*पिछले 5 सालों में 15 राज्यों में 41 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, लाखों किशोर और युवा होते हैं परेशान*
————————————
*■ओम माथुर ■*
*लगता है परीक्षाओं के पेपर लीक होना और उसके बाद उनका रद्द होना राष्ट्रीय समस्या बनता जा रहा है। समस्या इसलिए कि,अब यह काला धंधा देश के किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहा,बल्कि कई राज्यों में इसकी छाया पड़ चुकी है। राजस्थान,उत्तर प्रदेश,मध्यप्रदेश, बिहार, गुजरात,उत्तराखंड,हरियाणा, उड़ीसा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, असम, अरुणाचल प्रदेश,जम्मू कश्मीर, झारखंड, देश के इन 15 राज्यों में पिछले पांच सालों में 41 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। बस राज्य और परीक्षा का नाम बदलता है, पेपर लीक गिरोह और माफिया के कारनामे वहीं रहते हैं। लगता है पेपर लीक और नकल देश में उद्योग का रूप ले रहा है और इससे करोड़ों रुपए कमाए जा रहे हैं,युवाओं के सपनों और भविष्य को कुचलकर।*
*इनका क्या कसूर*
———————-
*सोचिए,उस ईमानदार किशोरों और युवाओं की,जो अपना भविष्य बनाने के लिए सब कुछ भूलकर और कोचिंग के लिए घर छोड़कर रात-दिन किसी प्रवेश या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं। उन पर क्या गुजरती होगी,जब परीक्षा के कुछ दिन या कुछ घंटे पहले पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द होने की खबर मिलती होगी। या उस हाल में उन पर क्या बीतती होगी,जब परीक्षा देने के बाद उसे कामयाब होने की उम्मीद होती हो,लेकिन परिणाम आने से पहले नाउम्मीदी के बादल इस रूप में आकर फटते हो कि पेपर आउट होने या नकल के कारण परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। जाहिर है,महीनों की मेहनत पर इस तरह पानी फिरने से उनमें निराशा और अवसाद (डिप्रेशन) भी आता है,जो कुछ मामलों में आत्महत्या की हद तक पहुंच जाता है।*
*परीक्षा प्रणाली संदेह के घेरे में*
—————————–

*शिक्षा में राजनीति क्यों*
——————————
*लेकिन विडंबना ये है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील मामले में भी खुलकर राजनीति की जा रही है। पेपर लीक और नकल माफिया से निपटने के लिए भी देश के सभी राजनीतिक दल, पक्ष और विपक्ष एक साथ नहीं आ सकते। देश के भविष्य को कुतरने वालों को कुचलने के लिए भी अगर हमारे नेता एक नहीं हो सकते,तो ये शर्मनाक है। लेकिन सत्ता के लिए देश के युवाओं के भविष्य को दांव पर लगाने में कोई पार्टी पिछे नहीं है।राजस्थान में पेपर लीक की घटनाओं को भाजपा लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बड़ा मुद्दा बनाया था। लेकिन भाजपा शासित राज्यों गुजरात, मध्य प्रदेश और प्रदेश में भी लगातार पेपर लीक होते रहे हैं। वहां भाजपा चुप रहती है और कांग्रेस शोर मचाती है। अभी बिहार में अगर भाजपा के नेता नीट पेपर लीक मामले के आरोपी को राजद के नेता तेजस्वी यादव का पीएस बता रहे हैं, तो तेजस्वी ने भाजपा नेता उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ लीक के मास्टर माइंड अमित आनंद की फोटो शेयर कर दी। लेकिन क्या ही अच्छा होता दोनों एक साथ आकर कहते कि मामले की निष्पक्ष जांच हो। भले ही कोई उनका परिचित हो,अगर लीक में शामिल है,तो उसे सख्त सजा दी जाए। इससे कम से कम युवाओं में ये संदेश तो जाता की राजनीतिक दल शिक्षा और युवाओं के भविष्य के मुद्दे पर उनके साथ है। उनसे खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं। लेकिन वोटों की राजनीति उन्हें साथ आने से रोकती हैं।आखिर यह सुविधा भी तो हमारे देश में ही है कि कोई अनपढ़ भी यहां विधायक,सांसद और मंत्री यहां तक की मुख्यमंत्री (तेजस्वी यादव की मां और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी) तक बन सकता है। लेकिन युवाओं को 12वीं पास करे भी बाबू की नौकरी के लिए आवेदन का हक नहीं है।*
