नई दिल्ली। दिल्ली में जमे हुए यमुना बचाओ आंदोलन से जुड़े आंदोलनकारियों ने फिलहाल आज से अनशन करने और संसद का घेराव करने के फैसले को टाल दिया है।
मंगलवार देर रात सरकार के साथ आंदोलन के प्रतिनिधियों की बातचीत में यमुना नदी के किनारे नाले बनाने पर सहमति बन गई है। दिल्ली में जुटे यमुना बचाओ आंदोलन में शामिल आंदोलनकारियों को केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सरकार के भरोसे के बाद अब आंदोलनकारियों को सरकार के फैसले के एलान का इंतजार है।
केंद्र सरकार से संदेशे की आस में यमुना मुक्तीकरण पदयात्रा में शामिल यमुना भक्त मंगलवार को बदरपुर के गांव आली में डेरा डाले रहे। दोपहर आई तेज आंधी भी इन भगीरथों का हौसला नहीं डिगा पाई। आंधी ने बेशक तंबुओं को उखाड़ने की कोशिश की, लेकिन हजारों यमुना भक्तों ने ऐसा नहीं होने दिया।
सरकार द्वारा सोमवार देर रात तक चली वार्ता की जानकारी यमुना रक्षक दल के नेताओं ने मंगलवार सुबह जब यमुना भक्तों को दी, तो वे उत्साहित हो गए। इस बीच रक्षक दल के अध्यक्ष संत जय कृष्ण दास ने उन्हें बताया कि सरकार ने उनकी एक ही मांग मानी है। शेष मांगों के लिए शाम तीन बजे का समय मांगा है, इसलिए वे संसद की ओर कूच नहीं करेंगे। दोपहर तीन बजे यमुना भक्तों को बताया गया कि अभी सरकार ने शाम तक का वक्त मांगा है। इसी दौरान वहां तेज आंधी आने लगी। आंधी के कारण तंबुओं को उखड़ता देख लोगों ने एकजुट होकर उन्हें उखड़ने नहीं दिया।
दिल्ली में ब्रज की रसिया
आली गांव के साथ लगते खाली मैदान में दो दिन से ब्रज की रसिया गाई जा रही हैं। ब्रज में कई गायन शैलियां प्रचलित हैं और रसिया ब्रज की प्राचीनतम गायकी कला है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला से संबंधित पद, रसिया आदि गायकी के साथ रासलीला का आयोजन होता है।