व्यस्त जीवन शैली में संतोष पाने के लिए जरूरी है-

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

 वर्तमान समय में अपनी व्यस्त जीवन शैली के कारण लोग संतोष पाने के लिए योग करते हैं। योग से न केवल व्यक्ति का तनाव दूर होता है बल्कि मन और मस्तिष्क को भी शांति मिलती है योग बहुत ही लाभकारी है। योग न केवल हमारे दिमाग, मस्तिष्क को ही ताकत पहुंचाता है बल्कि हमारी आत्मा को भी शुद्ध करता है। आज बहुत से लोग मोटापे से परेशान हैं, उनके लिए योग बहुत ही फायदेमंद है। योग के फायदे से आज सब ज्ञात है, जिस वजह से आज योग विदेशों में भी प्रसिद्ध है। इसका नियमित अभ्यास करते हैं, तो इससे धीरे-धीरे तनाव भी दूर हो सकता है।

भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि ‘योग विद्या‘ आज की संतति के लिए हमारे ऋषियों की देन है और हमारी मान्यता है की पूर्णतया वैज्ञानिक योग विद्या के अभ्यास से मानव द्वारा अपना शारीरिक, मानसिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास कर भगवत प्राप्ति के चरम लक्ष्य को प्राप्त कर सकना संभव है।

आज के इस भौतिक युग में जबकि मनुष्य अनेक शारीरिक व्याधियों से ग्रस्त है, विभिन्न मानसिक कुंठाओं से संतप्त है एवं आध्यात्मिक दृष्टि से बिल्कुल खोखला सा हो रहा है, योग की आवश्यकता और भी अधिक अनुभव की जा रही है। शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक आत्मिक उत्थान की इसी आवश्यकता को अनुभव करते हुए समाज के कतिपय बुद्धिजीवी, सृजनधर्मी एवं कल्पनाशील व्यक्तियों द्वारा वर्ष 1974 में राजस्थान स्वास्थय योग परिषद की स्थापना भी की गई थी।

 योग जीवन का एक मार्ग है जिसके द्वारा न केवल शरीर का ही विकास होता है बल्कि आत्मिक विकास का भी यह सर्वोपरि साधन है। योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत की युज् धातु से हुई है जिसका अर्थ जोड़ना या मिलाना है। अर्थात आत्मा व परमात्मा का मिलन। महर्षि पतंजलि के अनुसार चितः वृत्तियों का निरोध ही योग है। संपूर्ण चितःवृत्तियों का निरोध करना और मन की स्थिरता प्राप्त करना ही योग साधना का साध्य है। पतंजलि ने इसके आठ अंग (अष्टांग) बताए हैं- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि। व्यास ने समाधि को ही योग माना है। योगवासिष्ठ के अनुसार योग वह युक्ति है जिसके द्वारा संसार सागर से पार जाया जा सकता है। गीता में भगवान कृष्ण के अनुसार सर्व कर्मों में कुशलता ही योग है। योग का शाब्दिक अर्थ चाहे कुछ भी हो योग साधना का उद्देश्य या अंतिम ध्येय केवल्य की प्राप्ति या ब्रह्म में तादात्म्य है।

योग के कई सारे अंग और प्रकार होते हैं, जिनके जरिए हमें ध्यान, समाधि और मोक्ष तक पहुंचना होता हैै। योग शब्द तथा इसकी प्रक्रिया और धारणा हिन्दू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म में ध्यान प्रक्रिया से सम्बन्धित है। योग शब्द भारत से बौद्ध पन्थ के साथ चीन, जापान, तिब्बत, दक्षिण पूर्व एशिया और श्रीलंका में भी फैल गया है और इस समय सारे सभ्य जगत में लोग इससे परिचित हैं। सिद्धि के बाद पहली बार 11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रत्येक वर्ष 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मान्यता दी है।

हिन्दू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म में योग के अनेक सम्प्रदाय हैं, योग के विभिन्न लक्ष्य हैं तथा योग के अलग-अलग व्यवहार हैं। परम्परागत योग तथा इसका आधुनिक रूप विश्व भर में प्रसिद्ध हैं।

