सोशल मीडिया

Jai Maurya
नमस्कार दोस्तों
सोशल मीडिया आज के समय में एक आम आदमी के जीवन में अहम रोल अदा कर रहा है। सोशल मीडिया को अब तक हम एक ऐसा लोकतांत्रिक और पारदर्शी माध्यम मानते आए हैं जहां हम अपने विचार साझा कर सकते हैं और किसी मुद्दे पर अपनी टिप्पणी जाहिर कर सकते हैं। लेकिन आजकल सोशल मीडिया सूचना या जानकारी प्राप्त करने का प्रमुख साधन बन गया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, युटुब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की पहुंच आज हर एक स्मार्टफोन यूज़र तक है। इंस्टाग्राम और फेसबुक के पेज एक सामान्य स्मार्टफोन यूजर की जरूरत सा बन गया है।
सवेरे की चाय की चुस्की से लेकर देर रात नींद की सुस्ती तक हम सैकड़ों मेंमें देख डालते हैं। फेसबुक इंस्टाग्राम स्क्रॉल करते वक्त हम अक्सर एक पोस्ट देखते हैं जिसमें एक फोटो होती है और उस पर एक टिप्पणी की हुई होती है लगभग सभी लोग इस को एक जानकारी या न्यूज़ की तरह देखते हैं बिना उसकी सत्यता की जांच किए। बिना उस जानकारी का स्त्रोत जाने हम उसको सही मानने लगते हैं।
इन social media pages जिसकी क्षमता जान लेना बहुत जरूरी है ये किसी भी व्यक्ति की छवि कैसे भी दिखा सकते हैं और किसी भी सूचना को किसी भी तरह जनता तक पहुंचा सकते हैं। इनको चलाने वाले का ना तो हमें असली चेहरा दिखता है ना ही उनके नाम पता चलते है लिहाजा इसके हानिकारक दुष्प्रभाव देखने को मिलता है।
कुछ लोग सोशल मीडिया का प्रयोग राजनीतिक प्रचार प्रसार के लिए भी कर रहे हैं। कई पेजेस के एडमिन अपने social media page पर पोस्ट एक राजनीतिक पार्टी के पक्ष में बनाने लग जाते हैं। जाहिर है उनको एक आर्थिक लाभ की प्राप्ति हुई होगी। एक neutral और unbiased मीडिया का काम जनता के लिए जनता की ओर से सरकार से सवाल पूछना होता है।
लेकिन सोशल मीडिया के इन पेजेस के जरिए हमें सरकार के कुछ ऐसे काम भी बताया जाते है जो उन्होंने कभी किये ही नहीं है। और कई जगह में ऐसा भी देखा गया है कि सरकार से सवाल पूछने वाले पत्रकारों को देशद्रोही बता दिया जाता है। आजकल ऐसी सूचना फैलाने वाले लोगों को ट्रोल आर्मी कहां जाता है। ट्रोल आर्मी किसी भी मुद्दे को चंद घंटों में वायरल करने की क्षमता रखते हैं। अगर मीडिया ही सरकार की तरफ से बोलने लगे तो जनता का प्रतिनिधित्व कौन करेगा ?
लेकिन बिकाऊ सोशल मीडिया से एक नंबर ऊपर पर हमारे चहेते बॉलीवुड के सितारे है जो चंद रुपयों के लिए एक पार्टी विशेष के पक्ष में कुछ भी बोलने को तैयार हो गए। कोबरापोस्ट ने अपने स्टिंग ऑपरेशन में 40 से ज्यादा हस्तियों के वीडियो सोशल मीडिया पर पर पोस्ट किए इसमें साफ दिखाया गया है कि वह सितारे चंद रुपयों के लिए अपने विचार बेचने को तैयार हो गए। उनको वह पैसा काले धन के रूप में लेने में भी कोई एतराज नहीं था। इन लोगों को आदर्श मानने वाले लाखों में लोग हैं जो इनको सोशल मीडिया पर फॉलो करते हैं। लिहाजा एक गलत प्रभाव जाता है। यह एक लोकतंत्र पर आघात है। क्योंकि इस हिसाब से जो ज्यादा पैसे दे सकता है वह अपने अनुसार जनता में अपनी छवि मैन्यूफैक्चर कर सकता है ! इन बॉलिवुड सितारों को अपना आदर्श बनाने का क्या फायदा है? इनमें से कई ने तो अपनी बुनियादी शिक्षा भी पूरी नहीं करी होगी। इनकी राजनीतिक, सामाजिक, और नैतिक समझ का अंदाजा हम आसानी से लगा सकते है।
एक सामान्य सोशल मीडिया यूजर को बड़ा सतर्क रहना पड़ेगा जब वह सोशल मीडिया कंज्यूम करता है। क्योंकि हम यह पता नहीं लगा सकते कि जो जानकारी हम तक पहुंचाई जा रही है उसका सोर्स क्या है? उस जानकारी की सत्यता का प्रमाण क्या है? और उसमें से कौन सी पैड न्यूज़ है?
बीते कुछ सालों में सोशल मीडिया की जरूरत भी पड़ी है और इसकी आम जनता तक पहुंच भी बड़ी है। लिहाजा इस के नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए कुछ कठोर एक्शन लेना बहुत जरूरी है।शिक्षण संस्थानों में भी social media consumption जैसे विषय को पाठ्यक्रम में जोड़ा जाना चाहिए।

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