गुजरात में राज्य सभा के उपचुनाव के परिपेक्ष में विपक्ष के सम्मुख विकल्प ?

पिछले दिनों तेलगाना में सत्ताधारी टी आर एस नें मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के अधिकांश विधानसभा सदस्यों को एन केन प्रकारेण अपने दल में सम्मीलित करवा कर विपक्ष को लगभग नेस्तानाबूद कर दिया वहीं बगांल में रोज निर्वाचित प्रतिनिधि अपनी मूल पार्टी का दामन् अपने राजनेतिक स्वार्थों के कारण छोड़ रहें है | राज्य सभा में टी डी पी के 6 सांसदों में से 4 ने अघोषित राजनेतिक प्रलोभनों के प्रभाव में सत्ताधारी दल में अपने गुट का विलय करवा लिया और इनके कदम की मान्यता भी सत्ताधीशों ने 24 घंटों से भी कम समय में वैधानिक मान्यता मिल गई इनमें से कुछ पर सत्तधारी पार्टी ने भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप लगाये थे किन्तु अब वो गंगा में स्नान के बाद पवित हो गये | बलिहारी राजनीती की और राजनीतिक पंडितो की ?

2019 के लोकसभा के अधिकांश चुनाव परिणाम 23 मई की शाम तक घोषित कर दिए गये थे एवं इक्के दुक्के परिणाम 23 मई की देर रात को घोषित किये गये किन्तु इन सभी को निर्वाचन का प्रमाणपत्र 24 मई को दिया गया | नियमानुसार अगर कोई राज्य सभा का सदस्य लोक सभा के लिये निर्वाचित हो जाता है और जैसे ही वह लोक सभा के सदस्य के रूप में शपथ ले लेता है तो उसकी राज्य सभा की सदस्यता समाप्त हो जाती है और उसका स्थान रिक्त घोषित कर दिया जाता है | अबकी बार भी इसी कारण से राज्य सभा में कुछ स्थान रिक्त घोषित किये गये है , इनमें गुजरात से श्री अमित शाह और श्रीमती स्मिता ईरानी जी भी है | गुजरात विधानसभा की वर्तमान संख्या बल के मुताबिक अगर इन दोनों सीटो के लिए एक है | सत्ताधारी पार्टी कोई भी सीट खोना नहीं चाहती है | चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि इन सीटों पर चुनाव तो 5 जुलाई को होगें किन्तु दोनों के लिये अलग अलग रूप से , जिसके फलस्वरूप इन दोनों सीटों पर सत्ताधारी पार्टी का कब्जा हो जायेगा | इन दोनों सीटो पर चुनाव एक साथ हो के निवेदन पर याचिका उच्चतम न्यायालय में लम्बित है | अगर अंत मै इन सीटो पर अलग अलग चुनाव हो ते है तो विपक्ष की पराजय निश्चित ही होगी | स्मरणीय है कि गुजरात में विपक्ष के कुछ सदस्यों ने इस्तीफा देकर सत्ताधारी पार्टी जोइन कर ली है और वर्त्तमान परिपेक्ष में और भी कई सदस्य कांग्रेस का दामन् छोड़ कर सत्ताधारी दल में जा सकते है | इन हालातों में विपक्ष के पास एक तर्कसंगत विकल्प हो सकता है कि वे चुनाव आयोग के फेसले और सत्ताधारी पार्टी के इरादों के विरोध में अपने सभी विधानसभा सदस्यों के इस्तीफे विधानसभा के अध्यक्ष को सोंप कर इन चुनावों का बहिष्कार करे और लोकतंत्र के ऊपर प्रहार पर जनआन्दोलन शुरू करें |

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