
कहानिया और किस्से बनते है घटनाओं के घटित होने और न होने से ! कल्पनाओं को साकार करते हैं कलाकार , योजनाओं को बनाते है नेता और अधिकारी और उन योजनाओं को मूर्त रूप देकर वैज्ञानिक और कामगार सपनो को साकार करते हैं ?
फ्रांस की एक फाइटर जेट बनाने वाली कंपनी। द’साल्ट राफेल ने फरवरी 2011 में भारत में अपने राफेल लड़ाकू विमानों का कौशल दिखने के लिए उनका प्रदर्शन बड़े पैमाने पर किया था ! हमारे देश ने राफेल के गुणों से प्रभावित होकर 126 विमान खरीदने का अनुबंध किया ।जिसका भुगतान अमेरिकी डॉलर में 10.4 बिलियन था ! समझौता इस प्रकार से था कि 18 विमान पूर्ण रूप से विकसित और सही हालात में 2015 तक भारत को। सौंप देगा और बाकी के 108 विमानों को राफेल और HAL मिल कर भारत में ही बनाएंगे । निर्माण एवम् तकनीक हस्तांतरण अनुबंध के अंतर्गत । लेकिन 2014 में ही फ्रांस अपने करार से मुकर गया और उसने अनुबन्ध तोड़ दिया।
2015 मार्च में अपनी प्रथम फ़्रांस यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले करार से इतर एक नए समझौते की नीवं रखी और जुलाई 2015 में एकनया करार किया जिसमे 36 नए राफेल विमान की खरीद और मेक इन इंडिया के अंतर्गत प्राप्त राशि का 30 प्रतिशत में खर्च और 50 प्रतिशत दो ट्रेनिंग बेस बनानेें के लिए उपयोग करना होगा ।
लेकिन अब फ्रांस इस अनुबंध से भी संतुष्ठ नहीं है उसने नया राग अलाप दिया है की प्रत्येक विमान की कीमत 8 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्थान पर अब 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर चाहिए । लेकिन हम यह सोचते है कि हमारे प्रधान मंत्री के मेकिंग इण्डिया का क्या होगा, होगा की नहीं भी होगा , इस होगा नहीं होगा के चक्कर से अभी निकले भी नहीं थे कि प्रधानमंत्री ने लाल किले से एक घोषणा और दाग दी और स्टार्ट अप इंडिया ! अभी पिछले वर्ष की गई घोषणाए। किस हालात में हैं उसका विवरण और सफलता का लेख जोखा तो दूर उनका जिक्र भी नहीं इसको कहते है नौ दिन अढ़ाई कोस !
sohanpal singh