आशीष नंदी की गिरफ्तारी पर रोक: सुप्रीम कोर्ट

जयपुर साहित्य सम्मेलन में पिछड़ों व दलितों के भ्रष्टाचार पर टिप्पणी कर फंसे समाजशास्त्री व लेखक आशीष नंदी को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दे दी है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि नंदी का विवादित बयान गैरजरूरी था। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और राजस्थान, महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है।

गौरतलब है कि नंदी ने राहत के लिए बृहस्पतिवार को को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर विवादित बयान मामले में उनके खिलाफ दर्ज एफआइआर रद करने की मांग की थी। साथ ही, गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगाने की भी गुहार लगाई थी।

जयपुर साहित्य सम्मेलन के एक सत्र में चर्चा के दौरान नंदी यह बोल गए थे कि ज्यादातर भ्रष्ट लोग पिछड़ी और दलित जातियों से आते हैं और अब जनजातियों से भी आने लगे हैं। इस विवादित बयान पर उनके खिलाफ जयपुर में मामला दर्ज हो गया है।

नंदी के वकील अमन लेखी ने मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर की पीठ के समक्ष याचिका का जिक्र करते हुए शीघ्र सुनवाई की मांग की थी। लेखी ने कहा कि नंदी की गिरफ्तारी का गंभीर खतरा है, उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी जाए। लेकिन, पीठ ने तत्काल सुनवाई से इंकार करते हुए कहा कि अभी न तो याचिका ठीक से दाखिल हुई है और न ही नंबर हुई है।

इस तरह कोर्ट याचिका पर कैसे सुनवाई कर सकता है। कोर्ट ने हालांकि याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की मंजूरी दे दी थी।

नंदी की याचिका में कहा गया है कि वे जाने-माने विचारक और लेखक हैं। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सदस्य हैं। उन्होंने किसी की भावनाएं आहत करने के इरादे से कोई बात नहीं कही। वे हमेशा से कमजोर तबके के उत्थान के पक्षधर रहे हैं।

उनके खिलाफ इस तरह प्राथमिकी दर्ज करना कानून का दुरुपयोग है। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का हक है। इस तरह मामला दर्ज करना उन्हें संविधान के तहत मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। नंदी ने कहा है कि उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 506 और एससी-एसटी एक्ट की धारा 3 (1)(10) के तहत मामला दर्ज हुआ है। जबकि, उनके बयान को देखा जाए तो इन धाराओं में मुकदमा नहीं बनता।

एससी-एसटी एक्ट की यह धारा गैर जमानती है और इसमें अग्रिम जमानत का भी प्रावधान नहीं है। विभिन्न राजनीतिक दलों जैसे मायावती व एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया के बयानों के बाद उनकी गिरफ्तारी का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। नंदी ने याचिका में केंद्र सरकार, जयपुर में अशोक नगर थाने के इंचार्ज के अलावा महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सरकार को भी पक्षकार बनाया है।

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