बेंगलुरु, सितंबर 2026: लैम रिसर्च कॉर्पोरेशन, जो सेमीकंडक्टर बनाने की मशीनें और तकनीक देने वाली दुनिया की प्रमुख कंपनियों में से एक है, ने सामाजिक जिम्मेदारी के तहत एक नई पहल शुरू की है। इसके जरिए सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों को एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में काम करने के लिए जरूरी कौशल सिखाया जाएगा। साथ ही, उन्हें रोजगार के बेहतर मौकों तक पहुंच बनाने में भी मदद की जाएगी।
भारत में आधुनिक तकनीक पर आधारित बड़े औद्योगिक केंद्र विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके चलते देश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर उपकरण, प्रिसिजन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और मेडिकल उपकरणों के निर्माण का तेजी से विस्तार हो रहा है।
लैम रिसर्च ने भारत में सीएसआर पहल के तहत ‘लैम रिसर्च स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम’ शुरू किया है। इसके तहत युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा और उन्हें नौकरी पाने में भी मदद की जाएगी। कार्यक्रम का उद्देश्य एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए ज्यादा कुशल कर्मचारी तैयार करना और युवाओं को रोजगार के लिए अच्छी तरह तैयार करना है। साथ ही कार्यस्थलों को ज्यादा समावेशी बनाने पर भी जोर है। इस कार्यक्रम का पहला चरण मई 2026 में बेंगलुरु से शुरू हुआ था। फिलहाल लाभार्थियों की पहचान करने और उन्हें प्रशिक्षण देने का काम जारी है।
प्रोग्राम की मुख्य बातें
लैम रिसर्च का यह कौशल विकास कार्यक्रम कैपिटल गुड्स स्किल काउंसिल के तहत है और एनएसक्यूएफ लेवल-3 के मानकों के अनुरूप है। कंपनी के सहयोगी संगठन की ओर से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम में असेंबली लाइन ऑपरेटर के काम के लिए 240 घंटे का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनों को जोड़ने की बुनियादी जानकारी, फैक्टरी में उत्पादन का काम, गुणवत्ता की जांच, सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े नियम तथा कार्यस्थल पर काम करने के जरूरी कौशल सिखाए जाएंगे। प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा और उनकी क्षमता का आकलन किया जाएगा, ताकि वे नौकरी के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले प्रतिभागियों को नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी) से जुड़ी मूल्यांकन एजेंसी की ओर से प्रमाणपत्र दिया जाएगा। यह प्रमाणपत्र उद्योग जगत में मान्य होगा और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप होगा। इसके अलावा, सफल उम्मीदवारों को असेंबली लाइन ऑपरेटर की नौकरी पाने में भी मदद की जाएगी।
लैम रिसर्च इंडिया के कॉरपोरेट वाइस प्रेसिडेंट एवं मैनेजिंग डायरेक्टर रंगेश राघवन ने कहा, “लैम रिसर्च में हम मानते हैं कि शिक्षा और सही मौके लोगों का जीवन बदल सकते हैं और समाज को मजबूत बना सकते हैं। इस कौशल विकास कार्यक्रम के जरिए हम स्थानीय युवाओं को जरूरी कौशल सिखाने के साथ उन्हें आगे बढ़ने के मौके भी दे रहे हैं, ताकि वे अलग-अलग उद्योगों में मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी नौकरियों के लिए तैयार हो सकें। सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों पर खास ध्यान देते हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें रोजगार के लिए जरूरी प्रशिक्षण और नौकरी के बेहतर अवसर देना है, ताकि लंबे समय से पीछे छूटे वर्गों को आगे बढ़ने का रास्ता मिले।”
पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने उद्योग की आने वाली जरूरतों को देखते हुए युवाओं को तैयार करने के लिए कई कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए हैं। इनमें भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के साथ साझेदारी प्रमुख है। इस साझेदारी के तहत लैम रिसर्च के सेमीवर्स® सॉल्यूशंस के जरिए विद्यार्थियों को सेमीकंडक्टर निर्माण की प्रक्रिया सीखने का मौका दिया जा रहा है। इसके सॉफ्टवेयर की मदद से विश्वविद्यालयों में सेमीकंडक्टर बनाने की प्रक्रिया का वर्चुअल अनुभव, सिमुलेशन और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है। इससे इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को सेमीकंडक्टर उद्योग में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और काम करने के तरीकों को समझने में मदद मिलती है।