क्या क्रोध आदमी के लिये यमराज है ? Part 5

क्रोध को व्यक्त करने के तरीके

dr. j k garg
क्रोध को व्यक्त करने का प्राकृतिक तरीका है आक्रामक होना | किसी खतरे की प्रतिक्रिया में क्रोध एक नितान्त प्राकृतिक भाव है जो कि हमें अपनी शक्ति, आक्रामकता, अनुभूति और व्यवहार को अभिव्यक्त करने को प्रेरित करता है, जिससे हमें स्वयं पर होने वाले आक्रमण का सामना करने के लिये तैयार हो जायें । एक निश्चित मात्रा में क्रोध हमारे अस्तित्व की रक्षा के लिये आवश्यक भी है |

नि:संदेह क्रोध को दबाया जा सकता है अथवा क्रोध की तीव्रता को अन्य दिशा मे बदला भी जा सकता है। ऐसा तब संभव है जब आप इस बारे में सोचना छोड दें और अपनी ऊर्जा किसी अन्य सकारात्मक कार्य में लगायें। यहां उद्देश्य यह है कि अपने क्रोध को दबा कर या छिपा कर इसे सकारात्मक व्यवहार में बदल दिया जाए। किन्तु इस तरह की प्रतिक्रिया में खतरा इस बात का है कि अगर आप इसे बाहर सकारात्मक या नकारात्मक तरीके से व्यक्त न कर सके तो यह छिपा क्रोध आपके अन्दर जाकर आप में हताशा, तनाव उत्पन्न कर उच्च रक्तचाप की वजह बन सकता है।

अभिव्यक्त न किया जा सका क्रोध अन्य कई समस्याओं को जन्म दे सकता है। यह किसी और तरीके से बाहर आएगा जैसे कि अक्रिय और सक्रिय आक्रामक व्यवहार या असंतुलित व हिंसक मानसिकता वाले व्यक्तित्व के रूप में।

प्रस्तुतिकरण डा. जे. के. गर्ग

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