
मिट जाए सारा संत्रास ।
बरसे घर-घर में सुख-हर्ष ।मंगलमय हो यह नववर्ष ।
एक- एककर छोड़े ऐब ,
खुशियों से भर जाए ज़ेब ।
संस्कारों का हो उत्कर्ष ,
मंगलमय हो यह नववर्ष ।
मर्यादा में बंधे सभी ,
मैत्री भूले नहीं कभी ।
सदा बड़ों से करें विमर्श ,
मंगलमय हो यह नववर्ष ।
हो चाहे कितने ही कष्ट ,
नहीं बनें जीवन में भ्रष्ट ।
मर- मिट जाएं भले सहर्ष ,
मंगलमय हो यह नववर्ष ।
देश, धर्म , जाति पर मान ,
दें औरों को भी सम्मान ।
रहे अखंडित भारतवर्ष ,
मंगलमय हो यह नववर्ष ।
– नटवर पारीक
श्री शारदा ज्ञानपीठ,डीडवाना
9414548148