पौधारोपण या फोटोरोपण

अजमेर। जितने पेड़ इन दिनों अखबारों व फेसबुक पर छपने और दिखने के लिए लगाए जा रहे हैं,उनमें से अगर एक चौथाई को भी बचा लिया जाए,तो ना पर्यावरण संकट में होगा और ना ही प्रदूषण फैलेगा । शहर को इतनी ऑक्सीजन मिलने लगेगी कि हर कोई खुद को स्वस्थ महसूस करेगा ।
लेकिन सवाल ये है कि क्या पेड़ों को लगाने वाली विभिन्न संस्थाएं, संगठन और व्यक्ति वृक्षारोपण के बाद इनका पालन-पोषण और रखरखाव भी करते हैं ? अगर करते हैं तो फिर उन्हें नए वृक्षारोपण के साथ ही ये भी बताना चाहिए कि उन्होंने पिछले साल या उससे भी पहले जो पौधे शहर के विभिन्न इलाकों में लगाए थे, उनमें से कितने अब तक जिंदा हैं और कितने बड़े हो चुके हैं ? लेकिन ऐसा कोई संगठन नहीं करता। हर साल मानसून आते ही ग्रीन सिटी क्लीन सिटी,पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ जैसे नारों के साथ कई संगठन और संस्थाएं वृक्षारोपण के लिए कूद जाते है, लेकिन ऐसे ही जोश और नारों के साथ इनके रखरखाव में साल भर सक्रिय नहीं दिखते।
इसमें कोई शक नहीं कि वृक्षारोपण आज की सबसे बड़ी जरूरत है,क्योंकि इसके बिना ना पर्यावरण बचेगा और ना ही मानसून आएगा । लेकिन पेड़ लगाने के नाम पर तस्वीरें और नाम अखबार और फेसबुक पर चमकाना महज नौटंकी ज्यादा लगती है,पर्यावरण के प्रति संजीदगी कम । जब एक पेड़ को लगाने के लिए बीस लोग उसे पकड़ते हैं और उनका ध्यान जमीन की जगह कैमरे की ओर होता है , तो यह वृक्षारोपण कम फोटोरोपण ज्यादा नजर आता है।
क्यों ना सरकारी स्तर पर इस बात की हर साल जांच कराई जाए कि सरकारी या निजी स्तर पर जितने पेड़ लगाए गए हैं,उनमें से कितने पनप रहे हैं और कितने मिट चुके हैं । ताकि हकीकत सामने आ सके कि कौन वाकई वृक्षारोपण के प्रति गंभीर है और कौन महज नाम पाने के लिए यह काम कर रहा है। हर साल हजारों नए पेड़ लगाने की बजाय अगर पुराने लगाए गए सैकड़ों पेड़ों को बचा लिया जाए ,तो ये उपलब्धि ज्यादा होगी।

ओम माथुर/9351415379

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