बदलेगा कानून, रेप केस में होगी फांसी

दिल्ली गैंगरेप के बाद दुष्कर्म मामले में कानून में बदलाव को लेकर उठ रही आवाज अब कामयाब होती दिखाई दे रही है। सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और दुष्कर्म मामले से संबंधित जस्टिस वर्मा की कई सिफारिशों को मान लिया है। दुष्कर्म के अति-गंभीर मामलों में जहां फांसी की सजा का प्रावधान है वहीं अब इस आरोप के दोषी को उम्रकैद होने पर अपनी पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे ही गुजारनी होगी। वहीं छेड़खानी के मामले रोकने पर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए इसमें कड़ी सजा का प्रावधान किया है। सरकार ने यह काम अध्यादेश के जरिये करने का फैसला किया है। इस अध्यादेश पर शनिवार को ही राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हो सकते हैं।

देश-दुनिया को मर्माहत करने वाले दिल्ली के सामूहिक दुष्कर्म कांड के खिलाफ उपजे रोष के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए तमाम कानूनों में बदलाव लाने के लिए केंद्र सरकार तैयार हो गई है। शुक्रवार को कैबिनेट की एक अहम बैठक में जस्टिस वर्मा समिति की कई सिफारिशों के हिसाब से विभिन्न कानूनों में बदलाव के लिए अध्यादेश लाने का निर्णय लिया गया।

किसी समिति की सिफारिशों को आनन-फानन मानने और उनके हिसाब से अध्यादेश लाकर कानूनों में बदलाव लाने का यह एक दुर्लभ मामला है। इस अध्यादेश के तहत दुष्कर्म के अपराध से संबंधित भारतीय दंड संहिता [आइपीसी], आपराधिक प्रक्रिया संहिता [सीआरपीसी] और साक्ष्य अधिनियम में बदलाव किए जाएंगे। यह अध्यादेश बजट सत्र की समाप्ति तक प्रभावी रहेगा। संसद का बजट सत्र 20 दिन बाद ही है। सरकार को इस अध्यादेश को इसी सत्र में पारित कराना होगा। संसद की मुहर लगने के बाद विधेयक अध्यादेश की जगह ले लेगा।

हालांकि संसद में अपराध कानून संशोधन विधेयक पहले से लंबित है और वर्मा कमेटी के सुझावों को उसमें शामिल करने के लिए स्थायी समिति पहले से विचार कर रही है, लेकिन सरकार ने देश के मूड को देखते हुए देर न करना उचित समझा। वैसे वर्मा कमेटी के केवल उन्हीं सुझावों को अध्यादेश में जगह मिली हैं, जो दुष्कर्म से संबंधित हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून [अफस्पा] और जनप्रतिनिधि कानून में बदलाव से संबंधित कमेटी के सुझावों पर अलग से विचार किया जाएगा। इसके साथ ही पत्नी के साथ दुष्कर्म के आरोपों में कड़े प्रावधान की वर्मा कमेटी की सिफारिश को अध्यादेश से बाहर रखा गया है। दुष्कर्म के मामले में वर्मा कमेटी पहले ही मौत की सजा या केमिकल कैस्ट्रेशन [रासायनिक बंध्याकरण] की सजा की मांग ठुकरा चुकी है, लेकिन मंत्रिमंडल ने अध्यादेश में दुष्कर्म के अति गंभीर मामलों में मृत्युदंड की सजा को शामिल कर दिया है।

अध्यादेश जारी होने के बाद किसी महिला के साथ छेड़खानी, पीछा करने, फब्तियां कसने व अभद्र इशारा करने जैसे हल्के आरोपों में भी कड़ी सजा होगी। ऐसे मामलों में वर्मा कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप एक से सात साल तक सजा होगी। इसके साथ ही एसिड हमले में आरोपी को 10 साल तक सजा हो सकती है। दुष्कर्म की परिभाषा के विस्तार के साथ ही इसके आरोपी को अब ताउम्र जेल में गुजारनी होगी। वर्मा कमेटी की सुझावों के अनुरूप अध्यादेश में मानव तस्करी के लिए कठोर सजा का प्रावधान रखा गया है। अलग-अलग मामलों में इसके आरोपी को 10 साल से लेकर मृत्युपर्यत जेल में गुजारने की सजा हो सकती है।

