केन्द्रीय बजट 2026 इंफ्रास्ट्रक्चर से होने वाली वृद्धि को मज़बूत करता है; सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन को सीमेंट सेक्टर में तेज़ी की उम्मीद है

नई दिल्ली, फरवरी 2026: सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सी एम ए) ने केन्द्रीय बजट 2026-27 का स्वागत किया है। यह देश के विकास के लिए लोगों की उम्मीदों को मज़बूत करने और सबको साथ लेकर चलते हुए लोगों की उम्मीदों को संतुलित करने के लिए है। यह बजट भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के 2047 तक विकसित भारत और आत्मनिर्भरता के विज़न से प्रेरित है।

बजट पिछले 12 सालों में भारत की स्थिर आर्थिक रफ़्तार को दिखाता है, जिसकी पहचान वित्तीय अनुशासन, लगातार वृद्धि और मध्यम मुद्रास्फीती है, और यह सीमेंट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सेक्टर्स के लिए मज़बूत मांग दिखाता है।

बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर दिया गया है, जिसमें सार्वजनिक पूंजी व्यय वित्त वर्ष 2025-26 में ₹11.2 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में ₹12.2 लाख करोड़ हो गया है। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक वृद्धि का मुख्य सहारा माना गया है, जिससे भारतीय सीमेंट उद्योग के लिए अच्छी संभावनाएं बन रही हैं और सीमेंट सेक्टर की दीर्घकाल में विज़िबिलिटी बेहतर हो रही है। 5 लाख से ज्यादा आबादी वाले टियर 2 और टियर 3 शहरों पर ज़ोर और पांच सालों में हर सीईआर के लिए ₹5,000 करोड़ के आवंटन के साथ सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) बनाने से आवास, परिवहन और शहरी सेवाओं में निर्माण गतिविधि में तेज़ी आनी चाहिए, जिससे सीमेंट की खपत को बड़े पैमाने पर सपोर्ट मिलेगा।

बजट में घोषित लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी के उपाय सीमेंट इंडस्ट्री के लिए खास तौर पर ज़रूरी हैं। नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा, अगले पांच सालों में 20 और राष्ट्रीय जलमार्गों का परिचालन, 2047 तक वॉटरवेज़ और कोस्टल शिपिंग का मॉडल शेयर 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने के लिए कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम की शुरुआत, और शिप रिपेयर ईकोसिस्टम के विकास से मल्टीमॉडल फ्रेट क्षमता बढ़ेगी, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और सेक्टर का कार्बन फुटप्रिंट बेहतर होगा। ग्रोथ कॉरिडोर के तौर पर सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा से उम्मीद की जा सकती है कि क्षेत्रीय विकास और निर्माण मांग और बढ़ेगी।

