प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर असमंजस बरकरार

*केकड़ी-राजस्थान*
राजस्थान में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष पद को लेकर अभी भी किसी एक नाम पर पार्टी निर्णय नहीं ले पाई है। तमाम कोशिशों के बाद भी अध्यक्ष पद को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इधर राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने पसंदीदा नेता को अध्यक्ष बनाने को लेकर अड़ी हुई है वहीं पार्टी आलाकमान किसी दमदार नेता को अध्यक्ष पद पर नियुक्त करने को आमादा हैं।
राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी को पद से इस्तीफा दिए 50 दिनों से भी ज्यादा हो गए मगर किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाई है। इस बीच राज्य के कई नेताओं के नाम सामने आए मगर किसी नाम पर वसुंधरा राजे राजी नहीं हुई तो किसी नाम पर आलाकमान अमित शाह राजी नहीं हो पाए। राज्य के भाजपा नेता गजेंद्र सिंह शेखावत, डॉ अरुण चतुर्वेदी, लक्ष्मी नारायण दवे, श्रीचंद कृपलानी, ओम बिड़ला, सुनील बंसल के नाम सामने आये लेकिन किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाई, यही वजह है कि राजस्थान में प्रदेशाध्यक्ष पद की नियुक्ति पर देरी हो रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इस बारे में पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर सहित पार्टी के कई दिग्गज नेताओं से राय शुमारी कर चुके हैं। आलाकमान राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अत्याधिक गम्भीर है इसी के मद्देनजर वे किसी भी प्रकार की रिस्क नहीं लेना चाहते जिसकी वजह से पार्टी में विवाद हो और विपक्ष को कोई मुद्दा मिले।
अजमेर व अलवर लोकसभा सहित मांडलगढ़ विधानसभा उप चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद से ही आलाकमान बहुत चिंतित है इसलिए वे हर कदम फूंक फूंक कर चल रहे हैं। वसुंधरा राजे चाहती हैं कि उनके पसंदीदा नेता अरुण चतुर्वेदी, श्रीचंद कृपलानी या लक्ष्मी नारायण दवे में से ही किसी एक को प्रदेशाध्यक्ष बनाया जाये वहीं आलकमान की पहली पसन्द केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत है वहीं आरएसएस द्वारा सुझाये गए सुनील बंसल के नाम पर भी पार्टी गहनता से विचार कर रही है।
अमित शाह चाहते हैं कि प्रदेशाध्यक्ष पद पर ऐसे शख्स की नियुक्ति की जाये जो हर तरह से सक्षम हो निराश पार्टी के कार्यकर्ताओं में फिर से उत्साह भर सके साथ ही पार्टी को मजबूती प्रदान कर सके वहीं वसुंधरा राजे की मंशा है कि उनके ऐसे किसी पसंदीदा नेता की ताजपोशी हो जो पार्टी को मजबूती देने के साथ साथ उनके इशारे पर पार्टी का काम करे।
उल्लेखनीय है कि आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेशाध्यक्ष की टिकट वितरण में अहम भूमिका रहने वाली है और वसुंधरा राजे नहीं चाहती कि उनके बिना इशारे टिकट वितरण हो हालांकि पार्टी इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती जिसके चलते इस बार पार्टी ने टिकट वितरण के लिए एक पांच जनों की कमेटी बनाने का निर्णय लिया है जिसमे वरिष्ठ भाजपा नेता ओमप्रकाश माथुर, भूपेंद्र सिंह यादव जैसे पांच नेताओ को शामिल किया जाएगा। पार्टी आलाकमान विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर किसी प्रकार की रिस्क लेना नहीं चाहता इसी के मद्देनजर पार्टी अलग अलग एजेंसियों से सर्वे करवा रही है। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह की सर्वे एजेंसियों ने जयपुर में अपना डेरा जमा लिया है अब वे शीघ्र ही सर्वे कार्य शुरू करेंगी। पार्टी द्वारा राज्य के मतदाताओं का भी मन टटोला जा रहा है। वहीं राज्य सरकार की नाकामियों के भी कारण ढूंढे जा रहे हैं। पार्टी सर्वे के आधार पर ही टिकट वितरण करने का निर्णय ले चुकी है। माना जा रहा है कि जिन विधायकों की उनके क्षेत्र में परफॉर्मेंस अच्छी नहीं उनका टिकट कटना निश्चित है। इससे वर्तमान विधायको सहित टिकट के दावेदारों की नींद उड़ा दी है।अब देखना ये है कि कितने वर्तमान विधायको के टिकट काटे जाएंगे और कितने नए चेहरे भा जपा द्वारा आगामी विधान सभा चुनावों में किस्मत आजमाने को उतारे जाएंगे।

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