फोर्टिस गुरुग्राम द्वारा आयोजित HemeNext 2.0 के मंच पर जुड़े ग्लोबल एक्सपर्ट

भारत में ब्लड कैंसर केयर को उन्नत बनाने पर गहन विचार-विमर्श

–    इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जीनोमिक्स, CAR-T थेरेपी, प्रत्यारोपण समेत सटीक देखभाल और मरीजों की आसानी से पहुंच को मजबूती देने के लिए जिम्मेदार तरीके से एआई के इस्तेमाल पर चर्चा-सत्रों का आयोजन

–    तीन समानांतर वैज्ञानिक कार्यक्रमों में बाल रक्त विकार, सरवाइवरशिप और इंफेक्शन मैनेजमेंट पर विचार-विमर्श शामिल

गुरुग्राम, 11 अक्टूबर, 2026: फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफएमआरआई) ने आज यहां दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन HemeNext 2.0 का उद्घाटन किया जिसमें देश-विदेश से आए विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं जो रक्त विज्ञान (ब्लड साइंस) के क्षेत्र में हुई प्रगति को अधिक सटीक, पहुंच के भीतर, तथा किफायती देखभाल के लिए इस्तेमाल पर विचार-विमर्श करेंगे।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (आईसीएमआर-एनसीआरपी) के अनुसार, भारत में 2022 में कैंसर के लगभग 14.6 लाख नए मामले सामने आए थे। बच्चों में सर्वाधिक लिंफोइड ल्युकीमिया कैंसर के मामले पाए जाते हैं, जो 0–14 वर्ष के लड़कों में 29% कैंसर तथा लड़कियों में 24% कैंसर का कारण बनते हैं। ये आंकड़े समय पर डायग्नॉसिस और विशिष्ट उपचार तक लगातार पहुंच के महत्व को रेखांकित करते हैं।

फोर्टिस इंस्टीट्यूट ऑफ ब्लड डिसॉर्डर के नेतृत्व में, 10-11 अक्टूबर के दौरान द वेस्टिन, सेक्टर 29, गुरुग्राम में आयोजित इस कॉन्क्लेव में, तीन समानांतर वैज्ञानिक कार्यक्रमों को शामिल किया गया है जो वयस्क एवं बाल हेमेटोलॉजी, जीनोमिक्स, सैलुलर थेरेपी, ट्रांसप्लांटेशन, एआई तथा संक्रामक रोगों पर केंद्रित हैं। इन वैज्ञानिक सत्रों में, ब्रिटेन, अमरीका और सिंगापुर के अलावा भारत के करीब 200 फैकल्टी सदस्य और लगभग 400 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं, जो अपने क्लीनिकल अनुभवों को विचार-विमर्श, चर्चाओं तथा वैज्ञानिक प्रस्तुतियों के माध्यम से साझा करेंगे।

डॉ राहुल भार्गव, प्रिंसीपल डायरेक्टर एंड चीफ – हेमेटोलॉजी, हेमेटो-ओंकोलॉजी एंड बीएमटी, फोर्टिस हॉस्पीटल गुरुग्राम, एंड चेयरपर्सन, HemeNext 2.0 ने कहा, “भारत की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि वैज्ञानिक क्षेत्रों में हो रही प्रगति का लाभ समय पर मरीजों तक पहुंचे और उस कीमत पर जो उनकी पहुंच के भीतर हो। HemeNext 2.0 ने भारतीय क्लीनिकल अनुभव को वैश्विक शोध से जोड़ा है ताकि मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाया जा सके और जिसकी आवश्यकता उन्हें हो उसे सुरक्षित तरीके से उन्हें उपलब्ध भी कराया जाए। कुल-मिलाकर, इस सम्मेलन का जोर सूचना आधारित उपचार संबंधी फैसलों, मजबूत क्लीनिकल सहयोग, और अधिक व्यापक पहुंच पर है।”

सटीक डायग्नॉस्टिक्स एवं उन्नत थेरेपी

सम्मेलन के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न सत्रों में नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग, त्वरित जिनोमिक टेस्टिंग, मल्टी-ओमिक्स तथा मापयोग्य शेष रोग (रेजीडुअल डिज़ीज़) – यह कैंसर की वह छोटी मात्रा होती है जो उपचार के दौरान या बाद में भी बची रह सकती है, पर बातचीत की जाएगी। साथ ही, डायग्नॉसिस को अधिक परिष्कृत बनाने, जोखिमों का मूल्यांकन करने तथा उपचार में मार्गदर्शन करने वाले टूल्स किस प्रकार सहायक हो सकते हैं, तथा टर्नअराउंट समय, व्याक्ष्या और किफायत जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

