डब्ल्यूयूडी ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में देशज पीपीई किट डिज़ाइन की

नयी दिल्ली, अप्रैल 2020- कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई के बीच भारत के शीर्ष डिजाइन एवं प्रौद्योगिकी संस्थान- वर्ल्ड युनिवर्सिटी ऑफ डिजाइन, आईआईटी दिल्ली और एम्स से प्रोफेसरों और अनुसंधानकर्ताओं की समर्पित टीम, कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में अग्रणी पंक्ति में काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों के लिए देशज पीपीई किट्स डिजाइन एवं विकसित कर पीपीई की कमी दूर कर रही है।
डॉक्टरों और अग्रणी पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों के लिए पीपीई की कमी के बीच डब्ल्यूयूडी की एक टीम हमारे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए स्तरीय पीपीई की डिजाइन कर उसका उत्पादन करने के लिए आईआईटी दिल्ली, एम्स और चेन्नई स्थित लॉयल टेक्सटाइल मिल्स के साथ मिलकर काम कर रही है। ये संस्थान न केवल कम लागत में विकास के लिए बल्कि पीपीई किट्स की आसान उपलब्धता के लिए अपनी अपनी विशेषज्ञता का योगदान कर रहे हैं।
वर्ल्ड युनिवर्सिटी ऑफ डिजाइन के कुलपति डॉक्टर संजय गुप्ता का कहना है, पीपीई किट की कमी पूरी करने में योगदान करने वाले हर किसी के साथ इस संपूर्ण पीपीई का ढांचा साझा करते हुए हमें बेहद खुशी है। इन किट्स की डिजाइन एवं उत्पादन का स्रोत पूरी तरह से मुक्त है, इसलिए हमसे यह डिजाइन लेने की इच्छुक किसी भी छोटी या मध्यम आकार वाली फैक्टरी के लिए इसका उत्पादन शुरू करना आसान है। इस डिजाइन की खूबी इसे उतारना है जहां वस्त्र को बाहरी संक्रमित सतह को छुए बगैर व्यक्ति द्वारा उतारा जा सकता है। आवश्यक प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इन किट्स का प्रोटोटाइप तैयार किया गया है और चेन्नई के एक अस्पताल में यह जांच के दूसरे चरण से गुज़र रहा है।
डब्ल्यूयूडी से अनुसंधानकर्ताओं की एक टीम ने बिना किसी की मदद के इन पीपीई को पहनने और उतारने में आसानी हो, यह ध्यान में रखते हुए इन्हें डिजाइन किया है। ये इस तरह से डिजाइन किए गए हैं जिससे भारतीय व्यक्तियों के शरीर के आकार में यह फिट बैठे। इनमें संक्रमित सतह से संपर्क में आ सकने वाले ढीले और लटकते हिस्सों से बचने में मदद मिलती है। ये सख्त तकनीकी जरूरतों के साथ उच्च स्तर की सुरक्षा उपलब्ध कराएंगे। इनमें कोई अनावश्यक खुला स्थान नहीं है जिससे किसी संक्रामक रोग को भीतर घुसने में मदद मिल सके और व्यक्ति संक्रमित हो। यहां तक कि कपड़े की सिलाई करते समय सूक्ष्म छिद्रों को भी बंद कर दिया गया है जिससे कि वायरस किसी भी तरह से शरीर में प्रवेश न कर सके। इसकी डिजाइन में कम से कम जोड़ सुनिश्चित किया गया है जिससे न केवल जोड़ के लीकेज होने का जोखिम कम से कम है, बल्कि इसका किफायती उत्पादन तेजी से किया जा सकता है। इन पीपीई को बनाने में खास तरह के बैरियर फैब्रिक्स का उपयोग किया गया है जो सांस लेने में सहायक होने के साथ ही उच्चतम स्तर का लिक्विड बैरियर सुरक्षा उपलब्ध कराते हैं। इन सभी के मेल से यह आदर्श पीपीई किट है जिसे कोविड-19 द्वारा दी गई चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है।
डॉक्टर गुप्ता ने कहा, जब एक संक्रामक पैथोजन से एक समुदाय को खतरा उत्पन्न होता है तो यह खतरा दूर करने के लिए स्वास्थ्यकर्मी सबसे पहले आगे आते हैं। वास्तव में अक्सर वहीं सबसे पहले संक्रमित होते हैं। आज भारत के अस्पतालों को तेजी से बढ़ रहे कोविड-19 मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधनों की जरूरत है। हालांकि, पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट) किट्स के मांग-आपूर्ति अनुपात में असंतुलन चिंता का विषय है।
वर्ल्ड युनिवर्सिटी ऑफ डिजाइन और आईआईटी दिल्ली विभिन्न चिकित्सा उपयोगों के लिए फंक्शनल क्लॉदिंग के अनुसंधान, विकास और संवर्धन पर मिलकर काम करते रहे हैं।

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