अध्यादेश पर राष्ट्रपति की मुहर लगते ही इसमें शामिल प्रावधान कानून बन जाएंगे, लेकिन नियम के मुताबिक सरकार को संसद के अगले सत्र में इसे संसद में पास कराना होगा। इसके लिए गृह मंत्रालय पहले ही वर्मा कमेटी की रिपोर्ट स्थायी समिति को दे चुका है। यह समिति रिपोर्ट की सिफारिशों को पहले से लंबित अपराध कानून संशोधन विधेयक-2012 में शामिल करने पर विचार करेगी। सरकार स्थायी समिति की सिफारिशों के साथ संसद के अगले सत्र में विधेयक को पास कराने की कोशिश करेगी।

कैथोलिक ईसाइयों के संगठन ने महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए जस्टिस वर्मा समिति के सुझावों का स्वागत किया है। संगठन ने कहा है कि फांसी से बलात्कार जैसे अपराध को नहीं रोका जा सकता। ‘कैथोलिक बिशप्स कांफ्रेंस ऑफ इंडिया’ की ओर से फादर फ्रेडरिक डिसूजा ने कहा है कि कानून सख्त करने और समाज को जागरूक करने की प्रक्रिया साथ चलनी चाहिए।

वर्मा समिति की प्रमुख सिफारिशें

1. दुष्कर्म की सजा सात साल से उम्रकैद की जाए, पीड़िता को मुआवजा मिले

2. संरक्षण में दुष्कर्म की स्थिति में सजा 10 साल से उम्रकैद तक

3. दुष्कर्म से मौत या मौत की स्थिति तक पहुंचने पर कम से कम 20 साल या जीवनपर्यत जेल

4. नाबालिग से दुष्कर्म की स्थिति में 10 साल से उम्रकैद तक की सजा

5. सामूहिक दुष्कर्म की नई धारा बनाकर 20 साल से जीवनपर्यत कैद की सजा और पीड़ित को मुआवजा

6. सामूहिक दुष्कर्म से मौत या मौत की स्थिति में पहुंचने पर जीवनपर्यत कैद की सजा

7. दोबारा दुष्कर्म के आरोपी को जीवनपर्यत जेल की सजा

8. सुरक्षा का दायित्व निभाने में नाकामी की वजह से दुष्कर्म की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारी को सात से 10 साल की सजा

9. दुष्कर्म की परिभाषा में संशोधन कर ‘अप्राकृतिक यौनाचार’ को भी शामिल किया जाए

10. ऐसे मामलों में अदालत के संज्ञान लेते ही आरोपी के चुनाव लड़ने पर रोक लगे

11. दुष्कर्म के आरोपी को अफस्पा के तहत सुरक्षा न मिले

12. आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार से पूर्व अनुमति जरूरी नहीं

13. अपराध कानून संशोधन विधेयक-2012 में यौन उत्पीड़न की जगह पहले से मौजूद दुष्कर्म शब्द का प्रयोग किया जाए

14. आत्मरक्षा कानून में संशोधन कर एसिड हमले को भी शामिल किया जाए

15. एसिड हमले के दोषी को 10 साल से आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान

16. छेड़खानी व दुष्कर्म के मामले में एफआइआर दर्ज नहीं करने वाले अधिकारी को पांच साल की सजा का प्रावधान

17. अश्लील हरकत करने पर एक साल की सजा हो

18. शारीरिक छेड़छाड़ करने पर पांच साल की सजा

19. महिला के कपड़े जबरन उतारने पर तीन से सात साल की सजा

20. महिला का पीछा करने वाले को एक से तीन साल की सजा

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