एक भारत रत्न के लिए दुसरे भारत रत्न का अपमान क्या सही है ?

गोपाल विजय
गोपाल विजय

अटल जी को भारत रत्न मिला मुझे ख़ुशी हुई लेकिन आज सुबह जब खबर आई की राजस्थान में ” राजीव गांधी सेवा केन्द्रों ” का नाम बदलकर अटल सेवा केंद्र कर दिया गया है सरकार के इस फैसले से मुझे बहुत अफ़सोस हुआ ।
एक भारत रत्न के लिए दुसरे भारत रत्न का ” अपमान ” ।
ये राजनीति नही है तो क्या है ?
क्या राजीव गांधी और अटल बिहारी कांग्रेस और बीजेपी के भारत रत्न है ?
अगर ये दोनों पूर्व प्राधानमंत्री अगर कांग्रेस और बीजेपी के भारत रत्न है तो फिर इन दोनों राष्ट्रीय दलों द्वारा  इन्हें ” कांग्रेस रत्न ” और
” बीजेपी रत्न ” से  सम्मानित किया जाना चाहिए ।
और राजनितिक व्यक्तियों को महिमा मंडित करने
पर रोक लगा दी जानी चाहिए ।
क्यूंकि इन सभी राजनैतिक दलों के इन महान नेताओं ने अपनी पार्टी के हितो को देशहित से ज्यादा तवज्जो दी है । सत्ता के लिए समझोते किये है ।
भारत रत्न देश के उन नागरिको को मिलना चाहिए जिन्होंने देश का नाम सामाजिक गतिविधियों द्वारा निस्वार्थ भाव से रोशन किया हो ।
न की किसी राजनैतिक दल के नेताओं को महिमा मंडित करके ।

आज राजस्थान सरकार ने राजनैतिक स्वार्थो की खातिर एक ” भारत रत्न ” का नाम हटाकर  दुसरे ” भारत रत्न ” का नाम लगाकर इस सर्वॊच्च नागरिक सम्मान का अपमान ही किया है ।

लोकतंत्र में सत्ता स्थायी नही है कल फिर सत्ता बदलेगी कल फिर नाम बदले जायेंगे कल फिर सत्ता से चिपके ये स्वार्थी नेता की ” भारत रत्न ” का अपमान करेंगे ।

रोक दो नाम बदलने इस सिलसिले को आज और अभी से इस सिलसिले को ।

10000 के लगभग राजीव गांधी सेवा केंद्र है राजस्थान में हर भवन पर नाम बदलने के लिए जो करोडो का आर्थिक भार प्रदेश के ख़जाने पर पड़ेगा उसका जिम्मेदार कोण होगा ?

” भारत माँ ” के सपूत जो अपने सामाजिक कार्यो से विश्व का सबसे बड़ा सम्मान ” नोबेल  पुरूस्कार ” प्राप्त कर लेते लेकिन राजनैतिक दलों के सत्ताधारी नेताओं के पास उन्हें सम्मानित करने के लिए कोई पुरूस्कार  नही है ।
और सबसे बड़ी शर्म की बात ये है की जिस राज्य से वे आते है उस राज्य के मंत्री उनका नाम तक नही जानते है ।
अब महत्व ही क्या बचा है भारत रत्न का कल फिर सत्ता बदलेगी फिर किसी दल को अपना नेता महान लगेगा कल फिर वो भारत रत्न बनेगा ।
जय हिन्द ।
-गोपाल विजय

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