कृपलानी तलाश रहे है एक सुरक्षित सीट

निंबाहेड़ा/ प्रदेश के स्वायत्त शासन मंत्री और राजस्थान की राजनीति मे मेवाड़ के दिग्गज नेता के रूप में पिछले दो वर्षों में तेजी से उभरे श्री चंद कृपलानी के लिए इस बार विधानसभा के चुनाव में उनके गृह क्षेत्र की विधानसभा सीट निंबाहेड़ा- छोटीसादड़ी क्षेत्र से विधानसभा में पहुंचने की राह आसान नहीं है ! भाजपा की राजनीति में श्री चंद कृपलानी एक बड़ा चेहरा बन कर उभरे हैं और कृपलानी की जनता के प्रति विकास और समस्याओं के समाधान की छवि को लेकर आम जनता में विश्वास और भरोसा भी पूरा रहा ! परंतु मंत्री बनने के बाद समय अभाव एवं अपने नीचे के जनप्रतिनिधियों पर भरोसा कर कृपलानी ने अपने राजनीतिक जीवन की एक बड़ी गलती की जिसका खामियाजा अब उन्हें विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है ! कृपलानी ने जिस तरीके से समय अभाव के कारण जनता द्वारा भारी मतों से नकारे गए एक जनप्रतिनिधि सहित कुछ चुनिंदा जनप्रतिनिधियों को ही पूरे क्षेत्र की कमान सौंपकर उन्हीं के भरोसे सारे कार्य करने का जो प्रयास किया उस कार्य को उन जनप्रतिनिधियों ने कई बार अपने राजनीतिक द्वेष एवं स्वार्थों के चलते होने जैसे कार्यों को भी नहीं करवा कर जनता में कृपलानी की छवि को खराब करने का प्रयास किया और उसमें काफी हद तक में सफल भी रहे ! ऐसे कई मौके स्वयं मंत्री कृपलानी के सामने भी आए जब इन बातों की प्रमाणिकता भी साबित हुई की उनके नीचे की टीम ने जनता के कार्यों को उस बखूबी तरीके से अंजाम नहीं दिया जिस तरीके से कार्यों को अंजाम दिया जाना चाहिए था ! लेकिन इन सब पर मंत्री कृपलानी की चुप्पी ने जनता में कई सवाल पैदा किए जिनका जवाब ना आज कृपलानी के पास है और ना ही उन नेताओं के पास है जिन्होंने कृपलानी को असफल करने के सारे प्रयास किए ! क्षेत्र से बिना जातिगत आधार के पिछले कई वर्षों से क्षेत्र की जनता की नुमाइंदगी कर रहे हैं श्रीचंद कृपलानी के लिए इस बार की राह अत्यंत कठिन नजर आ रही है ! विगत 2 वर्षों में उनके द्वारा कराए गए विकास कार्य एवं जनता के कार्यों के भरोसे कृपलानी को जीत का पूरा विश्वास है ! वही जनता में भाजपा नेताओं की कार्यशैली, बिगड़ती कानून-व्यवस्था, आम जनता में डर, विकास के नाम पर भ्रष्टाचार और चौथ वसूली तथा भाजपा के ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का अवैध रूप से किसानों से डोडा -चुरा के नाम पर वसूली क्षेत्र में प्रमुख रूप से कृपलानी एवं भाजपा के प्रति नाराजगी के मुख्य कारण हैं !