इस बजट पर सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सी एम ए) के प्रेसिडेंट, श्री पार्थ जिंदल ने कहा, ’’जैसे-जैसे भारत एक विकसित देश बनने की ओर बढ़ रहा है, केन्द्रीय बजट में बताए गए तीन कर्तव्य देश की वृद्धि और उम्मीदों के लिए एक स्पष्ट संदर्भ देते हैं, जो इकोनॉमिक मोमेंटम को क्षमता निर्माण और समावेशी प्रगति के साथ जोड़ते हैं। सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सी एम ए) विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता, शहरी विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिकिकरण पर लगातार जोर देने के लिए केन्द्रीय 2026-27 की प्रशंसा करता है, जिसे जी एस टी सरलीकरण, लेबर कोड, क्वालिटी कंट्रोल रैशनलाइजेशन और राज्यों के साथ कोऑर्डिनेटेड डीरेगुलेशन जैसे 350 से ज्यादा सुधारों का सहयोग मिला है। ये सुधार, आत्मनिर्भरता के तहत युवा शक्ति और स्वदेशी विनिर्माण क्षमता पर बजट के फोकस के साथ, सीमेंट जैसे कैपिटल इंटेंसिव सेक्टर्स के लिए निवेश का माहौल मजबूत करेंगे। केन्द्रीय बजट 2026-27 दिखाता है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित विकास पर फोकस कर रही है, जो भारत की वृद्धि रणनीति का एक ढांचागत स्तंभ बनकर उभर रहा है। सीमेंट समेत अलग-अलग सेक्टरों के लिए ₹20,000 करोड़ का सीसीयूएस व्यय, भारत के अधिक उत्सर्जन वाले उद्योगों के लिए डीकार्बनाइज़ेशन के माहौल को पूरी तरह से बदल देगा। सीसीयूएस सीमेंट जैसी इंडस्ट्रीज़ के बड़े पैमाने पर डीकार्बनाइज़ेशन के लिए एक अहम चीज़ है और यह दखल सीधे तौर पर सीमेंट सेक्टर की टेक्नोलॉजी और लागत की ज़रूरतों को पूरा करता है। सीमेंट इंडस्ट्री, जो 2070 तक भारत सरकार की नैट् ज़ीरो प्रतिबद्धता के साथ पूरी तरह से जुड़ी हुई है, इस सपोर्ट को देश की लंबे समय की इंफ्रास्ट्रक्चर ज़रूरतों को पूरा करते हुए सीसीयूएस टेक्नोलॉजी को अपनाने और बढ़ाने के लिए ज़रूरी मानती है।’’

सीएमए के वाइस प्रेसिडेंट, डॉ. राघवपत सिंघानिया ने कहा, ’’सरकार का लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर रोज़गार, क्षेत्रीय विकास और मज़बूत स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को सपोर्ट करता है। सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर अलग-अलग इलाकों में इकोनॉमिक एंकर का काम करते हैं, जो कंस्ट्रक्शन, लॉजिस्टिक्स और उससे जुड़े सेक्टर में रोज़गार पैदा करते हैं। बजट का फोकस समावेशी वृद्धि, निष्पादन और सिस्टम लेवल इनेबलर्स पर है, जो ज़िम्मेदार और कुशल विस्तार के लिए एक सहयोगात्मक माहौल बनाते हैं, जिससे आर्थिक वृद्धि के मौके मिलते हैं और सीमेंट सेक्टर को रफ़्तार मिलती है। पब्लिक कैपेक्स को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ करना, टियर 2 और टियर 3 शहरों पर फोकस, और सिटी इकोनॉमिक रीजन बनाना सीमेंट सेक्टर की वृद्धि को मज़बूती देगा। हम बजट में पर्यटन, सांस्कृतिक और सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर देने का स्वागत करते हैं, जिससे सभी इलाकों में निर्माण गतिविधि बढ़नी चाहिए। पर्यटन सुविधाओं, हेरिटेज और बुद्धिस्ट सर्किट में निवेश, पूर्वोदय और उत्तरपूर्वी राज्यों में रीजनल कनेक्टिविटी, और डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करना, समावेशी वृद्धि को मुमकिन बनाने में सीमेंट सेक्टर की भूमिका को मज़बूत करता है।’’

सीएमए ने वित्तीय अनुशासन के लिए सरकार की सतत प्रतिबद्धता पर सकारात्मक बात कही है, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वित्तीय घाटा जी डी पी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा। जैसे-जैसे भारत विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ रहा है, सीमेंट इंडस्ट्री लंबे समय तक देश के विकास में मदद करने वाला लचीला, टिकाऊ और सबको साथ लेकर चलने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने के अपने वादे को फिर से पक्का करती है।

सीएमए के बारे में

सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सी एम ए) भारत में बड़े सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स का सबसे बड़ा एसोसिएशन है। भारत में इंस्टॉल्ड सीमेंट कैपेसिटी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा होने के नाते, सी एम ए भारत में इस सेक्टर पर असर डालने वाले पॉलिसी मामलों पर सीमेंट इंडस्ट्री की साझी आवाज़ है।

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