डॉ श्रीनिधि नथानी, कंसल्टेंट – मॉलीक्यूलर हेमेटोलॉजी एंड ओंकोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल गुरुग्राम, तथा आयोजक सचिव, HemeNext 2.0 ने कहा, “एक समान डायग्नॉसिस वाले मरीजों की भी अलग-अलग रोग बायलॉजी और उपचार संबंधी आवश्यकताएं हो सकती हैं। जिनोमिक्स हमें इस अंतर को समझने में मददगार होता है। इसका महत्व हमें सही टेस्ट का चयन करने और उससे प्राप्त नतीजों को उपयोगी क्लीनिकल फैसलों में शामिल करने के रूप में है। समुचित टेस्टिंग को समय पर, भरोसेमंद और सुगम बनाना ही भारत में सटीक देखभाल को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है।”

यह प्रोग्राम CAR-T सैल थेरेपी को भी टटोलता है, जो कि मरीजों की इम्यून कोशिकाओं को इस तरह से संशोधित करती है कि वे कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती हैं। साथ ही, यह लक्षित उपचारों तथा बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन के लिए भी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ इस संदर्भ में मरीजों का चयन, उपचार का समय, सुरक्षा संबंधी निगरानी और इंफ्रास्ट्रक्चर एवं खर्च आदि पर भी चर्चा करेंगे।

बाल्यावस्था में देखभाल और संक्रमण प्रबंधन

पिडियाट्रिक प्रोग्राम में ल्यूकीमिया, आनुवांशिक मैरो फेलियर, थैलसीमिया, सिकल सेल रोग और ट्रांसप्लांटेशन, के साथ-साथ सरवाइवरशिप, इम्यून हेल्थ, फर्टिलिटी प्रीज़रवेशन तथा उपचार के दूरगामी प्रभावों को शामिल किया गया। इसी तरह, डोनर रजिस्ट्री और सार्वजनिक-निजी भागीदारियों पर केंद्रित सत्रों में पहुंच में विस्तार के अवसरों के बारे में चिंतन किया जाएगा।

डॉ विकास दुआ, प्रिंसीपल डायरेक्टर एंड हैड – पिडियाट्रिक हेमेटोलॉजी, हेमेटो-ओंकोलॉजी एंड बीएमटी, फोर्टिस हॉस्पीटल गुरुग्राम, तथा चेयरपर्सन, HemeNext 2.0 ने कहा, “ब्लड कैंसर और अन्य आनुवांशिक विकारों से ग्रस्त बच्चों की देखभाल के दौरान उनके जीवन और आगामी वषों में उनकी स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। समय पर रेफरल, पूर्ण उपचार के लिए सपोर्ट और दीर्घकाल तक फौलो-अप भी महत्वपूर्ण पक्ष हैं। अंतरराष्ट्रीय साक्ष्यों और भारतीय अनुभवों को आपस में साझा कर हम डायग्नॉसिस से लेकर सरवाइवरशिप तक देखभाल के सभी चरणों को अधिक मजबूत बनाकर ऐसी भागीदारियों की पहचान कर सकते हैं जो अधिकाधिक बच्चों की पहुंच उपचार तक सुनिश्चित करती हैं।”

इस संबंध में एक समर्पित संक्रामक रोग प्रोग्राम में सेप्सिस, फंगल इंफेक्शन, एंटीमाइक्रोबायल रेजिस्टेंस, वायरल इंफेक्शन प्रीवेंशन और इम्युनाइज़ेशन को शामिल किया जाएगा – जो कि उन मरीजों के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण हैं जिनकी इम्यूनिटी रोग या उपचार की वजह से कमजोर पड़ चुकी होती है।

जिम्मेदार नवाचार और भविष्य की विशेषज्ञता

एआई सत्रों तथा केस आधारित ‘एआई बनाम ह्यूमैन’ चर्चा में डायग्नॉस्टिक्स, जिनोमिक्स तथा रिसर्च के क्षेत्रों में साक्ष्य, वैलिडेशन, डेटा सुरक्षा और क्लीनिशियन ओवरसाइट को परखा जाएगा। स्टार्ट-अप लाउंज में क्लीनिशियनों को हेल्थकेयर इनोवेटर्स से जोड़ा जाएगा तथा द हेमे एरेना में रेजीडेंट डॉक्टरों के लिए आयोजित इंटर-इंस्टीट्यूशन क्विज़ के माध्यम से परस्पर शोध संबंधी आदान-प्रदान और उदीयमान विशेषज्ञों को सपोर्ट मिलेगा।

हेमेनेक्स्ट 2.0 एक साझा लक्ष्य –रक्त विज्ञान में हुई प्रगति को अधिकाधिक मरीजों की सार्थक देखभाल के लिए उपलब्ध कराते हुए, इस परिप्रेक्ष्य में वैश्विक ज्ञान तथा भारतीय क्लीनिकल प्राथमिकताओं को एकजुट करेगा।

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