वर्ष 2013 में प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के पश्चात राजनीति में लगभग 3 वर्ष तक उपेक्षित रहे विधायक श्रीचंद कृपलानी को प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा अल्प समय के लिए दी गई जिम्मेदारी को जिस बखूबी से कृपलानी ने निभाया है वह अपने आप में एक मिसाल है ! राजस्थान की राजनीति में कृपलानी का विगत 25 वर्षों से एक महत्वपूर्ण स्थान है ! इसके बावजूद भी कृपलानी को राजनीति में स्थापित होने के लिए समय-समय पर संघर्ष का सामना करना पड़ा है और इसी का परिणाम है कि 2013 में वरिष्ठ और अनुभवी होने के बावजूद भी कृपलानी को प्रारंभ से मंत्री पद की जिम्मेदारी नहीं दी गई ! इसी के चलते राजनीति में एक दौर ऐसा भी आया कि जब कृपलानी ने राजस्थान के तत्कालीन चिकित्सा मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ एवं सार्वजनिक निर्माण मंत्री यूनुस खान की निंबाहेड़ा में आयोजित सभाओं के साथ-साथ निंबाहेड़ा छोटी सादड़ी क्षेत्र में आयोजित कई कार्यक्रमों में सार्वजनिक रूप से यह घोषणा भी कर दी कि वह भविष्य में अब कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे ! परंतु वक्त ने करवट ली और 2 वर्ष पूर्व प्रदेश की मुखिया ने राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालय कृपलानी को सौंपा और कृपलानी ने बिना पीछे देखे इन 2 वर्षों में ऐतिहासिक और रिकॉर्ड तोड़ विकास कार्य को अंजाम देने का प्रयास किया ! ऐसा नहीं है कि राजनीति में कृपलानी कोई नए खिलाड़ी हैं जो इन जनप्रतिनिधियों की सच्चाई को नहीं जानते हैं लेकिन राजनीतिक मजबूरी और कृपलानी की चित परिचित राजनीतिक कार्य शैली के चलते इन जनप्रतिनिधियों ने कृपलानी के इर्द-गिर्द पिछले 2 वर्ष में ऐसा जाल बुन रखा था कि किसी दिनकोई भी आम आदमी या इन जनप्रतिनिधियों का विरोधी और इन जनप्रतिनिधियों की गलत कार्य शैली की पोल खोलने वाला व्यक्ति उनसे कहीं अकेले में ना मिले और उनके गलत क्रियाकलापों का भंडाफोड़ कर दे ! अलबत्ता इन नेताओं ने कृपलानी को आधारहीन चापलूस लोगों की एक टीम और सौप दी जिन्होंने कृपलानी को चरण स्पर्श से लेकर तारीफों तक के पुल बांधने में कोई कसर नहीं छोड़ी और इस चापलूस चांडाल चौकड़ी ने अपने आर्थिक उद्देश्यों की पूर्ति भी कृपलानी के नाम से करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है ! इन चापलूसी और सलाहकारों में लगभग सारे नाम ऐसे हैं कि इनमें से यदि कोई व्यक्ति एक वार्ड का चुनाव भी लड़ ले तो शायद उनकी जमानत भी नहीं बचे ! लेकिन इन नेताओं ने बड़े ही षड्यंत्र पूर्वक तरीके से कृपलानी को घेरकर उनके आसपास का मायाजाल इतना बड़ा बना दिया कि कृपलानी को वास्तविक सच्चाई का पता तक नहीं लग पा रहा है ! हां इतना अवश्य रहा कि इस पूरे कार्यकाल के दौरान भाजपा के निर्वाचित जनप्रतिनिधि कथित डोडा -चुरा के व्यापारी बनकर अपनी जेबे भरने में लगे रहे और जिम्मेदार पदों पर बिठाए गए जनप्रतिनिधि पार्टी फंड के नाम पर अधिकारियों से लेकर ठेकेदारों तक लूट में लग गये और यह लूट और व्यापार आज भी बदस्तूर जारी रखे हुए है ! भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी का आलम तो यह है कि स्वायत्त शासन मंत्री से संबंधित विभाग में ही चटकारे लेकर भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी की चर्चाएं कर्मचारी से लेकर ठेकेदार तक और चौराहों से लेकर आमजन तक में सार्वजनिक हो चुकी है उसके बावजूद भी इन सब चीजों पर लगाम नहीं लगा ना कहीं ना कहीं कृपलानी की राजनीतिक मजबूरी को साबित करती है ! निंबाहेड़ा छोटीसादड़ी विधानसभा क्षेत्र में हाल ही में कृपलानी के विश्वास तो ने भी एक सर्वे करवाया है जिसमें अत्यंत चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं कुछ जातिगत आधार पर कराए गए सर्वे में भारतीय जनता पार्टी और कृपलानी को भारी नुकसान के संकेत मिलने के बाद से कृपलानी के शुभचिंतक बड़े पशोपेश में है और येन- केन तरीके से क्षेत्र की स्थिति में सुधार को लेकर कृपलानी से संपर्क में है !
