बस यही कामना, बेटी हो जाए ठीक

अंतिम 10 दिन जिंदगी का सबसे कठिन दौर रहा। रातों में आंखों से नींद गायब तो पूरे दिन मन में यह बेचैनी रही कि दिन कैसा गुजरेगा। हर वक्त सोचता रहा व ईश्वर से यही कामना करता रहा कि मेरी बेटी ठीक हो जाए।

मंगलवार रात तबीयत बिगड़ने पर पूरी रात उसके पास जगकर गुजारी। बुधवार को पूरा दिन पासपोर्ट व वीजा बनाने के लिए भाग-दौड़ में गुजरा। यह दर्द है सामूहिक दुष्कर्म पीड़ित फिजियोथेरेपिस्ट के पिता की।

पीड़ित के पिता ने सिंगापुर जाने से पहले दैनिक जागरण संवाददाता से रात 11:07 मिनट पर फोन पर बातचीत की। तब वह एंबुलेंस में बैठे थे और एयरपोर्ट पहुंचने वाले थे। उन्होंने कहा कि यहां के डाक्टरों ने जवाब दे दिया है। उन्होंने बताया कि सिंगापुर में अच्छा इलाज हो सकता है। इसलिए उसे लेकर भारत से बाहर जा रहे हैं। यह पूछने पर कि कहां जा रहे हैं तो उन्होंने बताया कि सिंगापुर जा रहे हैं।

माता-पिता के साथ तीन घंटे बैठक

पीड़ित के माता-पिता से सफदरजंग अस्पताल के डाक्टरों व पुलिस अधिकारियों ने करीब तीन घंटे तक प्रशासनिक ब्लॉक में बैठक की। डाक्टरों ने उन्हें यह समझाने का प्रयास किया कि सिंगापुर में बेहतर इलाज मिल पाएगा। रात करीब आठ बजे पीड़ित के माता-पिता व भाई को पिछले दरवाजे से बाहर ले जाया गया।

लोगों ने मांगी दुआएं

पीड़िता के लिए देशभर में दुआओं का सिलसिला जारी है। बुधवार को भी भारी संख्या में युवक, युवतियां व अन्य लोग अस्पताल पहुंचे। इमरजेंसी गेट पर लोगों ने पीड़िता के स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना की। दस दिन तक पूरे देश की नजरें सफदरजंग अस्पताल पर लगी रहीं। वहां पीड़ित जिंदगी व मौत से जूझती रही।

पीड़िता के लिए बच्चों ने मांगी दुआएं

सामूहिक दुष्कर्म पीड़ित फिजियोथेरेपिस्ट की सलामती की दुआएं मांगते हुए हीरा पब्लिक स्कूल, समालका के छात्र-छात्राओं ने अपने विद्यालय के बाहर मार्च निकाला। बच्चों ने पीड़िता के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना की। साथ ही इस घटना के बाद हुई हिंसा में मारे गए हेड कांस्टेबल सुभाष तोमर की आत्मा की शांति की कामना की।

स्कूल के चेयरमैन पवन वत्स ने इस मौके पर कहा कि उस लड़की के साथ जो भी हुआ है, वह बहुत निंदनीय है और सरकार को आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए।

काले रंग से चित्रों से विरोध प्रदर्शन

दिल्ली में चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म मामले को लेकर हफ्ते भर से प्रदर्शन हो रहा है। बुधवार को भी लोग जंतर-मंतर पर जुटे और पुलिस विरोधी नारे लगाए। लोग भले ही कम हों, लेकिन उनका गुस्सा कम नहीं हो रहा था। पुलिस की राजनीति और सरकार की असंवेदनशीलता पर सवाल उठाते हुए यहां बैठे प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर स्कूल व कॉलेज के छात्र-छात्राएं शामिल थे। सुबह से मौन प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बाद में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए नारेबाजी भी की। वहीं पीड़ित के साथ हुए घृणित अपराध के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार करते हुए कई कलाकारों ने भी प्रदर्शन किया। इनमें इंडिया गेट पर फांसी पर लटके अपराधी, पक्षी बनी जनता और मगरमच्छ बने अपराधी, अधिकारी, नेता व पुलिस से घिरी महिला जैसे चित्रों के माध्यम से करीब 24 चित्रकारों ने अपनी मांगें रखीं। वहीं इस मौके पर कई कलाकारों ने विरोध प्रकट करते हुए काले रंग द्वारा चित्रों को बनाया।

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