प्रतिभा के पुंज — डॉ. भीमराव अंबेडकर

डॉ. अंबेडकर जयंती पर विशेष
सन 1930 में लंदन में आयोजित गोलमेज कॉन्फ्रेंस में शेर की तरह दहाड़ते हुए एक युवक ने कहा ‘‘अंग्रेजों पहले तुम भारत छोड़ो‘‘। युवक के मन में देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करवाने एवं वहां रह रहे दलितों के जीवन स्तर को सुधार कर सभी लोगों को समान जीवन यापन की सुविधा देने की ललक थी।
यह युवक और कोई नहीं डॉ. भीमराव अंबेडकर थे। वह भारत के महान सपूत थे अद्भुत/उर्वर कल्पनाशील, नई-नई संरचनाओं के शिल्पी, हमारे संविधान के निर्माता, आधुनिक मनु, बौद्ध धर्म के नए भाष्यकार, अपने प्रत्येक रूप में उन्होंने भारतीय सामाजिक घटनाक्रम को प्रभावित किया। उन्होंने प्रारंभ से ही पिछड़ी जातियों के अभ्युत्थान के लिए अथक परिश्रम किया। एक पिछड़ी जाति में जन्म लेने के कारण उन्होंने इन जातियों का संघर्ष गहराई से महसूस किया तथा उनके तमाम दुःख दर्दों और पीड़ाओं को निपटाने सुलझाने का आदर्श मार्ग सुझाया।
डॉ. अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश में इंदौर के पास महू छावनी में हुआ। हिन्दू महार जाति जो उसे समय अछूत समझी जाती थी ,में जन्मे डॉ. अंबेडकर के पिता राम जी मालो जी सकपाल जो कबीर का अनुयायी थे। इस कारण उनके मस्तिष्क में जातिवाद के लिए कोई स्थान नहीं था। 1907 में, उन्होंने अपनी मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की और अगले वर्ष उन्होंने एल्फिंस्टन कॉलेज में प्रवेश किया, जो कि बॉम्बे विश्वविद्यालय से संबद्ध था। इस स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने वाले अपने समुदाय से वे पहले व्यक्ति थे। 1912 तक, उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और राजनीतिक विज्ञान में कला स्नातक (बी॰ए॰) की डिग्री प्राप्त की और बड़ौदा राज्य सरकार के साथ काम करने लगे।
छात्रवृत्ति पर ही होने से 1913 में अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय में प्रवेश मिल गया वह भारत के पहले अछूत और महान थे जो पढ़ने के लिए विदेश गए थे। 1917 में विश्वविद्यालय से इन्होंने पीएचडी एवं ‘‘बार एट लॉ‘‘ की उपाधि प्राप्त की।
इंग्लैंड से लौटकर उन्होंने वकालत प्रारंभ की तथा साथ ही अछूतों के उद्धार के लिए संघर्ष प्रारंभ कर दिया। वर्ष 1927 में उन्होंने मुंबई से एक पाक्षिक अखबार बहिष्कृत भारत प्रारंभ किया। उन्होंने 1936 में है इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी की स्थापना की। इस राजनीतिक संस्था ने दलित वर्ग मजदूर और किसान वर्ग की अनेक समस्याओं को लेकर कार्य आरंभ किया। इस पार्टी ने मुंबई प्रदेश में 1937 का चुनाव लड़ा। जिसमें उन्हें विजय प्राप्त हुई उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मजदूरों को सत्याग्रह अधिकार होना ही चाहिए।
7 अगस्त 1942 को उन्हें गवर्नर जनरल की परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया तब कांग्रेस के साथ डॉ अंबेडकर के मतभेद थे लेकिन कांग्रेस नेता नेहरू और पटेल उनकी प्रतिभा के कायल थे। इस कारण कांग्रेस ने सहयोग देकर उन्हें संविधान सभा का सदस्य निर्वाचित कराया। संविधान सभा में उन्हें संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष का दायित्व सौंप दलितों को सामाजिक जीवन में समानता की स्थिति प्रदान करने के लिए संवैधानिक व्यवस्था डॉ. अंबेडकर के प्रयत्नों का ही परिणाम है।
वे भारतीय संविधान को और एक बहुत बड़ी सीमा तक भारतीय आकांक्षाओं और मानसिकता के शिल्पी थे। उन्होंने संविधान का मसूदा तैयार कर 4 नवंबर 1948 को संविधान निर्मात्री सभा में प्रस्तुत किया। वह महीना रात भर जागते रहे, विदेश के सभी प्रमुख संविधानों का उन्होंने गहराई से अध्ययन किया और एक ऐसा निचोड़ प्रस्तुत किया जिसकी सर्वत्र प्रशंसा हुई।
3 अगस्त 1949 को डॉ अंबेडकर को भारत सरकार का कानून मंत्री बना दिया गया। कानून मंत्री के रूप में उन्होंने उनका सबसे अधिक प्रमुख कार्य हिंदू कोड बिल था। इस कानून का उद्देश्य था हिंदुओं के सामाजिक जीवन में सुधार, तलाक की व्यवस्था और स्त्रियों के लिए संपत्ति में हिस्सा, इस कानून की प्रमुख बातें थे। वह जन्म के आधार पर होने वाले जाति विभाजन के कट्टर विरोधी है थे। नेहरू जी के साथ कुछ बातों पर मतभेद होने के कारण उन्होंने 27 सितंबर 1951 को मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया।
डॉ. अंबेडकर हिंदू धर्म के दलितों को सम्मानजनक स्थिति प्रदान करना चाहते थे जिसके लिए उन्होंने 5 लाख व्यक्तियों के साथ 14 अक्टूबर 1956 को बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया। 6 दिसंबर 1956 की प्रातः काल की बेला में उनका देहावसान हो गया । वह अपनी आखरी सांस तक हरिजन अछूतों और पिछड़ी हुई जातियों के लिए लड़ते रहे। वह सचमुच चाहते थे कि भारत के लोग समाजवाद भाईचारे के भाव और समाज को सही वैचारिकता समृद्धि के लिए संघर्ष करें।
आधुनिक भारत के राजनीतिक चिंतन में अंबेडकर को निश्चित रूप से महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है क्योंकि उन्होंने अपने विद्वतापूर्ण लेखन, नेतृत्व और रचनात्मक कार्य से भारत के विशाल अछूत समुदाय की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूकता उत्पन्न की है। उनका यह कार्य समस्त हिंदू समाज और इस देश के प्रति उनकी एक महती सेवा है।

— श्रीमती संतोष शर्मा
स्वतंत्र पत्रकार,साकेत नगर

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