इन सब प्रयासों के बीच कृपलानी भी लगातार अपने लिए एक सुरक्षित सीट की तलाश में पिछले 6 माह से जुटे हुए हैं और कृपलानी ने जयपुर जिले की सांगानेर ,अजमेर जिले की अजमेर उत्तर एवं कोटा जिले की कोटा दक्षिण क्षेत्र सीट जो भारतीय जनता पार्टी की सुरक्षित सीटें है उन पर अपना दाव खेलना शुरू कर दिया है !
इस समय परिस्थितियों के हिसाब से निंबाहेड़ा छोटी सादड़ी विधानसभा क्षेत्र कृपलानी के लिए इसलिए भी सुरक्षित नहीं है की 2013 में केंद्र में प्रधानमंत्री के दावेदार नरेंद्र मोदी की लहर जितनी उफान पर थी उस उफान के दौर में भी कृपलानी मात्र लगभग साढे तीन हजार वोटों से चुनाव जीते थे तो आज की परिस्थिति में एंटी इनकंबेंसी के साथ साथ स्थानीय नेताओं के प्रति नाराजगी एवं प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रति नाराजगी का भी परिणाम कृपलानी को भुगतना पड़ सकता है ! भारतीय जनता पार्टी के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि कृपलानी की नजर जयपुर जिले की सांगानेर विधानसभा सीट पर है परंतु वर्तमान राजनीतिक समीकरण के हिसाब से अब यह सीट कितनी सुरक्षित नहीं है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी से बगावत कर बागी हुए भाजपा के ब्राह्मण नेता घनश्याम तिवारी उनकी राह में सबसे बड़ा अरोड़ा साबित हो सकते हैं ! वहीं कांग्रेस के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि इस बार सांगानेर सीट पर कांग्रेस भी मजबूत प्रत्याशी के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत को चुनाव लड़ा सकती है और यदि ऐसा होता है तो यह सीट जितनी आसान कृपलानी मान रहे हैं उतनी आसान नहीं होगी ! इतना अवश्य है कि इस सीट पर कृपलानी की जाति के जातिगत मतदाता बड़ी संख्या में है ! वहीं कृपलानी की नजर अजमेर जिले की अजमेर उत्तर सीट पर भी है जो भाजपा के लिए अब तक की सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती है और इस सीट पर भी कृपलानी की जाति के जातिगत मतदाता बड़ी संख्या में हैं ! अजमेर उत्तर से वर्तमान में शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी विधायक हैं और वह इस सीट से भाजपा का प्रतिनिधित्व पिछले कई वर्षों से करते चले आ रहे हैं ! वासुदेव देवनानी को इस सीट पर हमेशा विजय बनाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) का बहुत बड़ा योगदान रहता है ! इस सीट पर बूथ वाइज अजमेर से लेकर चुनाव संचालन तक आर एस एस के हाथ में ही रहता है और इसी का परिणाम है कि कितनी भी विपरीत परिस्थिति रही हो इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा विजय प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की है ! इस सीट पर वासुदेव देवनानी की कार्यशैली को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता से लेकर आर एस के वर्तमान में नाराजगी स्पष्ट रुप से दिखाई दे रही है इसी नाराजगी को दूर करने के लिए भारतीय जनता पार्टी के पास सिंधी समाज के चेहरे के रूप में एक दिग्गज नेता श्रीचंद कृपलानी हो सकते हैं ! कृपलानी के लिए अजमेर क्षेत्र नया इसलिए भी नहीं है क्योंकि अजमेर में उनका ससुराल भी है और अजमेर क्षेत्र में उनका आना जाना लगा रहता है ! वहीं दूसरी ओर इस सीट का संचालन करने वाले प्रमुख