाल का परिवार अजमेर और आसपास के इलाकों की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली रहा है। उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीया श्रीमती भगवती देवी ने भी राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। वे वर्ष 1972 और 1980 के विधानसभा चुनावों में भिनाय सीट से विजयी हुईं और राजस्थान सरकार में मंत्री भी रहीं।
इसी राजनीतिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उनके सुपुत्र डॉ. राजकुमार जयपाल वर्ष 1985 में अजमेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। वे अजमेर शहर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष और अजमेर क्लब के अध्यक्ष भी हैं।
इस परिवार की राजनीतिक यात्रा पर नजर डालें तो साफ दिखाई देता है कि सार्वजनिक जीवन में इसकी मौजूदगी केवल एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रही। पिता, माता और पुत्रकृतीनों ने अलग-अलग समय पर राजनीति में अपनी भूमिका निभाई और अजमेर के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया।
आज की तेज रफ्तार राजनीति में जहां सियासी समीकरण तेजी से बदलते हैं, वहीं जसराज जयपाल जैसी शख्सियतों का लंबा अनुभव अपने आप में महत्व रखता है। उन्होंने वह दौर भी देखा है, जब राजनीति का स्वरूप आज से काफी अलग था, और वह दौर भी, जब राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव आए।
एडवोकेट जसराज जयपाल की जीवन यात्रा वकालत, राजनीति, सहकारिता, लेखन और समाजसेवा के विविध पहलुओं को समेटे हुए है। उनका 97वां जन्मदिन केवल एक वरिष्ठ राजनेता की उम्र के पड़ाव का अवसर नहीं, बल्कि अजमेर की राजनीतिक विरासत के एक महत्वपूर्ण अध्याय को याद करने का मौका भी है।
अजमेर कांग्रेस की सियासत में उनकी पहचान एक अनुभवी और वरिष्ठ नेता के रूप में रही है। यही वजह है कि उन्हें अजमेर कांग्रेस का युगपुरुष कहना उनकी लंबी राजनीतिक पारी और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को रेखांकित करता है।

अजमेरनामा न्यूज पोर्टल उनकी दीर्घायु व स्वस्थ जीवन की कामना करता है।

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