 सबसे पहले योग शब्द का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। इसके बाद अनेक उपनिषदों में इसका उल्लेख आया है। कठोपनिषद में सबसे पहले योग शब्द उसी अर्थ में प्रयुक्त हुआ है जिस अर्थ में इसे आधुनिक समय में समझा जाता है। माना जाता है कि कठोपनिषद की रचना ईसापूर्व पच्चीसवी और तीसवी शताब्दी ईसापूर्व के बीच के कालखण्ड में हुई थी। पतंजलि का योगसूत्र योग का सबसे पूर्ण ग्रन्थ है। इसका रचनाकाल ईसा की प्रथम शताब्दी या उसके आसपास माना जाता है। हठ योग के ग्रन्थ 9 वीं से लेकर 11 वीं शताब्दी में रचे जाने लगे थे। इनका विकास तंत्र से हुआ।

पश्चिमी जगत में “योग” को हठयोग के आधुनिक रूप में लिया जाता है। जिसमें शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य तथा विश्रान्ति की तकनीकों की प्रधानता है। ये तकनीकें मुख्यतः आसनों पर आधारित हैं जबकि परम्परागत योग का केन्द्र बिन्दु ध्यान है और वह सांसारिक लगावों से छुटकारा दिलाने का प्रयास करता है। पश्चिमी जगत में आधुनिक योग का प्रचार-प्रसार भारत से उन देशों में गये गुरुओं ने किया जो प्रायः स्वामी विवेकानन्द की पश्चिमी जगत में प्रसिद्धि के बाद वहाँ गये थे।

11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस संकल्प का मसौदा प्रस्तुत किया गया। मसौदे को व्यापक समर्थन मिला जिसके अंतर्गत 177 देश इस मसौदे के प्रस्तावक बने जो संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतिहास में अभी तक हुए किसी भी संकल्प में सर्वाधिक प्रस्तावकों की संख्या है। भारत के इस प्रस्ताव को 90 दिन के अन्दर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, जो किसी प्रस्तावित दिवस को संयुक्त राष्ट्र संघ में पारित करने के लिए सबसे कम समय है। 27 सितम्बर 2014 को भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में विश्व समुदाय से एक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को अपनाने अपील की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि –

“योग भारत की प्राचीन परम्परा का एक अमूल्य उपहार है यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है; मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है; विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला तथा स्वास्थय और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है। यह केवल व्यायाम के बारे में नहीं है, लेकिन अपने भीतर एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है। हमारी बदलती जीवन-शैली में यह चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है। तो आयें एक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को अपनाने की दिशा में काम करते हैं।”

श्री नरेन्द्र मोदी, संयुक्त राष्ट्र महासभा

  11 दिसम्बर 2014 को अमेरिका में स्थित संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद सर्वप्रथम इसे 21 जून 2015 को पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (इंटरनेशनल डे ऑफ योगा) के नाम से मनाया गया। 21 जून 2015 को मनाये गये प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में 35 मिनट तक 21 योग आसन (योग मुद्राओं) का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर 192 देशों और 47 मुस्लिम देशों में योग दिवस का आयोजन किया गया। दिल्ली में राजपथ पर एक साथ 35985 लोगों ने योगाभ्यास किया। इसमें 84 देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इस अवसर पर भारत ने दो विश्व रिकॉर्ड बनाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा लिया है। पहला रिकॉर्ड एक जगह पर सबसे अधिक लोगों के एक साथ योग करने का बना, तो दूसरा एक साथ सबसे अधिक देशों के लोगों के योग करने का। इस रिकॉर्ड को आयुष मन्त्री श्रीपद नाइक ने स्वयं ग्रहण किया।

इस बार भी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को धूमधाम से मनाया जायेगा। इसकी राजस्थान सहित देशभर में तैयारियां जोर शोर से चल रही है। प्रदेश में प्रत्येक जिला एवं उपखण्ड सहित छोटी से छोटी इकाई पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जायेगा। आम जन में इस दिवस के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किये जा रहे है।

    आइये, हम सब मिलकर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को सफल बनाने के लिए अपनी सहभागिता दें। ताकि हम, हमारा समाज, हमारा प्रदेश, हमारा देश स्वस्थ एवं निरोगी रह सकें।

 

–श्रीमती संतोष शर्मा

 स्वतंत्र पत्रकार साकेत नगर

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