बुंदेलखंड के कर्म योगी संतोष गंगेले 11 दिसंबर को 62 वर्ष पूर्ण करेंगे

संतोष गंगेले
संतोष गंगेले
छतरपुर- बुंदेलखंड की हृदयस्थली छतरपुर जिला का कस्बा नौगांव माना जाता है नौगांव नगर प्राकृतिक जलवायु एवं शहरीकरण आवागमन के क्षेत्र में यहां की चौराहों की चर्चा पूरे प्रदेश और देश में होती है नौगांव नगर इसलिए भी हिंदुस्तान के नक्शे में आ गया है यहां से 6 किलोमीटर दूर महाराजा छतसाल का महल टूरिस्ट के लिहाज से पर्यटन स्थल मंदिर रियासतों का होने के कारण एक धार्मिक स्थान भी बनकर उभरा है बुंदेलखंड के लोकगीत सम्राट पंडित देशराज पटेरिया जी नौगांव के करीब तिदनी गांव में जन्मे हैं उनका अपना एक नाम है इसी प्रकार से नौगांव से उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती धौर्रा मंदिर से लगा छोटा सा ग्राम वीरपुरा बसा हुआ है इस ग्राम में 11 दिसंबर 1956 को एक सामान्य जो दिया किसान परिवार में जिस युवक का जन्म श्रीमती सुमित्रा देवी गंगेले की कोख से हुआ उसका नाम संस्कार संतोष गंगेले दिया गया संतोष गंगेले ने परिवार की विषम परिस्थितियों एवं कठिनाइयों में अपना बचपन का जीवन व्यतीत किया लेकिन मां के प्यार स्नेह और आशीर्वाद के साथ शिक्षा का ध्यान दिया गया जिस कारण से इस युवक ने ग्राम वीरपुरा कस्बा नौगांव के नाम को बुंदेलखंड की आम जनता तक अपनी कथनी और करनी के माध्यम से पहुंचा दिया .नगर ,जिला ,संभाग प्रदेश और देश में उनको अनेक सामाजिक सम्मान से सम्मानित किया जा चूका है।
बुंदेलखंड के समाजसेवी संतोष गंगेले बचपन से ही संघर्ष ही एवं सामाजिक कार्यों में सहभागिता बनाए रखने के कारण उन्हें समाजसेवी के नाम से लोग जानने लगे उनके पिता इस क्षेत्र के एक पहुंचे हुए संत हरिहर बाबा के नाम से जाने जाते थे जिन्हें श्रीरामचरितमानस कंठस्थ याद थी तथा छोटे मोटे लोग बीमारियों को झाड़-फूंक के द्वारा ठीक कर देते थे जिस कारण से लोगों ने हरिहर बाबा की ख्याति देकर मान सम्मान संपत्ति दिया करते थे किसी तरह परिवार का संचालन करते हुए संतोष गंगेले ने अपना शिक्षा का मार्ग एवं अपने भाइयों बहनों का शिक्षा का मार्ग तय किया वर्ष 1980 से साहित्य एवं पत्रकारिता में रुचि रखने के कारण छतरपुर से प्रकाशित दैनिक एक अखबार में संवाददाता के रूप में काम किया अल्प समय में ही उन्हें जिला सहित संभाग और प्रदेश में अनेक समाचार पत्रों में लिखने और समाचार देने का अवसर मिला पत्रकारिता की मर्यादा को ध्यान में रखकर पत्रकारिता करने वाले संतोष गंगेले ने अपने 37 वर्षों के अनुभव जन जन तक पहुंचाने का पूरा प्रयास किया क्षेत्र में लोकप्रिय और पहचान बनाने वाले संतोष गंगेले ने नौगांव तहसील में लेखक के रूप में काम किया जिससे उन्हें आमजन के प्यार ने रोजगार दिया आज उनके पास शून्य से शिखर तक की यात्रा का अनुभव है वही गरीबी किसान का दर्द मजदूर का दर्द सूखी रोटी रोटी का अनुभव पूर्ण रुप से प्राप्त है क्योंकि पारिवारिक व आर्थिक संकट के चलते उन्होंने जहां दिल्ली में मजदूर के रूप में कार्य किया वहीं नौगांव में अनेक वर्षों से चाय की दुकान चलाकर परिवार का भरण पोषण किया 2 वर्षों तक एमईएस आर्मी का नौगांव मैं चौकीदार के रूप में भी अपनी सेवा दी हैं बचपन से समय के महत्व को समझते हुए उन्होंने संघर्षपूर्ण जीवन व्यतीत किया देश की आजादी में भाग लेने वाले अनेक स्वाधीनता संग्राम सेनानियों की सेवा करने का उन्हें अवसर प्रदान हुआ संतोष गंगेले के गुरु स्वर्गीय केशव दास जी ब्रह्मचारी जालौन उरई ने उन्हें गुरु संदेश देते सत्य धर्म और ईमानदारी से कार्य करने रास्ता दिखाया साथी कर्म योगी जीवन जीने के लिए कर्मयोगी की उपाधि दे दी थी
