लॉक डाउन में व्यापारियों का दर्द

लॉक डाउन में आम आदमी जहां घरों में कैद है, वहीं सारी दुकानें बंद हैं। गरीबी रेखा से नीचे व उसके आस-पास जीने वाले लोगों के सरकार अथवा भामाशाहों की ओर से किसी न किसी रूप में मदद मिल रही है। सरकारी कर्मचारियों को नियमित वेतन मिल रहा है। अकेला मध्मम वर्गीय तबका व व्यापारी ऐसा है, जिसका व्यापार ठप होने के कारण आर्थिक चक्की में पिस रहा है। किसी व्यापारी ने अपने तबके के लोगों का दर्द बयां करते हुए एक पोस्ट बनाई है, जो सोशल मीडिया पर शेयर की है।
आइये, देखते हैं कि व्यापारियों की परेशानी क्या है:-
मान्यवर मोदी जी, पहले आपने 21 मार्च से 14 अप्रैल तक सभी राज्यों के लॉकडाउन की घोषणा की। सभी से ऑफिस, दुकान, कारखाने बन्द रखने का आग्रह किया। फिर से 15 अप्रैल से 3 मई तक लॉक डाउन बढ़ गया। इसके बाद भी अभी कोरोना वायरस की महामारी के चलते जिस प्रकार से कोरोना संक्रमित के आंकड़े दिन ब दिन देश में बढ़ते जा रहे हैं, इन हालातों को देख कर ऐसा महसूस हो रहा है की यह लॉक डाउन इतनी जल्दी नहीं समाप्त होगा
माननीय मोदी जी, भारतवासियों के दिल में आपने एक जगह बनाई है। भारतवासियों के मन में आपने एक विश्वास की डोर जगाई है, इसे आप टूटने मत दीजियेगा आपने सभी राज्यों के गरीबों, बेसहारा और किसानों के लिए राशन की व्यवस्था की है, कर्ज-माफी के साथ उनके बैंक खातों में रुपये भिजवाये हैं। ये आपने बहुत अच्छा काम किया है। इसके लिए हम भारतवासी आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं। लेकिन हम मध्यम वर्गीय व्यापारी की क्या गलती है, जिनको इस कोरोना की महामारी के लॉक डाउन में किसी भी तरह का लाभ नहीं मिल रहा।
क्या गलती है हमारी?
हम पूरा दिन मेहनत करके अपना व्यवसाय चलाते हैं। व्यापार से जो पैसा कमाते हैं, उससे ये खर्च करते हैं:-
(1)घर का खर्च
(2)बच्चों की स्कूल फीस
(3) बच्चों की ट्यूशन फीस
(4) बच्चों की वैन खर्च
(5) बच्चों के स्कूल की किताबें,कॉपी अन्य खर्च
(6) दुकान के कर्मचारियों की पेमेन्ट
(7) दुकानों, मकान का लाइट बिल
(8) जी एस टी का खर्च
(9) मुनीम की फीस
(10) बैंक का ब्याज
(11) मकान या दुकान की ईएमआई
(12) दुकान या मकान का किराया
(13) गाडिय़ों का खर्च
(14) परिवार के इंश्योरेंस का खर्च
(15) परिवार की सेहत पर खर्च
(16) ओर अन्य फुटकर खर्च
जबसे ऑन लाइन बिजनेस चालू हुआ है, तब से छोटे व्यापारियों की वैसे ही कमर टूट गई है। इसके बाद भी व्यापार मंदी हो या तेजी, व्यापारियों का खर्च चालू है। इसके बाद भी व्यापारी और मिडिल क्लास वालों के लिए सरकार की तरफ से कोई भी लाभ नहीं मिलता, ऐसा क्यों?
हम क्या इंसान नहीं हैं?
मान्यवर प्रधानमंत्री जी, इस कोरोना की महामारी के चलते लॉक डाउन में सबसे ज्यादा व्यापारियों ओर मिडिल क्लास वालों को फर्क पड़ा है क्योंकि हमारे तो सभी खर्च चालू हैं। लॉक डाउन के चलते सभी के व्यापार ठप हो गये हैं। बैंक से जिन्होंने भी लोन लिया है, लॉक डाउन के चलते उनकी सिर्फ किश्तों को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन ब्याज माफ नहीं कर रहे। जिनके खाते में पर्याप्त राशि है, उनके खातों में से बिना जानकारी के काट रहे हैं। लॉक डाउन के चलते जब तक किश्त बढ़ेगी, तब तक बैंक ब्याज के ऊपर ब्याज वसूलेगी।
अब सवाल ये उठता है कि व्यापारी और मिडिल क्लास वालों का गुजारा कैसे होगा?
हम सभी व्यापारी और मिडिल क्लास वाले अपील करते हैं कि हमारे ऊपर बैंक का ब्याज, बच्चों की स्कूल फीस, घर और दुकान का लाइट बिल, जीएसटी खर्च, ये सभी 6 महीने के लिए माफ किये जायें।
हमें 3 मई या उससे अधिक समय तक भी घर में रह कर सहयोग करने में भी कोई आपत्ति नहीं, यदि सरकार यह बोझ हटा दे।
जिस प्रकार आप किसानों को अकाल में ब्याज से मुक्ति देते हैं, यह समय हम व्यापारियों के लिए भी अकाल ही है।

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