रहस्यमय विद्या है रमल ज्योतिष

राजेन्द्र गुप्ता
भारतवर्ष में भविष्य कथन जानने और समाधान के वास्ते अनेक विधाओं का विद्वान समय-समय पर सहारा लिया करते हैं। विज्ञान की अनेक शाखाएं भी वर्तमान में मौजूद हैं। जिसमें रमल (अरबी ज्योतिष ) शास्त्र यानि की इल्म-ए-रमल एक सबसे महत्त्वपूर्ण ज्योतिष जगत की जीती जागती अनूठी अतिशीघ्र समस्याओं के मार्गदर्शन समाधान करने वाली पद्धति है।
जिसमें प्राणी मात्र स्थावर और जंगम का पूर्ण लेखा-जोखा किसी घटना विशेष से पूर्व रहते हुए शोध कर खोजा जा सकता है। वैसे तो ज्योतिष की वर्तमान में और भी कई शाखाएं प्रचलित हैं। जिसमें मूक प्रश्न, फाल नामा, केरल पद्धति, प्रश्न तंत्र इत्यादि मुख्य हैं। रमल (अरबी ज्योतिष ) शास्त्र में प्रश्नकर्ता यानी की याचक की जन्म कुण्डली की कदापि आवश्यकता नहीं होती है। यहां तक कि नाम, घड़ी, वार, दिन, समय और तो और पंचांग की भी आवश्यकता नहीं होती है।
प्रश्नकर्ता मात्र रमलाचार्य के पास अपने अभीष्ट कार्य कब तक, किसके माध्यम से किस प्रकार होगा एवं अन्य तात्कालिक प्रश्न व वर्तमान समय किस ग्रह की प्रतिकूलता अशुभता है और कब तक बराबर परेशानी बनी रहेंगी। किस शेयर्स में तेजी-मंदी कब और किस समय आएगी और इसमें कैसे लाभ होगा या नहीं। साथ ही किस जीन्स में तेजी कब और मंदी कब होगी। इसमें भी लाभ प्राप्त होगा अथवा हानि इत्यादि को मन, वचन और आन्तरिक भावना से लेकर जाए। क्योंकि किसी भी ज्योतिष शास्त्र में श्रद्धा विश्वास का भाव प्रश्नकर्ता के मन में होना अति आवश्यक है।
रमल (अरबी ज्योतिष ) शास्त्र में जीवन के प्रत्येक कठिन से कठिन समस्या के मार्गदर्शन और समाधान मात्र पासे डालकर किया जाता है। पासे को अरबी भाषा में कुरा कहते है। जो प्रश्नकर्ता के हाथ पर रखकर किसी विशेष स्थान पर डलवाएं जाते हैं। उससे प्राप्त हुई शकल आकृति को रमल अरबी ज्योतिषीय गणित के मुताबिक प्रस्तार यानि की जायचा बनाया जाता है। उस प्रस्तार के माध्यम से प्रश्नकर्ता के समस्त प्रश्नों का मार्ग दर्शन व समाधान गणित के द्वारा तत्काल ही प्राप्त होता रहता है। यह सारी प्रक्रिया प्रश्नकर्ता के रमलाचार्य के सम्मुख होने पर होती हैं।
यदि प्रश्नकर्ता रमलाचार्य के सम्मुख ना हो तो प्रश्नकर्ता के समस्त प्रश्नों का जवाब मय समाधान सहित प्रश्न-फार्म द्वारा किया जा सकता है। जो वर्तमान में एक नवीन शोध द्वारा तैयार किया गया है। इन दोनों प्रश्न करने की पद्धति द्वारा प्राप्त परिणाम एक ही आता है। इससे प्राप्त फलादेश में भिन्नता किसी प्रकार से कभी नहीं होती है मगर गणितीय स्थिति पूर्णत: भिन्न अवश्य होती है।
आजकल भारतीय ज्योतिष द्वारा बनायी जा रही भविष्यकाल के जानने के वास्ते जन्म कुण्डली कुछ लोगों के पास नहीं हैं अथवा पूर्ण नहीं है तथा जिसके पास है भी, तो पूर्ण रूप से सही नहीं है। जिनका फलादेश पूर्ण तथा सही घटित नहीं होता है। इस कारण से प्रश्नकर्ता पूर्ण मानसिक रूप से संतुष्ट नहीं होता है और ना ही उसे इच्छित लाभ की प्राप्ति होती है मगर रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र में जन्म कुण्डली आदि की आवश्यकता कदापि नहीं होती है। रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र का फलादेश ऐसे लोगों के लिए जिनकी कुण्डली नहीं है, काफी सटीक प्राप्त होता है।
रमल (अरबी ज्योतिष ) में पासा डालने के उपरान्त प्रस्तार यानी कि जायचा बनाया जाता है। प्रस्तार के 16 घर होते हैं। 13,14,15,16 घर गवाहान यानी कि साक्षी घर होते हैं। प्रस्तार के 1,5,9,13 घर अग्नि तत्व के होते हैं। 2,6,10,14 घर वायु तत्व के होते हैं। 3,7,11,15 घर जल तत्व के होते हैं और अन्तिम घर 13,14,15,16 घर पृथ्वी तत्व के होते हैं।

राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
मो. 9611312076
नोट- अगर आप अपना भविष्य जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करके या व्हाट्स एप पर मैसेज भेजकर पहले शर्तें जान लेवें, इसी के बाद अपनी बर्थ डिटेल और हैंडप्रिंट्स भेजें।

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