जिसका काम, उसी को साजे

प्रेम आनंदकर
राजस्थान के पुलिस महकमे ने 5 हजार 390 कांस्टेबल पदों पर भर्ती के लिए हुई पहले चरण की परीक्षा निरस्त कर दी है। हालांकि पुलिस महकमे ने ऑनलाइन परीक्षा के दौरान हाई टेक तरीके से नकल करने वाले गिरोह को पकड़ कर परीक्षा प्रणाली और भर्ती प्रक्रिया पर अंगुली उठने से रोक लिया है। लेकिन इससे हजारों-लाखों उन बेरोजगारों की उम्मीद और मेहनत पर पानी फिर गया है, जिन्होंने रात-दिन एक कर परीक्षा की तैयारी की थी और सफलता मिलने पर नौकरी पाने की आस लगाए हुए थे। भले ही “आमजन में भय, अपराधियों में विश्वास” को झुठला कर पुलिस महकमे ने अपने ध्येय वाक्य “अपराधियों में भय, आमजन में विश्वास” को साबित करने का प्रयास किया है, किंतु देश व समाज के उन दुश्मनों का क्या किया जाए, जिन्होंने अपने स्वार्थों के चलते हाई टेक नकल का रास्ता अपना कर ना केवल बेरोजगारों के हितों पर कुठाराघात किया है, बल्कि सरकार के करोड़ों रुपए भी बर्बाद हो गए हैं। इन सबके बीच एक बात समझ से परे है कि जब नॉन गजेटेड पदों की भर्ती के लिए राजस्थान अधीनस्थ व मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड बना हुआ है तो इस भर्ती का जिम्मा उसे क्यों नहीं सौंपा गया है। पुलिस महकमा यदि प्रदेश की कानून व्यवस्था बेहतर ढंग से संभाल ले,वही बहुत है। कानून का डंडा चलाने और परीक्षा कराने में रात-दिन का अंतर है। एक कहावत है, “जिसका काम, उसी को साजे”, तो परीक्षा कराना और भर्ती प्रक्रिया को अंजाम देना भर्ती व चयन बोर्डों के ही बस की बात है। इसलिए सरकार को कांस्टेबल भर्ती का जिम्मा भी चयन बोर्ड को सौंप देना चाहिए, क्योंकि उसका अपना नेटवर्क है। बोर्ड में अनुभवी मुखिया, अधिकारी व कर्मचारी हैं।

-प्रेम आनन्दकर, अजमेर, राजस्थान।

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