डॉक्टरों ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम में फैमिली फिजिशियन के रूप में प्रशिक्षण देने को शामिल करने का आह्वान किया

एएफपीआई स्थापना दिवस को राष्ट्रीय परिवार चिकित्सा दिवस के रूप में घोषित किया गया

26 सितंबर.2022, नई दिल्ली,: एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियन ऑफ इंडिया (एएफपीआई) ने 25 सितंबर 2022 को अपना स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर, डॉक्टरों ने हेल्थकेयर इकोसिस्टम में फैमिली फिजिशियन के महत्व पर प्रकाश डाला। फैमिली फिजिशियन परिवारों को समग्र स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे किसी परिवार की सभी स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं के लिए एक संपर्क बिंदु के रूप में कार्य करते हैं और द्वीतीय तथा तृतीयक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़ने देते हैं।

एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियन इंडिया (एएफपीआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फैमिली फिजिशियन डॉ. रमन कुमार ने कहा, “एक फैमिली डॉक्टर न केवल एक पारिवारिक चिकित्सक, बल्कि एक मार्गदर्शक के रूप में भी कार्य करता है, जिससे एक परिवार को सभी जरूरी जानकारियां प्राप्त करने और स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने में सहायता मिलती है। एएफपीआई के स्थापना दिवस में देशभर के डॉक्टरों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस अवसर पर कोविड महामारी की पृष्ठभूमि में, सभी भारतीय मेडिकल कॉलेजों में परिवारिक चिकित्सक के रूप में प्रशिक्षण’ को एमबीबीएस पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल करने पर एक राष्ट्रीय परामर्श आयोजित किया गया। इसी दिन एएफपीआई के स्थापना दिवस को ‘राष्ट्रीय परिवार चिकित्सा दिवस’ भी घोषित किया गया था।”

प्रोफेसर एस.के. सरीन, आईएलबीएस नई दिल्ली के निदेशक और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान अकादमी (एनएएमएस) के अध्यक्ष ने स्थापना दिवस पर अपने संबोधन में इस बात को दृढ़ता से स्थापित किया। उन्होंने दोहराया, “बीमारियों और उनसे संबंधित जटिलताओं की रोकथाम में पारिवारिक चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, यह बात उन्होंने फैटी लीवर का उदाहरण देकर समझाई।”

केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के निदेशक श्री आलोक सक्सेना ने भारत की पुरानी पारिवारिक चिकित्सक परंपरा की भूमिका को याद किया और तेजी से अप्रचलित होती इस प्रवृत्ति के पुनरुद्धार और स्वास्थ्य प्रणाली के साथ पारिवारिक चिकित्सकों के एकीकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एमबीबीएस डॉक्टरों को फैमिली फिजिशियन के रूप में प्रशिक्षित करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। एमबीबीएस के दौरान एक संरचित प्रणाली होनी चाहिए क्योंकि सभी डॉक्टरों को अस्पताल-आधारित विशेषज्ञ बनने की आवश्यकता नहीं है।”

इस अवसर पर एम्स गोरखपुर की निदेशक प्रो. सुरेखा किशोर मुख्य अतिथि थीं। अपने संबोधन के दौरान, उन्होंने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के सदस्य के रूप में पारिवारिक चिकित्सकों और उनके प्रशिक्षण के मुद्दे को उठाने का आश्वासन दिया।

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