पद से बड़े कद के हैं गहलोत, मारवाड़ दौरे से फिर साबित

-राकेश दुबे

राजस्थान की राजनीति में अशोक गहलोत सदा सदा से लगातार मजबूत होते रहे हैं। आज भले ही वे मुख्यमंत्री नहीं है, लेकिन प्रदेश की राजनीति और जनता, दोनों में उनका प्रभाव आज भी उतना ही प्रासंगिक दिखाई देता है, जितना उनके मुख्यमंत्री रहते हुए था। हाल ही में जालोर, पाली, सिरोही और उदयपुर सहित मारवाड़ क्षेत्र के विभिन्न जिलों के उनके दौरे ने यह संदेश दिया है कि सत्ता से बाहर होने के बावजूद उनकी जनस्वीकार्यता में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई है। कांग्रेस संगठन भले ही वर्तमान में चुनौतियों का सामना कर रहा हो, लेकिन गहलोत के कार्यक्रमों में उमड़ी भीड़ और स्थानीय स्तर पर मिले स्वागत ने यह संकेत दिया कि वे आज भी राजस्थान कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली जननेताओं में शामिल हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का भी मानना है कि राजस्थान में कांग्रेस की संगठनात्मक ताकत और सामाजिक आधार को बनाए रखने में गहलोत की भूमिका अब भी केंद्रीय बनी हुई है।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में उदयपुर, सिरोही, जालोर, पाली और जोधपुर जिलों का एक विस्तृत दौरा किया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने सांगठनिक बैठकों में भाग लिया, कार्यकर्ताओं से मुलाकात की, रोड़ शो किया और व्यापक पैमाने पर लोगों से मुलाकातें कीं। उनके इस जदौरे को जबरदस्त प्रतिसाद मिला। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अशोक गहलोत की सबसे बड़ी ताकत उनकी जनसंपर्क शैली और सामाजिक समीकरणों पर पकड़ रही है। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार का कहना है कि गहलोत का अनुभव और उनकी राजनीतिक समझ उन्हें कांग्रेस के अन्य नेताओं से अलग पहचान देती है। परिहार का मानना है कि गहलोत ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में प्रशासनिक अनुभव, संगठनात्मक कौशल और व्यक्तिगत संबंधों के माध्यम से एक ऐसा राजनीतिक आधार तैयार किया है, जो केवल पद पर निर्भर नहीं है। यही वजह है कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर समय-समय पर बहस होने के बावजूद उनका प्रभाव बरकरार बना हुआ है।

यह भी तथ्य है कि कांग्रेस के भीतर पिछले कुछ वर्षों में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मतभेदों की चर्चा लगातार होती रही है। हालांकि इन परिस्थितियों के बावजूद गहलोत ने अपनी राजनीतिक सक्रियता में कोई कमी नहीं आने दी। हाल के महीनों में उनके कई स्पष्ट और बेबाक बयान राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बने हैं। वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार महावीर जैन कहते हैं कि राजस्थान में कांग्रेस की वर्तमान स्थिति भले ही अपेक्षित रूप से मजबूत नहीं कही जा सकती, लेकिन पार्टी के जनाधार को बनाए रखने और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने का काम अभी भी गहलोत प्रभावी ढंग से करते दिखाई देते हैं। जैन कहते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत का लगभग सभी जाति, समाज और वर्ग में प्रभाव है, उसका एक बहुत बड़ा तबका कांग्रेस के लिए उम्मीद है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री रहते हुए गहलोत जो योजनाएं लाएं थे, उनसका लाभार्थी वर्ग भी बहुत बड़ा है, जो उनके नेतृत्व में विश्वास करता है।

मारवाड़ दौरे के दौरान जिस प्रकार विभिन्न स्थानों पर गहलोत का स्वागत हुआ, उसने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है। संयोगवश उसी समय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी पाली और सिरोही क्षेत्र के दौरे पर थे, जिससे दोनों नेताओं के जनसंपर्क कार्यक्रमों की तुलना स्वाभाविक रूप से होने लगी। वरिष्ठ पत्रकार बालमुकुंद शर्मा कहते हैं कि गहलोत के कार्यक्रमों में जिस प्रकार का उत्साह और जनसहभागिता दिखाई दी, उसने यह स्पष्ट किया कि वे केवल कांग्रेस के नेता भर नहीं, बल्कि एक स्थापित जनाधार वाले राजनेता हैं। शर्मा बताते हैं कि तीन बार मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर जो नेटवर्क विकसित किया और ग्रामीण क्षेत्रों में जो व्यक्तिगत संपर्क बनाए, उसका लाभ उन्हें आज भी मिलता दिखाई देता है। यही कारण है कि सत्ता परिवर्तन के ढाई वर्ष बाद भी उनके प्रति लोगों का जुड़ाव कम नहीं हुआ है। राजस्थान की राजनीति में उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जो कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच निरंतर संवाद बनाए रखते हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री पद पर न रहते हुए भी उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।

मारवाड़ का हालिया दौरा वस्तुतः अशोक गहलोत के राजनीतिक कद के पुनः पुष्टि का अवसर बन गया। यह दौरा केवल जनसभाओं और स्वागत कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि राजस्थान की राजनीति में गहलोत अब भी एक केंद्रीय शक्ति हैं। राजनीति के जानकारों का निष्कर्ष है कि राज्य में कांग्रेस के भविष्य की किसी भी रणनीति में अशोक गहलोत की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार कहते हैं कि सत्ता से बाहर रहने के बावजूद यदि किसी नेता को लगातार व्यापक जनसमर्थन, कार्यकर्ताओं का उत्साह और राजनीतिक प्रासंगिकता प्राप्त हो रही है, तो वह उसके लंबे राजनीतिक निवेश और जनविश्वास का परिणाम होता है। मारवाड़ दौरे ने एक बार फिर साबित किया है कि अशोक गहलोत का राजनीतिक प्रभाव केवल पद तक सीमित नहीं है, बल्कि वह राजस्थान की राजनीति की स्थायी वास्तविकताओं में से एक बन चुका है।

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