ऊधम सिंह ने लंदन जाकर लिया जलियांवाला बाग का बदला

‘मैं अपने जीवन की परवाह नहीं करता। अगर मौत का इंतजार करते-करते मैं बूढ़ा हो जाऊं तो मेरे जीवन का क्या फायदा। अगर मरना ही है तो मैं जवान मौत मरना चाहूंगा और अब यही कर रहा हूं। मैं अपने देश के लिए मर रहा हूं।’

ये वो शब्द हैं जो अमर शहीद ऊधम सिंह ने 31 जुलाई 1940 को अपने अंतिम समय पर कहे थे। इस क्रांतिकारी ने जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लेने के लिए अंग्रेज अधिकारी जनरल ओडायर को लंदन में जाकर मारा था, जिसके बाद ऊधम सिंह का नाम भारतीय इतिहास में अमर हो गया।

13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन अमृतसर के जलियांवाला बाग में देशभक्त डॉक्टर सत्यपाल व सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी और रोलट एक्ट के विरोध में एक सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा में करीब 10 हजार लोग उपस्थित थे। अंग्रेज अधिकारी जनरल ओडायर ने अपने सिपाहियों के साथ इस सभा पर अंधाधुंध गोलीबारी करनी शुरू दी। हजारों भारतीय मारे गए।

ऊधम सिंह इस नरसंहार से बहुत विचलित हुए। उन्होंने ओडायर का खत्म करने की शपथ खाई। कुछ दिनों बाद ओडायर वापस इंग्‍लैंड चला गया। ऊधम सिंह ने प्रतिशोध लेने के लिए अपना पासपोर्ट बनवाया और इंग्‍लैंड चले गए। उन्हें अपने मकसद की पूर्ति में यहां 7 साल लग गए। 13 मार्च 1940 को जनरल ओडायर लंदन के कॉक्सटन हाल में एक सभा में शामिल होने के लिए गया।

ऊधम सिंह ने एक मोटी किताब के पन्नों को बीच से काटकर उसके अंदर रिवाल्वर छिपाकर रखा हु‌आ था। मौका मिलते ही उन्होंने मंच पर उपस्थित ओडायर पर निशाना साधते हुए 6 गोलियां चलाईं। ओडायर को दो गोलियां लगीं और वह वहीं ढेर हो गया। ओडायर को मारकर ऊधम सिंह भागे नहीं बल्कि उन्होंने अपनी गिरफ्तारी दी और अपना पूरा जीवन देश की आजादी के लिए समर्पित कर दिया।

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