बलात्कारियों को नपुंसक बनाने और तीस साल कैद के पक्ष में कांग्रेस

गैंग रेप पीड़िता की मौत से उपजे देशव्यापी गुस्से के बीच कांग्रेस ने बलात्कारियों को सजा देने के लिए कड़ा कानून बनाने पर जोर दिया है। इसके लिए वह जस्टिस जेएस वर्मा समिति को सख्त कानून का मसौदा पेश करेगी। कांग्रेस चाहती है कि प्रस्तावित कानून के तहत दुर्लभ से दुर्लभ मामलों में दुष्कर्मियों को रासायनिक तरीके से नपुंसक करने का प्रावधान हो। वैसे आम मामलों में दोषियों के लिए तीस वर्ष की कैद की व्यवस्था हो। दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई के लिए पार्टी फॉस्ट ट्रैक कोर्ट के गठन और केस का निस्तारण तीन महीने के भीतर करने के लिए भी कहेगी।

आंदोलनकारियों को सोनिया का आश्वासन

सूत्रों के अनुसार 23 दिसंबर को गैंग रेप विरोधी आंदोलनकारियों से बातचीत के दौरान सोनिया गंाधी ने यह आश्वासन दिया। कांग्रेस अध्यक्ष के 10 जनपथ स्थित आवास पर प्रदर्शनकारियों के साथ हुई उक्त बैठक में राहुल गांधी समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बैठक में कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने बलात्कारियों को रासायनिक तरीके से नपुंसक करने पर जोर दिया।

किशोर की उम्र सीमा 15 वर्ष करने का सुझाव

बैठक में किशोर की परिभाषा की फिर से व्याख्या करने और उनकी उम्र सीमा 18 की बजाय 15 वर्ष करने का सुझाव भी दिया गया। उल्लेखनीय है कि दिल्ली गैंग रेप के एक आरोपी की उम्र 18 वर्ष से कुछ महीने कम है। इसलिए कानून की नजर में उसे किशोर माना जा रहा है। समझा जाता है कि सख्त कानून बनाने की पार्टी की इस कवायद में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद को भी शामिल किया जाएगा।

सक्रिय हुआ महिला कल्याण मंत्रालय

सूत्रों का कहना है कि इस दिशा में महिला एवं बाल कल्याण मंत्री कृष्णा तीरथ सक्रिय हो गई हैं। शुक्रवार को उन्होंने कई महिला एवं स्वयंसेवी संगठनों से बातचीत की और उनके सुझाव नोट किए। उनका मंत्रालय इन सुझावों का ब्यौरा जस्टिस वर्मा समिति को सौंपेगा।

अधिसूचना जारी कर सकती है सरकार

कहा जा रहा है कि सरकार महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय की सिफारिशों की कानूनी समीक्षा करेगी और गृह एवं विधि मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद बलात्कार रोधी कानून के लिए अधिसूचना जारी कर सकती है। ध्यान रहे कि दिल्ली गैंग रेप घटना के बाद केंद्र ने महिलाओं की सुरक्षा और पुख्ता करने एवं मौजूदा कानून की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस वर्मा की अगुवाई में एक समिति का गठन किया है। यह समिति बलात्कारियों को सजा देने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान वाले उपाय सुझाएगा। सूत्रों के मुताबिक दुष्कर्म को लेकर अभी तक न तो कांग्रेस पार्टी का मसौदा तैयार है और न ही सरकार ने प्रस्तावित बिल का कोई प्रारूप तैयार किया है।

जज अय्यर ने पहली दफा दिया था रासायनिक बंध्याकरण का सुझाव

दुष्कर्मियों को रासायनिक तरीके से नपुंसक करने का सुझाव देश में पहली दफा 1979 में सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन जज वीआर कृष्ण अय्यर ने दिया था। हाल में दिल्ली की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लाऊ ने भी बलात्कार और छेड़छाड़ के मामले में दोषियों को सजा के तौर पर नपुंसक बनाने की पैरवी की थी।

त्वरित न्याय और पुलिस सुधार पर बना जन दबाव

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। गैंग रेप मामले में जनता का गुस्सा अब परिपक्व नतीजे तलाश रहा है। सड़कों पर उतरे लोग अब सिर्फ इस एक मामले में आरोपियों को सजा नहीं मांग रहे, बल्कि भविष्य के लिए एक बेहतर व्यवस्था की मांग करने लगे हैं। ऐसे मामलों में त्वरित न्याय दिलाने और बेहतर पुलिस व्यवस्था उपलब्ध करवाने का सरकार पर अभूतपूर्व दबाव बना है।

एक बार सड़कों पर उतर आए लोग अब चाहते हैं कि यह महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिहाज से कुछ सकारात्मक नतीजे भी लेकर आए। सुप्रीम कोर्ट की जज ज्ञानसुधा मिश्रा ऐसे मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम में सुधार को जरूरी बताती हैं। इस मामले पर उत्तेजित रंधीर झा नामक युवक ने अपने संक्षिप्त पत्र में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सवाल करते हैं कि वे दुनिया भर में अपने आर्थिक सुधारों के लिए तो मशहूर हैं, लेकिन आखिर सामाजिक सुधारों को लेकर इतना डरते क्यों हैं?

लोकपाल की मांग पर हुए पिछले ऐसे आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे अरविंद केजरीवाल कहते हैं कि सरकार को इससे कम से कम एक सबक तो तुरंत लेना होगा। बलात्कार हो या महिलाओं से छेड़छाड़ के मामले, दो महीने के अंदर इनकी जांच और सुनवाई पूरी कर आरोपी को सजा मिल जानी चाहिए।

देश भर में यह सुनिश्चित करने के लिए जितने भी फास्ट ट्रैक अदालतें गठित की जानी हों, तुरंत की जाएं। देश के शीर्ष वकील और पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी भी कहते हैं कि यह मौका इन जरूरतों पर सबसे ज्यादा जोर दे रहा है। ऐसी व्यवस्था बेहद जरूरी है जिसमें महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले में एक महीने के अंदर जांच पूरी हो और रोजाना सुनवाई के जरिए हर हाल में तीन महीने के अंदर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।

पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रह्मण्यम लंबे समय से लटके पुलिस सुधार को बिना देरी के पूरा करने की बात करते हैं। उनके मुताबिक तुरंत इस लिहाज से जरूरी बताए गए सात कदम उठाने की जरूरत है। इसमें सबसे अहम है पुलिस में जांच और कानून व्यवस्था की अलग-अलग व्यवस्था करना। जांच पर सरकार का नियंत्रण हटाना और पुलिस के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई के लिए स्वतंत्र व्यवस्था करना।

न्यायमूर्ति ज्ञानसुधा मिश्रा कहती हैं कि एक ही गवाह से बार-बार बयान लेने की जरूरत को खत्म कर दिया जाना चाहिए। इससे सुनवाई में लगने वाला समय कम होगा। आरोपी और पीड़ित दोनों की ओर से पेश किए गए सुबूत न्यायिक अधिकारी के सामने रिकार्ड किए जाएं जिससे अदालत में यह पूरी प्रक्रिया दोहरानी नहीं पड़े। वहां सिर्फ इसकी पुष्टि की जाए और बहस की जाए। ऐसा होगा, तभी फास्ट ट्रैक अदालतें वास्तव में तेजी से काम कर पाएंगी।

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