मुंबई। विमानन नियामक डीजीसीए का किंगफिशर एयरलाइंस पर नरमी बरतने का कोई इरादा नहीं है। नियामक ने फिर से स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी पहले अपने कर्मचारियों और अन्य लेनदारों का बकाया भुगतान करे। इसके बाद ही उसके लाइसेंस के नवीनीकरण पर विचार किया जाएगा।
डीजीसीए का मानना है कि कर्ज संकट में फंसी विजय माल्या की यह एयरलाइंस पिछले छह माह से कर्मचारियों का बकाया भुगतान करने का वादा कर रही है, लेकिन अब तक इस वादे को नहीं निभाया है। इसके अलावा वेंडरों, संचालकों और लीजदाताओं का भी कंपनी पर भारी बकाया है। सूत्रों का कहना है कि लाइसेंस नवीनीकरण के कंपनी के आवेदन से पहले हमें इस पर विचार करना होगा। एयरलाइंस को ऐसी विश्वसनीय योजना तैयार करनी चाहिए, जिसमें सभी पक्षों के बकाया भुगतान की प्रतिबद्धता शामिल हो।
पिछले हफ्ते एयरलाइंस के सीईओ संजय अग्रवाल ने लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए डीजीसीए से मुलाकात की थी। इसके लाइसेंस की अवधि दिसंबर में ही खत्म हो चुकी है। पिछले महीने इसके सभी फ्लाइंग स्लॉट भी वापस ले लिए गए थे।
श्रेई वसूलेगी कर्ज
वित्तीय सेवा देने वाला श्रेई समूह किंगफिशर से 430 करोड़ रुपये का कर्ज वसूल करेगा। ब्रिटिश समूह डियाजियो द्वारा यूबी समूह की कंपनी यूनाइटेड स्प्रिट्स का प्रस्तावित अधिग्रहण पूरा होने के बाद यह वसूली की जाएगी।
श्रेई इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड की इकाई श्रेई वेंचर कैपिटल ने पिछले साल एयरलाइंस को आइसीआइसीआइ बैंक द्वारा दिए गए 430 करोड़ रुपये के कर्ज का अधिग्रहण किया था। श्रेई समूह के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हेमंत कनोरिया ने कहा कि इन डेट सिक्योरिटी की कीमत पिछले कुछ समय में काफी बढ़ी है। एयरलाइंस को यह कर्ज कंपनी के शेयरों और समूह की अन्य कंपनियों की संपत्तियों के आधार पर दिया गया है। इसलिए यह कर्ज पूरी तरह सुरक्षित है।