j k gargमुस्कराहट तभी आकर्षक लगती है, जब वह होठों के साथ-साथ आंखों से भी नजर आये। मुस्कुराहट से अच्छा दूसरा तोहफा और दवा प्रायः हमारे पास नहीं होती। हँसना मानवीय स्वभाव है | मानव ही एक मात्र ऐसा प्राणी है, जिसमें हंसने की अपार क्षमता होती है। जो व्यक्ति अकेले या भीड़ में खुलकर हँसने का साहस न जुटा सकें, उन्हें मुंह बंद कर मन ही मन में जितनी लम्बी देर एक ही श्वास में हँस सकें, बिना आवाज निकाले हँसना चाहिए। जिससे ऐसी हँसी से प्राणायाम का भी लाभ भी उसे स्वतः मिल जाता है। प्रदूषण रहित स्वच्छ एवं खुले प्राणवायु वाले वातावरण में प्रातःकाल उदित सूर्य के सामने हँसना अपेक्षाकृत अधिक लाभप्रद होता है क्योंकि हास्य क्रिया के साथ-साथ सौर-ऊर्जा एवं ऑक्सीजन अधिक मात्रा में सहज प्राप्त हो जाते हैं।
मनमोहक मुस्कान आपके चेहरे पर चार चांद लगा सकती है। मुस्कराने का ढंग सबका अलग-अलग होता है। कोई हंसते हुए दांत और मसूड़े दोनों दिखाता है तो कोई सिर्फ दांत दिखा कर मुस्कराते हैं | प्रत्येक व्यक्ति की मुस्कराहट हम तीन भागों में बांट सकते हैं-
हाई लिप लाइन- जो लोग मुस्कराते वक्त अपने सामने के दांत और मसूड़े दोनों दिखाते हैं उन्हें हम इस श्रेणी में डाल सकते हैं।
मीडियम लिप लाइन- मुस्कराते समय जिन लोगों के सामने और नीचे दोनों दांतों की पंक्ति नजर आती हैं उन्हें हम इस श्रेणी में डाल सकते हैं।
लोअर लिप लाइन- मुस्कराने में जिन लोगों के सिर्फ नीचे के दांत ही दिखाई देते हैं, उन्हें हम इस श्रेणी में डाल सकते हैं।