नई दिल्ली, 14 सितंबर, 2026– सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने ब्रिटिश उच्चायोग के साथ मिलकर “Powering India’s Intelligent Connectivity Future: AI for Networks, Trust and Citizens” थीम के तहत नई दिल्ली में आज CO.AI 2026 आयोजित किया। इस फोरम में सरकार से वरिष्ठ प्रतिनिधियों, नियामकों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, टेक्नोलॉजी कंपनियों, नीति भागीदारों और व्यापक डिजिटल पारितंत्र के लोगों को एक साथ लाया गया ताकि भविष्य के लिए तैयार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आकार देने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर चर्चा की जा सके।
इस फोरम के तहत मुख्य अतिथि एवं भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के चेयरमैन श्री अनिल कुमार लाहोटी, भारत में ब्रिटेन के कार्यवाहक उच्चायुक्त श्री बेन मेलोर, सीओएआई के चेयरमैन एवं भारती एयरटेल के ग्रुप सीआरओ एवं निदेशक (कॉरपोरेट मामले) श्री राहुल वत्स, सीओएआई के वाइस चेयरमैन एवं रिलायंस जियो इन्फोकॉम के अध्यक्ष एवं मुख्य लोक नीति व नियामकीय अधिकारी श्री रवि गांधी के साथ ही दूरसंचार विभाग, दूरसंचार ऑपरेटर, टेक्नोलॉजी कंपनियों और अन्य उद्योग से वरिष्ठ प्रतिनिधि एक साथ आए।
इस कार्यक्रम की एक मुख्य बात सीओएआई और ब्रिटिश उच्चायोग के बीच सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर होना था जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल कनेक्टिविटी, डिजिटल ट्रस्ट और जिम्मेदार टेक्नोलॉजी आधारित नवप्रवर्तन के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
CO.AI 2026 तीन आपस में जुड़ी प्राथमिकताओं पर केंद्रित हैः इंटेलिजेंट एवं स्वायत्त नेटवर्कों के लिए एआई, सुरक्षा, विश्वास एवं डिजिटल लचीलापने के लिए एआई और नागरिकों, सेवाओं और लोक मूल्य के लिए एआई। चर्चाओं में डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने, उपभोक्ता सुरक्षा मजबूत करने, नेटवर्क की कार्यक्षमता बेहतर बनाने, मजबूत बुनियादी ढांचे को सहारा देने और बड़े पैमाने पर सुरक्षित डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने में एआई के बढ़ते महत्व पर भी जोर दिया गया।
सभा को संबोधित करते हुए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के चेयरमैन श्री अनिल कुमार लाहोटी ने कहा, “एआई सिर्फ एक अन्य नेटवर्क जेनरेशन या अन्य एप्लीकेशन लेयर नहीं है। यह एक ऐसी क्षमता है जो नेटवर्क को मैनेज करने, सर्विस को डिजाइन करने, जोखिमों की पहचान करने और निर्णय करने के तरीकों पर असर डाल सकती है। एआई अवसर तो पैदा करता है, लेकिन इसके लिए सही तरह के गवर्नेंस दृष्टिकोण की भी जरूरत होती है। जैसे जैसे यह क्षेत्र उभर रहा है, गवर्नेंस को कई उद्देश्यों के साथ संतुलन बनाना होगा जैसे निवेश को प्रोत्साहन, प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन, नवप्रवर्तन को सुगम बनाना, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं की सुरक्षा। ये उद्देश्य हमेशा एक जैसे नहीं होते, लेकिन प्रभावी नियमन को इन्हें एक साथ लेकर चलना चाहिए।”
“अंतरराष्ट्रीय सहयोग वहां मूल्यवर्धन कर सकता है जहां चुनौतियां ही सीमा पार हों। साइबर खतरे, स्कैम नेटवर्क, स्टैंडर्ड एवं टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन राष्ट्रीय सरकारों की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। दूसरे क्षेत्रों से सीखने और सहयोग के लिए व्यवहारिक माध्यम विकसित करना महत्वपूर्ण है। भारत पहले ही बहुत बड़े पैमाने पर डिजिटल प्रणाली बनाने की अपनी क्षमता साबित कर चुका है। अगले चरण में हमें उस पैमाने को समझदारी और भरोसे के साथ जोड़ना होगा। भारत का अगला डिजिटल परिवर्तन सिर्फ इस बात से तय नहीं होगा कि हम कितने लोगों को जोड़ते हैं, बल्कि इस बात से तय होगा कि हम कितनी समझदारी, सुरक्षा, समावेशिता और जिम्मेदारी के साथ उन्हें जोड़ते हैं।”