गुरु जी ने कहा कि बेटे भविष्य में तुम अपना कर्म परोपकार के लिए करोगे सत्य के मार्ग पर चलकर यह जीवन जिओगे सुख दुख सफलता विफलता सिद्धि असिद्धि धन लाभ हानि यह मोह त्याग कर परिवारिक जीवन में रहते हुए नियम संयम से चलकर समाज को दिशा देना इसी कारण संतोष गंगेले ने अपने नाम के आगे कर्मयोगी लिखकर उसके पालन करने का प्रयास किया है संतोष गंगेले कर्म योगी अब ऐसा नाम हो गया है बच्चे जवान बूढ़ों के मुंह पर पल में बोलने वाला नाम है संतोष गंगेले हमेशा परहित सरस धर्म को जीवन में लेकर लगातार प्रयासरत है विगत तीन दशक पहले से भारतीय संस्कृति नैतिक शिक्षा को अपना संकल्प पत्र मानकर सामाजिक कार्यों में लगे रहते हैं इसी कारण हैं सोशल मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट मीडिया के साथ साथ Google सर्च इंजन में भी स्थान मिल गया है उनकी जीवन शैली उनकी वाणी का प्रेम व्यक्ति को निकटता ले आने में हमेशा पा सकता है मेहनतकश कार्य करने के कारण उनको धन दौलत यश कीर्ति मान सम्मान प्रतिष्ठा ईश्वर ने कहीं कमी नहीं छोड़ी है लेकिन अभी तक वह अपना रास्ता विसंगतियां दुर्जनों के बीच से बचकर निकले हैं इसी कारण आज वह है चाचा नेहरू की तरह स्कूल कॉलेज के बच्चों को बौद्धिक ज्ञान जीवन जीने की कला अपने अनुभव से बांटकर बच्चों में सुख शांति समृद्धि और ऊर्जा प्रदान करने में लगे हुए हैं लगातार सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले समाजसेवी संतोष गंगेले 11 दिसंबर 2017 को 62 वर्ष पूर्ण कर लेंगे इस 62 वर्ष मैं बचपन के 6 वर्ष निकाल कर 56 वर्ष का अनुभव वह समाज के व्यक्ति हैं उनका हमेशा कहना है व्यक्ति यदि अपने मन विचार कर्म से स्वच्छ सुंदर रहे किसी का प्रभाव व्यक्ति पर नहीं पड़ता है जिस प्रकार कमल का पौधा पानी में रहते हुए भी उसके पत्ते पर कभी पानी नहीं ठहरता है वह हमेशा चुंबकीय तत्वों का उदाहरण देकर अच्छाइयां ग्रहण करने बच्चों को सलाह देते हैं संतोष गंगेले कर्मयोगी ने हमेशा समाज जोड़ने परिवार को बिखरने से बचाने का प्रयास किया है इसी कारण उनके इस प्रकार से कोई ईर्ष्या या बुराई रखने वाले हकीकत कोई व्यक्ति नहीं है व्यापारिक या परिवार छोटी मोटी बुराइयां को छोड़कर उन्होंने अपना जीवन एक सामान्य व्यक्ति की तरह निकाला है वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए संतोष गंगेले कर्मयोगी उदाहरण और नजीर बनकर निकले हैं इसलिए वर्तमान युवाओं को उनके विचारों कर्मों और नियम संयम को पढ़ कर समझ कर अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए यही भारतीय संस्कृति बचाने का एक उत्तम तरीका होगा

1 thought on “बुंदेलखंड के कर्म योगी संतोष गंगेले 11 दिसंबर को 62 वर्ष पूर्ण करेंगे”

  1. परम सम्मानित श्री तेजवानी गिरधर जी ,राष्ट्रिय पत्रकार , अजमेर ,आपका स्नेह और प्यार से मुझे आज आमजन से जुड़ने का अवसर मिला। आपने मुझे अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक भी किया. आपका मार्ग दर्शन मेरे लिए अमूल्य प्रेरणा है। आभारी हूँ।

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