*कविता- भूला दिया जाएगा*

वह नाम का ग़ुरूर
जो आवाज़ से झलकता था
फ़्लैट का नम्बर बनकर
लिफ़्ट की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए
सीढ़ियों का अर्थ भूल चुका है

वह नीम का पेड़
जिसे छोड़ आया था
अपने पुराने घर के पास
खिड़की में झूलती
एक गमलेनुमा टोकरी से
दीवारों के भीतर
झाँकने की कोशिश रहा है

वह आँगन की धूप
जो बदन से चिपक कर
सर्द हवाओं से लड़ती थी
सुना है अब
एनर्जी बैकउप की चाकरी में लगी है

वह रास्ते
जिनकी मिट्टी
हर थकान सोख लेती थी
अब पाँव को नहीं
पहियों को पहचानती है
सच कहूँ तो
वे ज़मीन पर होकर भी
ज़मीन पर नहीं रह गई है

वह पोखर या तालाब
जो अक्सर बरसात के दिनों में
साथ खेलता, गाता, नहाता था
स्विंगिंग पूल बनकर
उतना ही नग्न है
जितने कि बरसात से बेख़बर
पानी में छलांग लगाते शरीर

नाम, नीम, धूप, मिट्टी, पानी के बिना
मुझे जला दिया जाएगा
दफ़ना दिया जाएगा
भुला दिया जाएगा

*रास बिहारी गौड़*

error: Content is protected !!