*टूट जाती है परिवारों की कमर*
————————————
*परीक्षाओं का आर्थिक पक्ष मध्यमवर्गीय परिवारों की भी कमर तोड़कर रख देता है। मंहगाई की आग में जलते हुए नौकरीपेशा परिवार पाई-पाई जोड़कर बच्चों को कोचिंग के लिए भेजते हैं। ऐसे परिवारों के लिए आज कोचिंग का खर्च उठाना कोई मामूली बात नहीं है। माता-पिता अपनी खुशियां और सपनों को भूलकर बच्चों का भविष्य बनाने के लिए अपनी सारी जमा-पूंजी उनकी शिक्षा पर लगा देते हैं। आज मेडिकल और इंजीनियरिंग के लिए नीट और जेईई की कोचिंग पर ही ढाई से तीन लाख रूपए खर्च हो जाते हैं।अगर खुद के शहर को छोड़कर बाहर कोचिंग करनी है,तो होस्टल या पीजी में रहने और खाने का खर्च और जोड़ लीजिए। इसके अलावा जो युवा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं,वह भी कोचिंग पर लाखों रुपए खर्च करते हैं। ऐसे में अधिकांश परिवारों की तो हैसियत भी नहीं होती है कि एक बार परीक्षा रद्द होने पर वह दोबारा वह अपने बच्चों को उसकी तैयारी के लिए पैसा खर्च कर सकें। खुद बच्चों के मन में भी इस बात का दबाव रहता है कि उनके मां-बाप किस हालत में रहकर उनकी कोचिंग पर पैसा खर्च करते हैं। लेकिन इससे न कोचिंग माफिया का कोई लेना देना है और ना ही पेपर लीक माफिया। दोनों का मकसद पैसा बनाना है।*
*एनटीए भी हुई नाकाम*
——————————-
*अब तक यही माना जाता था कि राज्य की एजेंसियां ही पेपर लीक रोकने में कमजोर साबित हो रही है। लेकिन केंद्रीय एजेंसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की नाकामी में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारी परीक्षा प्रणाली कभी निष्पक्ष होगी या नहीं। अब केंद्र सरकार ने एनटीए की परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए सात सदस्यों की हाई लेवल कमेटी का ऐलान कर दिया है। इसे दो माह में रिपोर्ट देनी होगी। 7 साल पहले गठित एनटीए ने 9 दिन में तीन परीक्षाएं रद्द करके अपनी छवि पर कालिख पोत ली है। इन परीक्षाओं में यूजीसी नेट, सीएसआईआर यूजीसी नेट तथा एनसीईटी परीक्षा शामिल है। अब उसकी नीट पर भी रद्द होने का खतरा बन रहा है। जिसमें 24 लाख बच्चे शामिल हुए थे।नीट के मामले में अब तक बिहार और झारखंड में पेपर लीक होने के पर्याप्त सबूत मिल चुके हैं। ऐसे में परीक्षा को बनाए रखना इसकी विश्वसनीयता को हमेशा के लिए संदेह में रखना होगा।*
*क्या कानून रोक सकेगा इसे*
——————————–
*केंद्र सरकार भी लगातार पेपर लीक होने और परीक्षा रद्द होने के कारण हरकत में आ गई है। पेपर लीक होने पर 10 साल की जेल और एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाने वाला कानून लागू कर दिया गया है। राजस्थान में ये कानून पिछली कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पहले ही लेकर आ गए थे। जो केंद्र के कानून से भी सख्त है। इसमें आजीवन कारावास, प्रॉपर्टी अटैचमेंट और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन क्या कानून से यह सब रूक सकेगा? पेपर लीक गिरोहों की जडे इतनी गहरी हो गई है कि उन्हें आसानी से मिटाना मुमकिन नहीं है। फिर राजनीतिज्ञों का भी संरक्षण इन्हें मिलता ही है। कानून तो देश में अपराध रोकने के लिए बहुत है,लेकिन कौनसे अपराध रुक गए? जरूरत है कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी शिक्षा पद्धति और परीक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाने के लिए सरकार कोई ठोस प्रयास करें, ताकि कोई भी इसके साथ छेड़छाड़ कर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ ना कर सके और इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को आपसी मतभेद बुलाकर साझा प्रयास करने की भी जरूरत है।*
*9351415379*