बड़ो सांतरो मौको है

नटवर विद्यार्थी
राजस्थानी वीर भौम की ,
गाथा जद पूरण होसी ।
वीरां रा जयकारा वाळी ,
भासा आसन पर होसी ।

जण-जण आगे हाथ फैलाया,
मग़र ढाक का पात बठै ।
सुनवाई जद ही होवैली ,
भासा ख़ातिर माथ कटै ।

अगुवाणी हो माथो मांडो ,
हक न लड़कर पाणू है ।
भासा री मानिता ख़ातिर ,
सबनै आगे आणू है ।

सारा एकट हो जाओ थे ,
तीस मार्च दिन चौखो है ।
भासा रे गौरव रे ख़ातिर ,
बड़ो सांतरो मौको है ।
– जय राजस्थानी
कवि नटवर पारीक, डीडवाना
जिला- नागौर ( राजस्थान)

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