फिल्मी दुनिया का दिलचस्प किस्सा

//कवि- गीतकार नीरज को   फिल्म  “प्रेम पुजारी” में गीत लिखने के लिए एक अजीबोगरीब टेस्ट से गुजरना पड़ा….//
//जब कवि,-गीतकार गोपाल  दास सक्सेना, जिन्हें हम सब नीरज नाम से जानते हैं, को सदाबहार अभिनेता देवानंद की फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ में गीत लिखने के लिए एक अजीबोगरीब परीक्षा से गुजरना पड़ा…//
श्याम कुमार राई ‘सलुवावाला’

किसी कवि सम्मेलन में जब देवानंद  ने नीरज जी की रचनाओं का पाठ सुना तो उनसे प्रभावित होकर उनके साथ काम करने का वादा कर बैठे।  समय बीतता गया पर साथ काम करने का मौका नहीं मिल रहा था। फिर देवानंद ने जब फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ बनाने की योजना बनाई तो उन्होंने नीरज जी को बम्बई बुलाया और संगीतकार एस.डी. बर्मन के पास ले गए और उनसे बौले, “दादा, ये नीरज हैं,ये प्रेम पुजारी के लिए गीत लिखेंगे इनसे गीत लिखने को कहें।”

   सचिन जी ने उन्हें एक धुन सुनाई और बोले, आपको इस धुन पर गीत लिखना है और  गीत में ‘रंगीला’ शब्द जरूर शामिल  होना चाहिए।  नीरज जी ने गीत लिखने की ऐसी शर्त सुनकर हां में सिर हिलाया और अपने रूम में गीत लिखने चले गए।  दूसरे दिन ही नीरज जी गीत लिखकर बर्मन दादा के पास पहुंचे। उन्होंने जो गीत लिखा था उसके बोल थे — “रंगीला रे तेरे रंग में यूँ रंगा है मेरा मन,
छलिया रे ना बुझे है किसी जल से ये जलन….”
 गीत सुनकर दादा खुश हुए  और बोले, “नीरोज, असल में मैं तेरे को फिल्म से निकालना चाहता था और फिल्म के अंदर मेरा पसंदीदा गीतकार  मुजरू ( वे मजरुह को हमेशा मुजरू कहा करते थे) को इस फिल्म में लाना चाहता था। इसलिए मैंने तुम्हें ऐसा शब्द  देकर लिखने को दिया। ताकि तुम लिख न सको और इसी बहाने तुम्हें फिल्म से बाहर कर सकूं। मगर तुमने बहोत अच्छा लिख कर लाया।” पाठको अब समझ गए  होंगे कि दादा किस कदर सरल सीधे और सच्चे इंसान थे। ये पूरा वाकया खुद शायर-गीतकार  मजरुह  सुल्तानपुरी ने टीवी के कार्यक्रम के दौरान बताया था। मेरा नसीब, मैं उस कार्यक्रम को देख पाया।
 इस तरह एक अभिनव परीक्षण से गुजर कर नीरज ने फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ के गीत लिखने का अवसर हासिल कर फिल्म जगत में बतौर गीतकार प्रवेश किया।  इसके बाद तो उन्होंने एक से एक शानदार गीत लिखकर फिल्मी गीत-संगीत के खजाने  को बेशकीमती गीतों से मालामाल  कर दिया।  “काल का पहिया घूमे रे भैया…(फि. चंदा और बिजली ) खिलते हैं गुल यहां…, ( फि.शर्मीली) “मेरा मन तेरा प्यासा…”, ( फि.गैम्बलर) “लिखे जो खत तुझे…” ( फि.कन्यादान), “ए भाई जरा देख के चलो…”(फि. मेरा नाम जोकर) जैसे उनके द्वारा लिखे कुछ अर्थपूर्ण गीतों के ये चंद उदाहरण भर हैं। लिखना बंद करूं इससे पहले यह बताता चलूं कि लिखे जो खत तुझे…, ए भाई जरा देख के चलो … गीत के बनने के पीछे भी मजेदार किस्सा है। उसका भी जिक्र कभी आने वाले दिनों में… जरूर करूंगा। ऐसे प्रतिभावान गुणी कलम के धनी कवि गीतकार नीरज जी का
19 जुलाई 2018 की सुबह 93 बर्ष की आयु में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में हो गया। जाते जाते उनका एक शेर जो मुझे बेहद पसंद है उसे यहां देने का मन कर रहा है—
   “अब तो मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाए
जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए।”
     बस आज इतना ही…. विदा
 श्याम कुमार राई 
         ‘ सलेवावाला
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