संगठन आर एस एस में भी उनके मजबूत संपर्क और रिश्ते हैं ! इसलिए इस सीट पर कृपलानी कोई यदि भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी के रूप में चुनती है तो कोई आश्चर्य वाली बात नहीं होगी ! कृपलानी और आर एस एस के रिश्ते इसलिए भी पिछले 2 वर्षों में मजबूत हुए हैं कि सेवा भारती और विद्या निकेतन जैसे आर एस एस के संगठनों को कृपलानी ने स्वायत्त शासन मंत्री के रूप में पूरे राजस्थान में कई जगह जमीन आवंटित की और प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ लोगों के बीच में चल रहे मनमुटाव को दूर करने में कृपलानी ने अपनी अहम भूमिका निभाई इसलिए कृपलानी को आर एस एस का समर्थन आसानी से मिल सकता है ! कृपलानी की नजर तीसरी सीट कोटा जिले की कोटा दक्षिण विधानसभा सीट है ! यह क्षेत्र ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है और वर्तमान में यहां से संदीप शर्मा भारतीय जनता पार्टी के विधायक के रूप में कार्यरत हैं ! कोटा क्षेत्र से कृपलानी का पुराना जुड़ा और लगाव है ! कृपलानी जब सांसद थे तब कोटा क्षेत्र के रामगंजमंडी ,लाडपुरा एवं कोटा विज्ञान नगर का इलाका उनके संसदीय क्षेत्र में आता था और पिछले 20 वर्षों से वे कोटा में भाजपा के कार्यकर्ताओं और नेताओं से सतत संपर्क में हैं ! वहीं कोटा दक्षिण विधान सभा सीट पर कोटा से वर्तमान में सांसद ओम बिरला का पूरा प्रभाव है ओम बिरला बहुत अच्छे मित्रों में शुमार है इसलिए भी कृपलानी को इस क्षेत्र से यदि भारतीय जनता पार्टी टिकट देती है तो जीत के लिए ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा ! इसके अलावा भी यदि राजनीतिक मजबूरी के चलते कृपलानी को अपने जिले या मेवाड़ संभाग में से ही चुनाव लड़ना पड़े तो उसके लिए भी कृपलानी ने मेवाड़ संभाग की उदयपुर शहर सीट, चित्तौड़ जिले की बड़ी सादड़ी एवं बेगू विधानसभा सीट को भी चिन्हित कर रखा है ! राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कृपलानी ने विधानसभा चुनाव के अलावा आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भी अपनी नजर सांसद की सीट पर भी गड़ा रखी है !
*जहां तक कृपलानी की राजनीतिक बॉडी लैंग्वेज का सवाल है तो पिछले 25 वर्षों से मैं कृपलानी को पत्रकारिता के क्षेत्र में कवर कर रहा हूं और व्यक्तिगत रूप से उनकी कार्यशैली को जानता हूं उस अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि आज की कृपलानी की बॉडी लैंग्वेज यह कतई संकेत नहीं देती है कि वह निंबाहेड़ा- छोटीसादड़ी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे ! लेकिन यहां यह कहना भी अतिश्योक्ति नहीं होगा कि कृपलानी की राजनीतिक सूझबूझ को आज तक कोई नहीं समझ पाया है ! क्योंकि राजनीति के वह खिलाड़ी है जो सीधे हाथ से काम करते हैं उस काम की खबर वह उल्टे हाथ को भी नहीं लगने देते हैं राजनीति में कृपलानी का यही प्लस प्वाइंट है कि वह अंतिम समय तक अपने पत्ते नहीं खोलते हैं !*
बहरहाल राजनीतिक पशोपेश के बीच उलझे कृपलानी इस बार इस उलझन को कैसे सुलझाते हैं और किस राजनीतिक चतुराई से वह फैसला लेते हैं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा !

संतोष जैन- राजस्थान किरण

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