भाजपा सरकार की नीतियों से छात्रों का भविष्य संकट में, शिक्षा महंगी और रोजगार दूर : नसीम अख्तर इंसाफ़

भीलवाड़ा। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष व  प्रभारी नसीम अख्तर इंसाफ़ ने केंद्र की भाजपा सरकार पर छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद कांग्रेस का उद्देश्य था कि हर वर्ग के बच्चे को शिक्षा मिले और आर्थिक अभाव किसी छात्र की पढ़ाई में बाधा न बने। इसी सोच के साथ शिक्षा के विस्तार और उसे सुलभ बनाने पर लगातार काम किया गया।
यह बात नगर निगम के टाउन हॉल में भीलवाड़ा शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नासिम अख्तर इंसाफ़ ने कही।
उन्होंने कहा कि आज हालात इसके विपरीत हैं। शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है, जिससे एक सामान्य परिवार को अपने बच्चों की पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद न तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी है और न ही रोजगार की। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक युवाओं की मेहनत और सपनों पर पानी फेर रहे हैं, लेकिन सरकार इस समस्या का स्थाई समाधान निकालने में विफल रही है।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लाखों विद्यार्थी आवेदन करते हैं और परीक्षा शुल्क के रूप में बड़ी राशि जमा होती है, लेकिन सफल होने वाले विद्यार्थियों की संख्या सीमित रहती है। ऐसे में सरकार को युवाओं की शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव सह प्रभारी कैलाश झालीवाल ने कहा कि देश का युवा आज शिक्षा, रोजगार और भविष्य की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। भाजपा सरकार को युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। कांग्रेस पार्टी छात्रों और युवाओं के हितों की लड़ाई लगातार लड़ती रहेगी तथा शिक्षा को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख बनाने की मांग करती रहेगी।
उन्होंने कहा कि देश के विकास का रास्ता शिक्षित और सक्षम युवाओं से होकर गुजरता है। यदि सरकार वास्तव में देश का भविष्य मजबूत करना चाहती है तो उसे शिक्षा और रोजगार को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
झालीवाल ने कहा कि जब शिक्षा, रोजगार और छात्रों के भविष्य को मजबूत करने के लिए संसाधनों की आवश्यकता है, तब केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर करों में कटौती कर राजस्व छोड़ने का निर्णय लेती है। कांग्रेस का सवाल है कि यदि सरकार विभिन्न क्षेत्रों को राहत देने के लिए हजारों करोड़ रुपये का राजस्व छोड़ सकती है, तो छात्रों की शिक्षा, छात्रवृत्ति, कौशल विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और रोजगार सृजन पर पर्याप्त निवेश क्यों नहीं किया जा रहा। सरकार को प्राथमिकता तय करनी होगी कि वह युवाओं के भविष्य को मजबूत बनाना चाहती है या केवल घोषणाओं तक सीमित रहना चाहती है।

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