बहुत कठिन है डगर पनघट की

मित्रों सरकार ने हमें लॉक डाउन में बहुत सारी रियायतें दे दी है।कुछ मजबूरी सरकार को सरकार चलाने की है तो कुछ मजबूरी हमारे समाज के उन लोगों की है जो मौत से ज्यादा अपने ऐशो आराम को महत्त्व दे रहे हैं।जो घूमना चाहते हैं बाहर।कुछ लोगों की आर्थिक स्थिति भी बहुत विकट हो गई है।उनकी अपनी मजबूरी है।लेकिन मेरा ये मानना है कि वर्तमान हालातों से निपटने के लिए हमें कुछ समय तो और घर पर रहना ही चाहिए।क्योंकि यदि जिस तरह से लॉक डाउन खोला जा रहा है और उसमें हम लोग भी शामिल हुए तो परिणाम काफी भयावह हो सकता है।आइए हम कुछ संभावनाओं पर विचार करें।
(1) *यदि हम व्यापारी हैं तो हमारे लिए हर कदम पर रिस्क है।हम माल खरीदेंगे भी,माल बेचेंगे भी,पैसे भी लेंगे,पैसे देने भी होंगे,माल जहां बनेगा, जिसके हाथों बनेगा,जिसके हाथ से सप्लाई होगा, ट्रांसपोर्टेशन के सारे स्टाफ, मैन्युफैक्चरर्स का सारा स्टाफ, दुकान का सारा स्टाफ,ग्राहक के साथ आये सभी लोग इन सबसे खुद को हमें बचना होगा।क्योंकि इसके अलावा कोई ऑप्शन है ही नहीं*।दुनियाभर की मेडिकल टीम लगी हुई है।लेकिन अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है।और तो और मेडिकल किट भी ऐसे नहीं आए हैं हमारे देश व प्रदेश में जो तुरंत सही और अधिकृत रिपोर्ट देती हो।इसका सीधा सा मतलब है कि हमें बहुत बड़ी चैन या सिस्टम से खुद को बचाना होगा!मगर कैसे?क्या क्या सावधानी बरतेंगे हम।कहां कहां बरतेंगे।
(2) *हांलाकि सरकार ने ऑनलाइन शिक्षा देने के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है लेकिन अगर लॉक डाउन पूरा खोल दिया और हमारे बच्चे स्कूल जाने लगे गए तो फिर बच्चों का सफर यूँ होगा कि जिस गाड़ी में बच्चा आएगा और जाएगा,उस गाड़ी में सवार सभी बच्चे और उन सभी बच्चों के परिवार और उनके संपर्क में आये तमाम लोग और स्कूल का समस्त स्टाफ,अध्यापक इन सभी से बच्चों को बचकर रहना होगा जो कि लगभग भगवान के भरोसे है।*
(3) *अब हम विचार करते हैं हमारे घर के बड़े बुजुर्गों के संबंध में।जो हमारे घर की सारी जिम्मेदारियां निभाते हैं।जब तक वो हैं वो अपनी जिम्मेदारी किसी को लेने भी नहीं देते।वो समझते हैं हमारे बच्चों को ठग लेंगे,चीज अच्छी नहीं देंगे।* जो घर का सामान लाते हैं,जैसे पिताजी बाजार से सामान लाने से लेकर घर तक का सफर करते हैं।मंडी में मौजूद तमाम व्यापारी,ठेले वालों से लेकर बड़े दुकानदार सभी से खुद को बचाना,साथ मे जो समान लिया है उसको सेनेटाइज करना,जिस थैले या बैग में समान लिया है अगर उसे किसी ने छुआ है तो उसे सेनेटाइज करना,बचे हुए पैसे वापस लेने पर ध्यान रखना मतलब ये भी लगभग मुश्किल की और ही इशारा कर रहें है।
(4) आज लगभग लगभग हर घर में झाड़ू पोचे लगाने के लिए,बर्तन व कपड़े धोने के लिए मैड या बाई आती ही है।उनके आने से लेकर जाने तक कि खतरनाक रिस्क,घर पर आने वाले तमाम दोस्त रिश्तेदार,घर पर लाया जाने वाला तमाम सामान सब पर पैनी नजर के साथ साथ बहुत ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ेगी मित्रों।आखिरकार हमें इन हालातों से झूझने के अलावा कोई विकल्प दूर दूर तक दिखाई भी नहीं दे रहा।इसलिए इन हालातों से निपटने के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण काम है वो है हाथों में मेडिकेटेड ग्लब्स पहनना,मुंह पर मास्क लगाना और हर 10-15 मिनट में हाथों को अच्छे से धोना अपने शरीर को सेनेटाइज करना और हाथ मिलाने की जगह नमस्कार करना।भीड़ वाली जगहों पर कम से कम जाना। बाहर का कम से कम खाना पीना।
जब तक लॉकडाउन था या है तब तक हमारी हिफाज़त सरकार भी कर रही थी और हम खुद भी कर रहे हैं लेकिन लॉक डाउन के बाद सारी जिम्मेदारी हमारी खुद की हो जाएगी।और बात केवल खुद की नहीं है।हमारे परिवार और हमारे अजीज मित्र,हमारे पड़ोसी, हमारे कार्मिक।इन सबकी जिम्मेदारी भी हमारी ही होगी।हमारी असली लड़ाई और संघर्ष तो तब होगा।जब तक इस बीमारी की वैक्सीन नहीं निकल जाती हमें इन्हीं हालातों में जीना होगा।यहां एक अच्छी बात जरूर कहना चाहूंगा जो हम सबके लिए है वो ये की हम लोगों की इम्युनिटी पावर अन्य देशों की तुलना में अच्छी है।इसलिए हम सबको इसे मेंटेन रखने के लिए आयुर्वेदिक दवाइयों की और भी रुख करना पड़ेगा।हमारे खान पान में भी आयुर्वेदिक नुस्खों को शामिल करना पड़ेगा। *राह कठिन जरूर है लेकिन हमारे जज्बे के सामने मुश्किल भी नहीं है।हमारे पास दो विकल्प हैं पहला ये की हम घरों में ही रहें।बहुत ज्यादा आवश्यक कार्य हो तो ही निकलें।दूसरा अपने आपको कोरोना फाइटर्स बनाकर निकलें।ताकि वो सब हमारे ढाल के रुप में काम कर सकें।* जय भारत।जय हिंद……🌹🌹

*डॉ. मनोज आहूजा एडवोकेट एवं पत्रकार।9413300227*

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