-अमितेश कुमार ओझा- मित्रों, देश के बड़े त्योहारों में एक शारदीया दुर्गापूजा व महापर्व दशहरा सोल्लास संपन्न हो गया। अब तमस पर ज्योति के विजय का पर्व यानी दीपावली की हर तरफ तैयारी है। बेशक दीपावली दुनिया का अनूठा पर्व है। यूं तो दुनिया के कई देशों में किसी अवसर पर दीप जलाने या रोशनी करने की परंपरा है। लेकिन दीवाली की बात ही कुछ है। क्योंकि इसके लिए साफ – सफाई व रंग – रोगन का कार्य करीब एक पखवाड़े पहले से शुरू हो जाता है। जिससे जनजीवन का नजारा ही बड़ा आकर्षक हो जाता है। दीपावली के दिन हर चेहरे पर खुशी देख कर मन को बड़ी शांति मिलती है। आज हमें इन्हीं दो चीजों की बड़ी जरूरत है। पहली स्वच्छता व दूसरी दूसरे की खुशी में अपनी खुशी महसूस करना। कदाचित इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रख कर हमारे पुरखों ने अलग – अलग त्योहार निर्धारित किए थे। जिससे जीवन की एकरसता दूर होने के साथ ही लोगों में आपसी प्रेम भी बना रहे। लेकिन इसी के साथ कुछ बातों का ध्यान रखना भी निहायत ही जरूरी है। मसलन दीपावली पर प्रदूषण व आग समेत दूसरी तरह के खतरों के प्रति अति – सतर्कता। क्योंकि इसके अभाव में कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। जो खुशी के मौके को मातम में बदल सकती है। शासन व न्यायालय के निर्देशों के बावजूद चोरी – छिपे प्रतिबंधित आतिशबाजी व शोर – शराबे से कुछ लोग बाज नहीं आते। हमें खुद निर्णय करना होगा कि हम कैसा समाज चाहते हैं। सबसे बड़ी बात दीपावली जैसे पर्व पर सामूहिकता की आवश्यकता को हर किसी को समझना होगा। हमें सुनिश्चित करना होगा कि समाज का कोई भी अंग इस पर्व का आनंद उठाने से वंचित नहीं रहे। क्योंकि गरीबी व बढ़ती महंगाई के चलते समाज के निचले स्तर के लिए त्योहारों को भी विलासिता की श्रेणी में शामिल कर दिया है। जरा सी जागरूकता व दरियादिली हमें इस विडंबना से बचा सकती है। क्योंकि त्योहार बने ही इसलिए हैं कि इस बहाने प्रसन्नता का प्रकाश हर तरफ फैले। कोई भी कोना इससे वंचित नहीं रहे। इसी के साथ हमें उन लोगों का भी आभार मानना चाहिए जो अपनी खुशी का बलिदान करके समाज में त्याहोर मनाने लायक अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं। जैसे सैनिक व पुलिस के जवान। जब हम परिवार के साथ त्योहार की खुशियां मनाते हैं, तब कर्मक्षेत्र में ये अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे होते हैं। इनके प्रति अभिव्यक्त जरा सा सम्मान इस वर्ग की छाती चौड़ी कर देगा, और भविष्य में भी ये अपने कर्तव्यों का निर्वहन बेहतर ढंग से कर सकेंगे।————
लेखक बी.काम प्रथम वर्ष के छात्र हैं।
पता ः अमितेश कुमार ओझा
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