भारत में कार्यवाहक ब्रिटिश उच्चायुक्त श्री बेन मेलोर ने कहा, “सरकारों की यह जिम्मेदारी है कि वे यह पक्का करें कि नवप्रवर्तन के साथ साथ सुरक्षा, जवाबदेही और मजबूती भी बनी रहे और यह तब और भी जरूरी हो जाता है जब अपराधी घोटालों में मदद के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हों। लेकिन एआई भी समाधान का एक हिस्सा है, यह संस्थानों को अलग अलग घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने के बजाय नुकसान के पैटर्न को जल्दी पहचानने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर सकता है। आज ब्रिटेन की भागीदारी का यह मुख्य उद्देश्य है और इसीलिए यह समझौता इतना महत्वपूर्ण है। यह इरादे की किसी आम घोषणा के बजाय जनहित से जुड़ी एक स्पष्ट समस्या से शुरू होता है और सीओएआई के साथ हमारी साझीदारी को भविष्य में भी लंबे समय तक मिलकर काम करते रहने को निरंतरता प्रदान करता है।”
सीओएआई के चेयरपर्सन एवं भारती एयरटेल लिमिटेड के ग्रुप सीआरओ एवं निदेशक (कंपनी मामले) श्री राहुल वत्स ने कहा, “एआई और दूरसंचार को दो अलग अलग चर्चाओं के बजाय एक ही निरंतरता के रूप में देखा जाना चाहिए। जैसे जैसे भारत अगली पीढ़ा का डिजिटल आधारभूत ढांचा तैयार कर रहा है, एआई ज्यादा स्मार्ट, संदर्भ आधारित और पहले से जरूरतों को समझने वाले नेटवर्क बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा और भरोसा भी मजबूत करेगा। स्पैम से निटपने के लिए एआई का इस्तेमाल करने का हमारा अनुभव यह दिखाता है कि भारत जैसे बड़े स्तर पर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके एक सुरक्षित, मजबूत और भरोसेमंदर डिजिटल इकोसिस्टम बनाया जा सकता है। मैं सीओएआई के साथ इस जुड़ाव को आकार देने में ब्रिटेन उच्चायोग के निरंतर प्रयासों की सराहना करना चाहूंगा जिससे हमें आज चर्चा किए जा रहे विभिन्न विषयों पर सहयोग जारी रखने का आधार मिलेगा।”
इस अवसर पर बोलते हुए सीओएआई महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एसपी कोचर ने कहा, “भारत के लिए कनेक्टिविटी का अगला चरण इंटेलिजेंट, सुरक्षित, मजबूत और नागरिक केंद्रित होना चाहिए। दूरसंचार नेटवर्क ना सिर्फ एआई कार्यभार को सपोर्ट करेंगे, बल्कि वे ऐसे एआई सक्षम प्रणाली भी बनते जाएंगे जो परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने, सुरक्षा को मजबूत करने, सेवा की गुणवत्ता सुधारने और ग्राहकों को उभरते डिजिटल जोखिमों से बचाने में सक्षम होंगे। सीओएआई और ब्रिटिश उच्चायोग के बीच हुआ समझौता डिजिटल कनेक्टिविटी को आकार देने में भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को दर्शाता है।”
सीओएआई के वाइस चेयरमैन और रिलायंस जियो इन्फोकॉम के अध्यक्ष एवं मुख्य लोक नीति एवं नियामकीय अधिकारी डाक्टर रवि. पी. गांधी ने कहा, “सीओएआई 95 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी वाली भारत की प्रमुख दूरसंचार कंपनियों को एक साथ लाता है ताकि उद्योग, सरकार और नियामक के साथ बातचीत आगे बढ़ाई जा सके। वहीं, ब्रिटेन के पास धोखाधड़ी रोकने और गंभीर संगठित अपराध से निपटने का गहरा अनुभव है। ब्रिटेन के उच्चायोग के साथ यह साझीदारी सिर्फ आज के कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धोखाधड़ी और स्कैम को रोकने के लिए लंबे समय तक चलने वाले सहयोग की शुरुआत है।”
सीओएआई ने इस बात पर भी जोर दिया कि दूरसंचार अब सिर्फ कनेक्टिविटी का एक अलग थलग क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ऐसी मूल्यवर्धित हॉरिजोंटल सेवा बन गया है जो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करती है। इसमें एआई, फिनटेक, हेल्थकेयर, शिक्षा, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, राजकाज, साइबर सुरक्षा और नागरिक सेवाएं शामिल हैं। जैसे जैसे नेटवर्क अधिक से अधिक सॉफ्टवेयर आधारित और इंटेलिजेंस संचालित होते जा रहे हैं, आईसीटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और साइबर का एक साथ आना दूरसंचार और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के भविष्य को तय करेगा।
फोरम ने आगे कहा कि एआई में पूर्वानुमान नेटवर्क प्रबंधन, ऊर्जा को महत्तम स्तर पर ले जाने, ऑटोमेटेड सेवा आश्वासन, साइबर सुरक्षा, स्पैम और धोखाधड़ी का पता लगाने, डिजिटल पहचान की सुरक्षा और नागरिकों के बेहतर अनुभव में क्रांतिकारी भूमिका निभाने की क्षमता है। साथ ही प्रतिभागियों ने जिम्मेदार एआई के इस्तेमाल, मजबूत सुरक्षा उपायों, स्पष्ट जवाबदेही और भरोसेमंद डिजिटल पारितंत्र की जरूरत पर बल दिया। इस कार्यक्रम ने भारत के इंटेलिजेंट, सुरक्षित और समावेशी डिजिटल ढांचे की ओर बढ़ने में मदद करने के लिए सीओएआई की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया। साथ ही नवप्रवर्तन, ग्राहक सुरक्षा, उद्योग का सहयोग और वैश्विक टेक्नोलॉजी साझीदारी को भी बढ़ावा दिया।