*सुपार्श्वनाथ पार्क में दशलक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की आराधना*
भीलवाड़ा,14 सितम्बर। आचार्य श्री सुंदरसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में श्री महावीर दिगम्बर जैन सेवा समिति के तत्वावधान में दसलक्षण (पर्युषण) महापर्व की आराधना शहर के शास्त्रीनगर हाउसिंग बोर्ड स्थित सुपार्श्वनाथ पार्क में सातवें दिन भी श्रद्धा व भक्तिभावना के साथ जारी रही। दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की आराधना की गई। प्रवचन में आचार्य सुंदरसागरजी महाराज ने कहा कि समस्त रागादि भावों के त्यागपूर्वक आत्मस्वरूप में अपने में लीन होना यानि आत्मलीनता द्वारा विकारों पर विजय प्र्राप्त करना ही तप धर्म है। कर्मो के क्षय, कर्मो की निर्जरा ओर विकारों को हटाने के लिए,कषायों को मंद करने के लिए, अपनी दृष्टि को निर्मल करने के लिए यह तप धर्म है। उन्होंने कहा कि सम्यक दर्शक दृष्टि से वस्तु स्वरूप को जानकर निजात्मा में लीन होना, अशुभ भावों को रोककर उन्हें शुभ भावों की ओर मोड़ देना एवं विषय विकारो से चित को हटाकर आत्मा में स्थिर होना ही उत्तम तप धर्म है। इच्छाओं को रोकना या सीमित करना ही तप धर्म का सार है। आचार्यश्री ने कहा कि तप धर्म का महत्व जो समझ लेता है उसके आत्मकल्याण की राह आसान हो जाती है। उत्तम तप की आराधना कर अपने जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। इससे पूर्व प्रवचन में आर्यिका संस्कृति माताजी ने तप धर्म के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि मन की शुद्धि को कायम रखना ही उत्तम तप है। सूर्य तपता है तो प्रकाश देता है। मिट्टी तपती है तो कलश बनती है। शरीर तप करता है तो आत्मा भगवान बनती है। तप से ही सोना शुद्ध होता है। तप करने से ही कर्मो की निर्जरा होती है। समीचीन तप से केवलज्ञान मिलता है। श्री महावीर दिगम्बर जैन सेवा समिति के अध्यक्ष राकेश पाटनी ने बताया कि दशलक्षण पर्व के सातवें दिन सुपार्श्वनाथ मंदिर में मुख्य शांतिधारा व आरती का सौभाग्य सुरेशकुमार पुष्पा,संजय पायल,सुशील स्वाति,तनिष्क समीक्षा,काव्या,आरीभ लुहाड़िया परिवार ने लिया। सौधर्मेन्द्र का इन्द्र व आरती का सौभाग्य रक्षादेवी,संदीप,संजय,राउल,तव्यय छाबड़ा परिवार को प्राप्त हुआ। मीडिया प्रभारी भागचंद पाटनी ने बताया कि आचार्य सुंदरसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में उत्तम तप धर्म की आराधना एवं पूजा अर्चना मय भक्ति संगीत के साथ संगीतकार हर्ष भोपाल एवं पंडित पदमचंद काला के निर्देशन में कराई गई जिसका कई श्रावक-श्राविकाओं ने लाभ लिया। पूजा के पूर्व श्रीजी को जुलूस के साथ श्रद्धालुओं द्वारा पांडाल में ले जाया गया। दोपहर में सरस्वती पूजा, तत्वार्थ सूत्र पूजा एवं वाचन हुआ। शाम को सुपार्श्वनाथ जागृति मंच के सौजन्य से कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। दशलक्षण पर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की आराधना होगी। इस दौरान प्रतिदिन सुबह 5 बजे ध्यान, सुबह 6.15 बजे नित्य अभिषेक एवं शांतिधारा, सुबह 7.30 बजे से श्रीजी का पांडाल में आगमन, सुबह 7.45 बजे से संगीतमय पूजन एवं मंगल प्रवचन हो रहे है। आहारचर्या के बाद दोपहर 2 बजे से तत्वार्थसूत्र पूजन,सरस्वती पूजन व तत्वार्थ सूत्र वाचन किया जा रहा है। शाम 6 बजे से प्रतिक्रमण एवं सामायिक, शाम 7.15 बजे से श्रीजी की आरती एवं शाम 7.40 बजे से आचार्यश्री की भक्तिमय आरती की जा रही है।