खुराफात से बाज आए पाकिस्तान

yaswant sinhaनई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित करने वाले पाकिस्तान को भारतीय संसद ने उसी के शब्दों में करार जवाब दे दिया है। पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए संसद ने जहां उसके प्रस्ताव को खारिज किया वहीं यह भी याद दिलाया कि गैर कानूनी रूप से पाक के कब्जे में मौजूद हिस्सा समेत पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। इसमें कोई हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लिहाजा पाकिस्तानी संसद को भारत में आतंकी गतिविधियों से बाज आना चाहिए।

दो दिन पहले श्रीनगर में पाकिस्तानी आतंकियों की करतूत के बाद गुरुवार को पाकिस्तानी राजनीतिक वर्ग ने आग में घी डाला था। पाकिस्तानी संसद ने प्रस्ताव पारित कर अफजल गुरु की फांसी की निंदा की थी। शुक्रवार को संसद में इसके खिलाफ जनभावना दिखी। सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो मुख्य विपक्ष भाजपा ने इसके खिलाफ आवाज उठाई और फिर दोनों सदनों में प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान को आईना दिखाया गया। लोकसभा में मीरा कुमार और राज्यसभा में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने सदन की भावना को शब्द देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने वादा किया था कि वह अपनी जमीन को भारत के खिलाफ आतंक के लिए उपयोग नहीं होने देगा। पाकिस्तान से साथ शांतिपूर्ण संबंध तभी हो सकता है जब वह अपना वादा निभाए। लेकिन इसके उलट पाकिस्तानी संसद ने प्रस्ताव पारित कर भारत के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप की कोशिश की है, जो अस्वीकार्य है। भारत इसे खारिज करता है। इसके साथ ही कहा कि कोई भी हस्तक्षेप की कोशिश करेगा तो उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

इससे पहले राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली और लोकसभा में भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने पाकिस्तान के रवैये के लिए सरकार को आड़े हाथों लिया था। जेटली ने कहा कि पाकिस्तान का प्रस्ताव इसलिए ज्यादा आपत्तिजनक है क्योंकि वहां के राजनीतिक वर्ग ने इसे हवा दी है। भारत को इसका मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए। पाकिस्तान को अहसास कराना जरूरी है कि पड़ोसी धर्म अब उसे निभाना होना। शांतिपूर्ण संबंध चाहिए तो पहल उसे करनी होगी। लोकसभा में यशवंत ने भी उसी सुर में कहा कि पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के लोगों की भावना भड़काने की कोशिश की है। पाकिस्तान नेशनल एसेंबली के सिर्फ दो दिन बचे थे, तब उन्होंने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर जम्मू कश्मीर को हथियाने का षड्यंत्र रचा है। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद मांगी है, जो चिंताजनक है। भारत को पहल करनी ही होगी। यशवंत ने ही संसद से प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान को जवाब देने का आग्रह किया था।

पाकिस्तान से इटली तक हो रही फजीहत

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। भारत के प्रति पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीव से लेकर इटली तक के रुख पर सरकार घिरती जा रही है। विपक्ष ने संसद में सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए विदेश नीति के संचालन पर चर्चा कराए जाने की मांग की है। इस मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने चर्चा की तारीख तय करने का आश्वासन दिया है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि माले से लेकर इस्लामाबाद और रोम तक में जिस तरह देश की फजीहत हो रही है और भारत को ठोकरें लग रही हैं, उसके मद्देनजर विदेश नीति के संचलन पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। जेटली ने कहा कि सदन प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से इस बारे में बयान चाहता है ताकि विषय पर चर्चा की जा सके। इसके लिए तारीख तय होनी चाहिए। जवाब में खड़े हुए संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ल ने कहा कि सदन और सभापति विदेश नीति पर चर्चा के लिए जो भी समय तय करेंगे, उस पर हम तैयार हैं। सदन में श्रीलंका में तमिलों के साथ हो रहे सलूक और भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी का मुद्दा भी उठा। द्रमुक व अन्नाद्रमुक सांसदों ने श्रीलंका में तमिलों के खिलाफ हो रही कार्रवाई के खिलाफ तमिलनाडु में छात्रों के आंदोलन का हवाला देते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग की।

error: Content is protected !!