भ्रष्टाचार व अफसरशाही हावी है राजस्थान में

प्रेम आनंदकर
👉इस ब्लॉग में खेल मंत्री अशोक चांदना द्वारा जताई गई पीड़ा का जिक्र करते हुए बताया था कि अफसरशाही के आगे मंत्री तक दुखी हैं। अफसर जब मंत्रियों को ही नहीं गांठते हैं तो सांसदों, विधायकों, जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं और आमजन की क्या बिसात है। सरकार को अफसरशाही पर नकेल कसकर व्यवस्था में सुधार करना चाहिए। तो पेश है सोशल मीडिया के विभिन्न ग्रुपों में मिली लोगों की प्रतिक्रिया-
-भ्रष्टाचार चरम पर है।
-भ्रष्टाचार का बोलबाला, अधिकारी सीएम साहब के सामने है, कुछ दिन पूर्व की घटना, विशेष अधिकारी वर्ग सीएम साहब के आगे एसीपी को उन पर कार्रवाई करने से रोकने को कहा गया एवं एसीपी के लोगों को संदेश दिया कि वह भी दूध के धुले थोड़े ही हैं। स्थिति यह है, तो आम जनता की कहां सुनवाई होगी। अधिकारी नेता अपने आप में मस्त, जनता जाए भाड़ में, कार्यकर्ता का तो वैसे भी कांग्रेस कल्चर में कोई वजूद नहीं।
-मंत्री व विधायक मंथली लेते हैं।
-साल भर के लिए पोस्टिंग हेतु अधिकारी पैसे देता है।
-RAA अजमेर महीने का खोखा कमा लेता हैं।
-पंचायत समिति के ग्राम सेवक से लेकर BDO तक सभी देकर लगते हैं चाहे सरकार किसी की भी हो।
-संगठन को शक्तिहीन कर रखा है।
-हमारा देश महान, अधिकारियों को एवं मंत्रियों को भ्रष्टाचार से कोई परहेज नहीं, क्योंकि यह अब सिस्टम का एक अहम हिस्सा बन गया है l
अगर आप सिस्टम में हैं तो आप संपन्न हैं अन्यथा आप आम आदमी के श्रेणी में आते हैं, जिसका कोई इस देश में वजूद नहीं, सिर्फ वोट के टाइम नेता नमस्ते करते हैं, सब गोलमाल है सब गोलमाल है, यह देश हमारा महान।
-सब अपनी कुर्सी के लिए लड़ रहे हैं, संगठन का कोई वजूद नहीं, संगठन क्या होता है शायद हमें पता भी नहीं।
-हर-हर महादेव भौलिये री कृपा से।
-Adhikari kbhi bure nhi hote, C.M.Office mai jitne, I.A.S.OR R.A.S.Officers lage hai wo sb apni yogyata or kabiliyat se adhikari bane hai, na ki kisi se jhoote wade or kasme kha kar, Neta konse doodh ke dhule hai Sir inke karnamo ke kisso se itihas bhara pada hai, chahe wo RAS Exam ho ya REET, In par nakel lagi tho sabhi tilmilaye huay hai… baki aap sabhi jante hai ki kon sahi kon galat hai.

✍️प्रेम आनन्दकर, अजमेर।

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