पैसे तो कोइले की खानों में है

कल तक मनमोहन को सीधा-साधा समझने वाले लोग  उनके अन्दर के भाव  समझ नहीं पा रहे थे व  फेसरीडिंग करने वालों को भी श्रीमान की ढाडी सफल नहीं होने दे रही थी |
और इनका कम बोलना विचारों की थाह नहीं लेने दे रहा था परन्तु अबकी बार तो श्रीमान ऐसे बोले की जनता को चक्कर आने लगे
जनता की आँख खोल दी की पैसे पेड़ पे नहीं लगते है |

पैसे पेड़ पे नहीं लगते , पैसे तो कोइले की खानों में है |
श्रीमान तपाक से बोले , क्या मेरा नाम भी बेईमानो  में है |
हर किसी के मुह पर यहीं बात , और यही बात कानों में है |
जनमत से तो यहीं लगता है , आपका नाम भी बेईमानो  मैं है |
कब तक आपकी पुराणी छवि का लाभ आपकों देते रहेंगे |
नाक के नीचे हो रहे घोटाले , और आपको इमानदार कहते रहेंगे |
ईमानदारी तो तब होती , जब इस्तीफ़ा घोटालों पर श्रीमान का होता |
तो कसम से ये कदम , आपके इमान का होता |
-महेंद्र सिंह राठौर 

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