जोधपुर। हिंदी भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अजमेर जिले के अरांई निवासी सैनिक कवि गणपत लाल उदय को प्रतिष्ठित ‘हिंदीज़ा साहित्य सम्मान–2026’ से ससम्मान अलंकृत किया गया। यह सम्मान डिजिटल शुभारंभ समारोह के दौरान प्रदान किया गया। इस वर्ष सैनिक कवि गणपत लाल उदय, डॉ. विभव सक्सेना तथा हेमा जालान ‘कनक’ को उनकी सक्रिय साहित्य-साधना, रचनात्मक उत्कृष्टता तथा हिंदी भाषा एवं साहित्य के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान के लिए इस प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में देश-विदेश के अनेक साहित्यकारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। समारोह का शुभारंभ सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुशीला फरमानिया ‘दीप्त’ द्वारा माँ सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. विनीता राठौर, राजीव विश्नोई, हनुमान, बजरंग एवं रामनारायण ने अपने मोबाइल फ़ोन पर हिंदीज़ा ऐप डाउनलोड कर उसका सफलतापूर्वक परीक्षण किया। साथ ही हिंदी प्रेमी शालिनी सिंह, दुर्गेश्वर राय, संजय बिश्नोई एवं अभय प्रताप सिंह सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। तत्पश्चात हिंदीज़ा ऐप का डिजिटल शुभारंभ किया गया।
सम्मानित साहित्यकारों ने इस पहल को हिंदी साहित्य के डिजिटल विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। इस अवसर पर हिंदीज़ा के निदेशक जसराज बिश्नोई ने प्रेरणादायी सामाजिक संकल्प लेते हुए घोषणा की कि वर्षभर में मंच पर जितनी ई-पुस्तकों का प्रकाशन होगा, उतने ही पौधे लगाए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य साहित्य के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में ‘अनुगूँज’, ‘समीक्षा के स्वर’ तथा ‘सीआरपीएफ जवान हूँ’ सहित विभिन्न ई-पुस्तकों का डिजिटल विमोचन किया गया। उपस्थित साहित्यकारों ने इन प्रकाशनों का स्वागत करते हुए इसे हिंदी साहित्य के डिजिटल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
आभार ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘हिंदीज़ा’ आने वाले समय में हिंदी साहित्य, डिजिटल पठन संस्कृति तथा नवोदित रचनाकारों के लिए एक सशक्त राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में स्थापित होगा।
इस अवसर पर सैनिक कवि गणपत लाल उदय ने इस सम्मान को अपने साहित्यिक जीवन का प्रेरणादायी पड़ाव बताते हुए इसे हिंदी भाषा, साहित्य तथा अपने सभी पाठकों, शुभचिंतकों और सहयोगियो को समर्पित किया। उन्होंने इस सम्मान के लिए हिंदीज़ा परिवार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
जय हिन्द, जय हिन्दी, जय हिन्दुस्तान
— सैनिक कवि गणपत लाल उदय
अजमेर, राजस्थान
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