जहां-तहां से पकड़ा और बना दिया मुल्जिम

इंडिया गेट पर हुए पथराव के मामले में दिल्ली पुलिस ने किस कदर अपनी खुन्नस आम लोगों पर निकाली, इसका अंदाजा पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत पर रिहा हुए युवकों की बातों से लगाया जा सकता है। पुलिस किसी को भी मौके से नहीं पकड़ पाई। सिपाही सुभाष चंद तोमर के घायल होने के बाद षड्यंत्र के तहत जहां भी कोई युवक मिला, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया गया। यही नहीं पकड़े गए आठ युवकों को सिपाही को चोट पहुंचाने व हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। किंतु जिस तरीके से उन्हें पकड़ा गया, घटना के अगले ही दिन हत्या के प्रयास की धारा लगे होने के बावजूद अदालत ने सभी को जमानत पर छोड़ दिया। यह मामला दिल्ली पुलिस के साख पर बट्टा लगाने के लिए काफी है।

इस घटना से यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या पुलिस ने आनन-फानन में कार्रवाई कर युवकों को झूठा फंसाने की कोशिश की थी? पुलिस की कारगुजारी की पोल कोर्ट से जमानत पाए युवक भी खोल रहे हैं। बुद्ध विहार निवासी अमित जोशी व उनके चचेरे भाई कैलाश जोशी नोएडा स्थित एक आइटी कंपनी में काम करते हैं। सोमवार को उन्हें अपने गृह जनपद जाना था। इसलिए वे रविवार को खरीदारी कर रहे थे। अमित जोशी ने तीसरे पहर रोहिणी के एक मोबाइल स्टोर से मोबाइल खरीदा। इसके बाद चार बजे वे दूसरी चीजों की खरीदारी के लिए रिठाला से मेट्रो से राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के लिए रवाना हुए। अमित का कहना है कि राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पहुंचने पर उन्हें पता चला कि प्रदर्शन की वजह से कनाट प्लेस के रास्ते बंद हैं। नतीजन वे पैदल भगवान दास रोड से कनाट प्लेस जा रहे थे।

कैलाश ने बताया कि तभी करीब दो दर्जन पुलिसकर्मियों ने उन्हें पकड़ गाड़ी में बिठा लिया तथा थाने लेकर चले गए। बाद में पता चला कि उन पर दंगा भड़काने और सिपाही की हत्या का प्रयास सहित अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जिससे वे सन्न रह गए।

इस मामले में पकड़े गए नफीस अहमद वह अभागा आरोपी है, जिसे अभी तक कोई जमानती ही नहीं मिल पाया है। नतीजतन जमानती पेश करने के लिए अदालत ने उसे दो दिन का अतिरिक्त समय दिया है। इंद्रपुरी निवासी नफीस राजा गार्डन में स्कूटर रिपेयरिंग का काम करता है। नफीस का कहना है कि युवती के साथ जिस तरह से दुष्कर्म किया गया, वह काफी दर्दनाक है। इसके विरोध में वह गत रविवार को नार्थ ब्लॉक पर प्रदर्शन के लिए पहुंचा था। बैरीकेड के पास वह दूसरी तरफ खड़े पुलिस अधिकारियों से कार्रवाई के संबंध में पूछ रहा था। तभी वहां सादी वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ गाड़ी में बिठा लिया।

नफीस के मुताबिक वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर का रहने वाला है। उसके पिता ड्राइवर हैं तथा परिवार की स्थिति काफी दयनीय है। अदालत में जमानती बनने के लिए उसने अपने कुछ जानकारों को कहा था। लेकिन वे जमानत के लिए 10 हजार रुपये नहीं जुटा पाए। इसकी जानकारी के बाद अदालत ने उन्हें दो दिन का अतिरिक्त समय दिया है।

इसी प्रकार अन्य आरोपी चमन को हैदराबाद हाउस के बाहर से, शांतनु को बाराखंभा रोड से तथा शंकर वशिष्ठ, आदित्य व नंद कुमार को भी पुलिस ने अलग-अलग जगहों से उठाया था।

अमित व कैलाश जोशी ने अपने अधिवक्ता सोमनाथ भारती के माध्यम से पटियाला हाउस कोर्ट के महानगर दंडाधिकारी नवीता कुमार बग्गा के समक्ष कहा कि उनका प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है। रविवार को वे खरीदारी के लिए कनाट प्लेस आए थे। उन्होंने अदालत को एक मोबाइल स्टोर का बिल दिखाते हुए कहा कि रविवार को उन्होंने एक मोबाइल फोन भी खरीदा था। यह उसी का बिल है। उन्हें पुलिस ने इंडिया गेट से नहीं बल्कि भगवान दास रोड पर से उस समय गिरफ्तार किया जब वे मेट्रो स्टेशन से निकले थे। उनके आने का रिकार्ड मेट्रो स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज से मिल सकता है। जिसपर अदालत ने डीएमआरसी को निर्देश जारी किया की वे युवकों के सीसीटीवी फुटेज अदालत को सौंपे।

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