बिट्स पिलानी और इंडियन एआई रिसर्च ऑर्गनाइजेशन ने भारत के एआई अनुसंधान और प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
नई दिल्ली, 04 अगस्त, 2026: बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस पिलानी और इंडियन एआई रिसर्च ऑर्गनाइजेशन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार, शिक्षा और प्रतिभा विकास के लिए सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के माध्यम से दोनों संस्थानों का उद्देश्य अकादमिक जगत और अनुप्रयुक्त एआई अनुसंधान के बीच की दूरी को कम करना तथा सहयोगात्मक नवाचार, ज्ञान के आदान-प्रदान और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार एआई क्षमताओं के विकास के नए अवसर तैयार करना है।
इस सहयोग के तहत, बिट्स पिलानी और IAIRO कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उभरते क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम संचालित करेंगे। दोनों संस्थान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण एजेंसियों से अनुसंधान अनुदान प्राप्त करने के लिए संयुक्त रूप से प्रयास करेंगे और बाहरी वित्तीय सहायता के माध्यम से उन्नत एआई अनुसंधान इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने की संभावनाएं तलाशेंगे। इसके अतिरिक्त, दोनों संस्थान अकादमिक जगत और उद्योग में एआई क्षमताओं को मजबूत करने के उद्देश्य से एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम, विशेष सर्टिफिकेशन कोर्स, कार्यशालाएं, सम्मेलन और तकनीकी सेमिनार आयोजित करने में भी सहयोग करेंगे।
यह साझेदारी अकादमिक संवाद को भी बढ़ावा देगी। इसके तहत बिट्स पिलानी के प्रोफेसर और शोधकर्ता IAIRO के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए व्याख्यान और मेंटरिंग सत्र आयोजित कर सकेंगे। इसी प्रकार, IAIRO के पेशेवर बिट्स पिलानी में गेस्ट लेक्चर, मेंटरिंग कार्यक्रमों और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेंगे।
यह दोतरफा ज्ञान और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करने, अंतर-विषयक सहयोग को प्रोत्साहित करने और अनुसंधान को वास्तविक दुनिया के एआई अनुप्रयोगों में तेजी से परिवर्तित करने में सहायक होगा।
प्रो. वी. रामगोपाल राव, कुलपति, बिट्स पिलानी ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने लगभग हर क्षेत्र में परिवर्तनकारी प्रभाव डाला है और ऐसे में उच्च शिक्षण संस्थानों की अगली पीढ़ी की एआई प्रतिभाओं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका है। IAIRO के साथ यह सहयोग उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान, नवाचार और सार्थक उद्योग-अकादमिक संवाद के माध्यम से भारत के एआई पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अपनी अकादमिक क्षमताओं को IAIRO की अनुप्रयुक्त अनुसंधान विशेषज्ञता के साथ जोड़कर हमें विश्वास है कि हम सहयोगात्मक नवाचार के नए अवसर तैयार कर सकेंगे और ऐसी भविष्य के लिए तैयार प्रतिभाओं को विकसित कर सकेंगे, जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को संबोधित करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर प्रभाव उत्पन्न कर सकें।”
डॉ. अमित शेठ, संस्थापक निदेशक एवं सीईओ, इंडियन एआई रिसर्च ऑर्गनाइजेशन ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भारत का नेतृत्व केवल नई और महत्वपूर्ण तकनीकों के विकास पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगा कि हम जटिल वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिए अकादमिक संस्थानों, अनुसंधान संस्थाओ और उद्योग को कितनी प्रभावी तरीके से एक साथ ला पाते हैं। यह साझेदारी भारत के लिए एक मजबूत एआई अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अकादमिक उत्कृष्टता को अनुप्रयुक्त अनुसंधान के साथ जोड़कर हमारा उद्देश्य प्रतिभा विकास को गति देना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और ऐसे एआई समाधान विकसित करना है जो वैज्ञानिक रूप से मजबूत, सामाजिक रूप से जिम्मेदार और भारत की दीर्घकालिक तकनीकी आकांक्षाओं के अनुरूप हों।”
प्रो. संजय चौधरी, कोलैबोरेशंस एंड ऑपरेशंस लीड, इंडियन एआई रिसर्च ऑर्गनाइजेशन ने कहा, “अकादमिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच निरंतर सहयोग सार्थक एआई नवाचार की नींव है। बिट्स पिलानी के साथ हमारा जुड़ाव सहयोगात्मक अनुसंधान, ज्ञान साझा करने और प्रतिभा विकास के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है। पूरक विशेषज्ञता, अनुसंधान इंफ्रास्ट्रक्चर और अकादमिक उत्कृष्टता को एक साथ लाकर हमारा उद्देश्य ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है, जो नवाचार को बढ़ावा दे, अंतर-विषयक अनुसंधान को प्रोत्साहित करे और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं तथा वैश्विक चुनौतियों को संबोधित करने वाले एआई समाधानों के विकास में तेजी लाए।”
यह समझौता ज्ञापन संयुक्त सम्मेलनों, अनुसंधान संगोष्ठियों, विज्ञान प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं और आउटरीच कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी एक रूपरेखा प्रदान करता है। साथ ही, साझा शैक्षणिक संसाधनों और अनुसंधान सुविधाओं के माध्यम से ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा। यह समझौता कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अनुसंधान उत्कृष्टता, नवाचार, शिक्षा और क्षमता निर्माण पर केंद्रित एक दीर्घकालिक साझेदारी की नींव रखता है।