आरएटीआई फाउंडेशन की मेटा से सहयोग-प्राप्‍त फ्री हेल्‍पलाइन ‘मेरी ट्रस्‍टलाइन’ को लॉन्‍च किया गया

नई दिल्‍ली, 13 जुलाई 2022: महामारी के कारण ऐसे बच्‍चों की संख्‍या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी देखने को मिली जो अपनी पढ़ाई जारी रखने, मनोरंजन और बाहर की दुनिया से जुड़े रहने के लिये टेक्‍नोलॉजी और डिजिटल प्‍लेटफॉर्म्‍स पर निर्भर हुए। लेकिन सभी बच्‍चों के पास खुद को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के लिये जरूरी ज्ञान, कौशल और संसाधन नहीं हैं। बच्‍चों और उनके पेरेंट्स की ऑनलाइन सुरक्षा सम्‍बंधी चिंताओं को दूर करने में मदद के लिये मेटा ‘मेरी ट्रस्‍टलाइन’ लॉन्‍च करने में आरएटीआई फाउंडेशन (आरंभ इंडिया पहल) को सहयोग दे रही है। अपनी तरह की यह पहली हेल्‍पलाइन 18 साल से कम उम्र के ऐसे बच्‍चों को सहयोग देने के लिये समर्पित है, जो ऑनलाइन सुरक्षा सम्‍बंधी चिंताओं के कारण तनाव में हैं, जैसे कि साइबर बुलिंग और सेल्‍फ-जनरेटेड बाल यौन शोषण सामग्री जैसे संवेदनशील मीडिया से नियंत्रण खोना।
सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 बजे से 5 बजे तक चलने वाली यह हेल्‍पलाइन मामले की जरूरत और गंभीरता के आधार पर छह अलग तरीकों से सहयोग देगी- टेक्निकल सपोर्ट में ऐसे कंटेन्‍ट को हटाने में सहायता दी जाएगी, जो बच्‍चे को अंतरंग/निजी लगता है। इमोशनल सपोर्ट के तहत कॉल करने वालों को मानसिक तनाव में परामर्श दिया जाएगा; सोशल सपोर्ट ऐसे कॉलर्स के लिये होगा, जिन्‍हें परिवार के दखल समेत सामाजिक तरीके से दखल की जरूरत होगी, इंफॉर्मेशनल सपोर्ट में मामले से सम्‍बंधित तथ्‍यात्‍मक और विशेषज्ञ जानकारी शामिल होगी, लीगल सपोर्ट में पीड़ितों और उनके परिवारों के लिये कानूनी सलाह और मध्‍यस्‍थता होगी और रेफरल सपोर्ट पीड़ितों को भारत के संस्‍थानों और कानून लागू करने वाली संस्‍था समेत संस्‍थाओं से जोड़ेगा।
जिन बच्‍चों को सेल्‍फ-जनरेटेड संवेदनशील तस्‍वीरों और अनैच्छिक अंतरंग तस्‍वीरों के सम्‍बंध में सहयोग चाहिये, कॉल करने पर आरएटीआई फाउंडेशन उन्‍हें इंटरनेट वाच फाउंडेशन (आईडब्‍ल्‍यूएफ), यूके से जोड़ेगा, ताकि कार्यवाही हो सके और ऐसी तस्‍वीरों को ऑनलाइन चलने से रोका जा सके। यह फाउंडेशन बच्‍चों और उनकी देखभाल करने वालों को संबद्ध कानून लागू करवाने वाली एजेंसियों से भी जोड़ने में सहयोग देगा।
हेल्‍पलाइन के लॉन्‍च पर मेटा के वीपी और ग्‍लोबल हेड ऑफ सेफ्टी एंटीगोन डेविस ने कहा, “बच्‍चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है और हम ऐसा माहौल बनाने के लिये प्रतिबद्ध हैं, जहाँ बच्‍चों को हमारे प्‍लेटफॉर्म्‍स पर सुरक्षित अनुभव मिले। हर दिन ज्‍यादा से ज्‍यादा बच्‍चे ऑनलाइन आ रहे हैं और उन्‍हें ऑनलाइन नुकसान से बचाने के लिये रिपोर्टिंग का एक मॉडल बनाने की जरूरत है, जो न केवल उनके लिये अनुकूल और प्रभावी हो, बल्कि जिसे उद्योग भी बड़े पैमाने पर अपना सके। मेरी ट्रस्‍टलाइन के लॉन्‍च के साथ हम उद्योग में प्रथम इस पहल में आगे रहने के लिये आरएटीआई फाउंडेशन को सहयोग दे रहे हैं, जिससे उद्योग में बच्‍चों को होने वाले ऑनलाइन खतरों की सूचना मिल सकेगी।”
