-श्रीराम तिवारी- विदेशों में जमा काले धन की वापसी के बारे में इस धन के मालिकों- याने ‘बिग चोट्टों’ के लिए अच्छी खबर है। उन्हें मालूम हो कि चाहे मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार हो या वर्तमान ‘मोदी सरकार‘- यह काला धनवापिस लाने में -दोनों ही फ़ेल हैं। स्विट्जरलैंड सरकार तो तब भी तैयार थी जब भाजपा विपक्ष में थी। तब अण्णा हजारे, नेता टर्न्ड अफसर- केजरीवाल, दबंग कम- उत्साही ज्यादा किरण बेदी, आधुनिक नारद मुनि अवतार- सुब्रमण्यम स्वामी और बाबा कम धंधेबाज ज्यादा- स्वामी रामदेव ने देश और दुनिया में तत्कालीन यूपीए सरकारकी नाक में दम कर रखा था।
इस काले धन की वापिसी के मुद्दे को पहले मीडिया ने और बाद में फिर देश की जनता ने भी हाथों-हाथ लिया। परिणाम सामने है कि विगत लोक सभा चुनावों में, भाजपा को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, अभूतपूर्व सफलता मिली। अब जबकि स्विट्जरलैंड सरकार वो सब बताने के लिए राजी है जो भारत सरकार चाहती है। तो वर्तमान मोदी सरकार भी कुछ उसी अंदाज में इन कालेधन वालों को उसी तरह उपकृत करने जा रही है जैसे कि ‘मोनी बाबा’ की सरकार कर चुकी है। चूँकि जिन्होंने एकजुट होकर यूपीए को खदेड़ा और कांग्रेस को निचोड़ा वे अब वर्तमान मोदी सरकार के शरणम् गच्छामि हो चुके हैं, तब देखने लायक ये है कि देश की जनता क्या करती है ?
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