मेरी ट्रस्‍टलाइन (6363176363) बच्‍चों और अन्‍य हितधारकों, जैसे उनकी देखभाल करने वालों, अभिभावकों/पालकों, शिक्षकों, भाई-बहनों, किशोरों और साथियों के लिये हिन्‍दी और अंग्रेजी, दोनों में उपलब्‍ध होगी। बच्‍चों की ओर से बात या काम करने वाले अन्‍य संस्‍थान या संस्‍थाएं भी इस हेल्‍पलाइन पर कॉल कर सकते हैं। आरएटीआई फाउंडेशन द्वारा संचालित इस हेल्‍पलाइन में तकनीकी और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के विशेषज्ञों समेत काउंसलर्स की एक टीम होगी, जो कॉल मिलने पर सवालों के जवाब देगी। मेरी ट्रस्‍टलाइन की टीम वकीलों, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक मजबूत सलाहकार समूह के साथ भी मिलकर काम करेगी, ताकि कॉल करने वालों को व्‍यक्तिगत आवश्‍यकताओं के आधार पर सहयोग प्रदान किया जा सके।
आरएटीआई फाउंडेशन की सह-संस्‍थापक एवं निदेशक उमा सुब्रमण्यिन ने कहा, “भारत के बच्‍चे तेजी से ऑनलाइन आ रहे हैं और कंटार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 तक भारत में इंटरनेट के सभी यूजर्स में से 60% की आयु 19 वर्ष से कम होगी। आरएटीआई फाउंडेशन का लक्ष्‍य यह सुनिश्चित करना है कि इंटरनेट पर खोज करते समय भारत के बच्‍चों की पहुँच सुरक्षा प्रणालियों तक हो। मेरी ट्रस्‍टलाइन में हम मेटा का सहयोग मिलने से बहुत खुश हैं। इससे बच्‍चों के लिये ज्‍यादा ऑनलाइन सुर‍क्षा सुनिश्चित होगी।”
ट्रस्‍टलाइन के लॉन्‍च पर मौजूद एक्‍टर, प्रोड्यूसर, होस्‍ट और फ्रीडम टू फीड की फाउंडर नेहा धूपिया ने कहा, “दो बच्‍चों की माँ होने के नाते मेरा मानना है कि हर बच्‍चे को सोशल मीडिया पर ऑनलाइन रहते समय सुरक्षित महसूस करने का अधिकार है। एक सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण बनाने के लिये सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म्‍स, सिविल सोसायटी और यूजर्स को शामिल करने वाला दृष्टिकोण महत्‍वपूर्ण है। इस पहल में आरएटीआई फाउंडेशन को सहयोग देने के लिये मैं मेटा को बधाई देती हूँ। यह पहल बच्‍चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा सम्‍बंधी चिंताओं को दूर करने में लंबे समय तक चलेगी।”
बीते वर्षों में मेटा ने अपने प्‍लेटफॉर्म्‍स पर बच्‍चों की ऑनलाइन सुर‍क्षा सुनिश्चित करने के लिये अच्‍छा-खासा निवेश किया है। कंपनी ने फेसबुक पर एक चाइल्‍ड सेफ्टी हब पेश किया है, जो बच्‍चों के पेरेंट्स, उनकी देखभाल करने वालों और शिक्षकों को उनकी ऑनलाइन सुरक्षा और भलाई की नीतियों, संसाधनों और टूल्‍स से सहयोग देता है। भारत की 13 भाषाओं में उपलब्‍ध यह हब ऑनलाइन सुरक्षा, डिजिटल साक्षरता, भलाई और बुलिंग की रोकथाम के लिये मेटा के विशेषज्ञों द्वारा बताये गये और शोध-आधारित कार्यक्रमों को केन्द्रित कर विस्‍तार करता है। इंस्‍टाग्राम पर एक पेरेंट्स गाइड लॉन्‍च की गई थी, जो अंग्रेजी और 7 भारतीय भाषाओं में उपलब्‍ध है। इस गाइड का लक्ष्‍य है अपने प्‍लेटफॉर्म पर मौजूद सुरक्षा के सभी फीचर्स के बारे में पेरेंट्स को जानकारी देकर बच्‍चों की सुरक्षित रहने में मदद करना।
मेटा अपने प्‍लेटफॉर्म्‍स पर बच्‍चों को सुरक्षित रखने में मदद के लिये लगातार उद्योग के अग्रणी टूल्‍स बना रही है। इनमें मेटा के प्‍लेटफॉर्म्‍स पर चेतावनी और सुरक्षा के नोटिस शामिल हैं, ताकि लोगों को पता लग सके कि वे किसके साथ जुड़ रहे हैं। यह नोटिस बच्‍चों के साथ अनुचित बात को रोकते हैं और मैसेंजर तथा इंस्‍टाग्राम पर ग्रूमिंग की संभावना को सीमित करते हैं। कंपनी ने एक नई टेक्‍नोलॉजी भी विकसित की है, जो वयस्‍कों के लिये किशोरों को ढूंढना और फॉलो करना ज्‍यादा कठिन बना देती है।

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